श्रीलंका के आर्थिक संकट के चलते वहां सरकार विरोधी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. इन प्रदर्शनों से जोड़ते हुए अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. इस वीडियो में जनता कुछ लोगों को घेर कर उनसे सवाल-जवाब करती दिख रही है. जिनसे पूछताछ हो रही है उन्हें जमीन पर घुटने के बल बैठे देखा जा सकता है. इन लोगों ने सिर्फ नीले रंग की पैंट पहन रखी है और काफी घबराए हुए भीड़ से याचना कर रहे हैं. इस वीडियो को शेयर करते हुए ऐसा कहा जा रहा है कि याचना करते हुए दिख रहे लोग श्रीलंका के मंत्री हैं, जिन्हें लोगों ने सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान निर्वस्त्र कर दिया है.
इस पोस्ट का देखा जा सकता है.
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने अपनी पड़ताल में पाया कि तस्वीर में दिख रहे लोग श्रीलंका के मंत्री नहीं बल्कि कैदी हैं.
कैसे सामने आई सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने से हमें पता लगा कि ये वीडियो 10 मई को श्रीलंका के कई सोशल मीडिया हैंडल्स पर पोस्ट किया गया था. इस वीडियो को शेयर करते हुए कई लोगों ने लिखा था कि ये लोग कैदी हैं जिन्होंने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था. इसी वजह से इनसे पूछताछ की जा रही थी.
— sunanda deshapriya (@sunandadesh)
Video evidence has surfaced to prove that Mahinda Rajapaksa has bought prisoners to attack peaceful protestors on 090522.
These are prisoners from open prison cam at Watarka and they have been transported by Jailer Rathnayake
डेली मिरर श्रीलंका ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है कि ये लोग कैदी हैं.
It was reported that prisoners were bought today (10) to attack the protesters at .
— DailyMirror (@Dailymirror_SL)
इस वीडियो की सच्चाई की तह तक जाने के लिए हमने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के स्थानीय पत्रकारों से संपर्क किया. स्थानीय पत्रकार दिनेश डे अलविस ने इंडिया टुडे को ये बताया कि वीडियो में दिख रहे लोग सांसद नहीं हैं. उन्होंने बताया कि वीडियो में दिख रहे लोग खुद ही कह रहे हैं कि वो कैदी हैं. स्थानीय पत्रकार ने बताया, “इस वीडियो में लोग कह रहा है कि वो वातरेका ओपन जेल कैंप के कैदी हैं. वो ये भी बता रहे हैं कि उन्हें बाहर काम करने की इजाज़त है और एक जेलर खुद उन्हें जेल वापस जाते समय प्रदर्शन की जगह पर लेकर आया था.”
कोलंबो के एक दूसरे पत्रकार एआरवी लोशन ने भी इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने ये भी बताया कि वीडियो में दिख रहे लोगों में से कुछ को बाद में बाद में अस्पताल भी ले जाया गया.
ये वीडियो श्रीलंका के न्यूज़ पोर्टल हीरू न्यूज के वेरिफाइड यूट्यूब चैनल पर भी मौजूद है.
मुताबिक, ये वीडियो 9 मई को सोशल मीडिया पर तब वायरल हुआ जब श्रीलंका में हिंसा भड़क उठी. प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के समर्थकों ने सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर हमला बोल दिया. सरकार का विरोध करने वाले लोग राजपक्षे को देश के बुरे आर्थिक हालात के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे और उन्हें पद छोड़ देने की मांग कर रहे थे.
10 मई को श्रीलंका के इस बात का खंडन किया था कि कैदी किसी भी तरह से प्रदर्शनकारियों पर हुए इस हमले के लिए जिम्मेदार थे. हालांकि जेल विभाग ने इस बात को माना कि काम वाली जगह से जेल वापस लाते वक्त 58 से 181 तक कैदी कुछ देर के लिए लापता जरूर हो गए थे.
जेल प्रवक्ता के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि जेल वापस आते वक्त कैदियों के एक ग्रुप को प्रदर्शनकारियों ने जबरन बसों से उतार दिया. पुलिस के मुताबिक सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने कैदियों पर यह समझ कर हमला बोल दिया कि वो सरकार समर्थक भीड़ का हिस्सा हैं.
हालांकि हम इस बात की स्वतंत्र तरीके से तस्दीक नहीं कर सकते कि वीडियो में जिन लोगों पर भीड़ ने हमला किया उसका सही कारण क्या है. पर इतनी बात साफ है कि ये श्रीलंका के सांसद नहीं बल्कि कैदी हैं.