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कैसे शुरू हुआ नव संवत्सर यानी हिन्दू नववर्ष, जानें- इसका इत‍िहास

नव संवत्सर के इतिहास की बात करें तो इसकी शुरुआत शकरि महाराज विक्रमादित्य ने की. ब्रह्म पुराण में मान्‍यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि बनी. इसलिए यही वो दिन है जब से भारत वर्ष की काल गणना की जाती है.  व‍िस्‍तार से जानें...

प्रतीकात्‍मक फोटो प्रतीकात्‍मक फोटो

भारतीय नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है. ब्रह्म पुराण में मान्‍यता है कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही सृष्टि बनी. इसलिए यही वो दिन है जब से भारत वर्ष की काल गणना की जाती है. हेमाद्रि के ब्रह्म पुराण के अनुसार, ब्रह्मा जी ने पृथ्वी की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन की थी. इसीलिए पंचांग के अनुसार हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को नववर्ष शुरू हो जाता है. इस बार हिंदू नववर्ष, 13 अप्रैल 2021 से शुरू होगा.

नव संवत्सर के इतिहास की बात करें तो इसकी शुरुआत शकरि महाराज विक्रमादित्य ने की. हिन्दू धर्म में चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नवसंवत की शुरुआत होती है. इसे भारतीय नववर्ष भी कहा जाता है. इसका आरम्भ विक्रमादित्य ने किया था, इसलिए इसे विक्रम संवत भी कहा जाता है. जानें- क्या होता है विक्रम संवत, इसकी शुरुआत और दूसरे कैलेंडर से क‍ितना अलग है.

शक संवत और विक्रम संवत में अंतर

शक संवत को सरकारी रूप से अपनाने के पीछे ये वजह दी जाती है कि प्राचीन लेखों, शिला लेखों में इसका वर्णन देखा गया है. इसके अलावा यह संवत विक्रम संवत के बाद शुरू हुआ. अंग्रेजी कैलेंडर से ये 78 वर्ष पीछे है, 2021 - 78 = 1943 इस प्रकार अभी 1943 शक संवत चल रहा है.

ऐसे शुरू हुआ विक्रम संवत

कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने इसकी शुरुआत की थी. उनके समय में सबसे बड़े खगोल शास्त्री वराहमिहिर थे. जिनके सहायता से इस संवत के प्रसार में मदद मिली. ये अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है, 2021 + 57 = 2078 विक्रम संवत चल रहा है.

इसमें इस्लामी कैलेंडर के अनुसार हिजरी संवत को छोड़ कर सभी कैलेंडर में जनवरी या फरवरी में नये साल का अगाज होता है. भारत में कई कैलेंडर प्रचलित हैं जिनमें विक्रम संवत और शक संवत प्रमुख हैं.

पूरी दुनिया में काल गणना का दो ही आधार है- सौर चक्र और चंद्र चक्र. सौर चक्र के अनुसार पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा करने में 365 दिन और लगभग छह घंटे लगते हैं. इस तरह गणना की जाए तो सौर वर्ष पर आधारित कैलेंडर में साल में 365 दिन होते हैं जबकि चंद्र वर्ष पर आधारित कैलेंडरों में साल में 354 दिन होते हैं. जानें कौन से विश्व के कुछ प्रचलित कैलेंडर हैं.

ग्रेगोरियन कैलेंडर

ग्रेगोरियन कैलेंडर का आरंभ ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह के जन्म के चार साल बाद हुआ. इसे एनो डोमिनी अर्थात ईश्वर का वर्ष भी कहते हैं. यह कैलेंडर सौर वर्ष पर आधारित है और पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल होता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के महीने 30 और 31 दिन के होते हैं, लेकिन फरवरी में सिर्फ 28 दिन होते हैं. फिर प्रत्येक चार साल बाद लीप ईयर आता है जिसमें फरवरी में 29 और वर्ष में 366 दिन होते हैं.

हिब्रू कैलेंडर

हिब्रू कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर से भी पुराना है. बता दें कि यहूदी अपने दैनिक काम-काज के लिए इसका प्रयोग करते थे. इस कैलेंडर का आधार भी चंद्र चक्र ही है, लेकिन बाद में इसमें चंद्र और सूर्य दोनों चक्रों का समावेश किया गया. इस कैलेंडर का पहला महीना शेवात 30 दिनों का और अंतिम महीना तेवेन 29 दिनों का होता है.

हिज़री कैलेंडर

हिज़री कैलेंडर का आरंभ 16 जुलाई 622 को हुआ. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन इस्लाम के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद मक्का छोड़कर मदीना को प्रस्थान कर गए थे. इस घटना को हिजरत और हिजरी संवत चंद्र वर्ष पर आधारित मानते हैं. इसमें साल में 354 दिन होते हैं. सौर वर्ष से 11 दिन छोटा होने के कारण कैलेंडर वर्ष के अंतिम माह में कुछ दिन जोड़ दिए जाते हैं.

 

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