कभी अमीरी और शोहरत के लिए मशहूर... दस साल में वेनेजुएला कैसे हो गया वीरान

दक्षिण अमेरिका का सबसे अमीर देश रहा वेनेजुएला आज एक खाली होता देश बन गया है. पिछले दशक में लाखों लोग यहां से पलायन कर चुके हैं. आर्थिक तबाही और राजनीतिक अस्थिरता ने इसे ऐसा खोखला कर दिया है कि अब नक्शे पर केवल भीड़ दिखती है, वे लोग नहीं जो इसे छोड़कर जा चुके हैं.

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वेनेजुएला में लगातार घट रही है आबादी. (Photo:AFP) वेनेजुएला में लगातार घट रही है आबादी. (Photo:AFP)

दीपू राय

  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:01 PM IST

वेनेजुएला में आर्थिक पतन और बढ़ती महंगाई के कारण लाखों नागरिक पलायन कर रहे हैं, जिससे अंदरूनी इलाके खाली हो रहे हैं. डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक जैसे कुशल युवा बेहतर भविष्य की तलाश में देश छोड़ रहे हैं. राजनीतिक तनाव ने पलायन की नई लहर को बढ़ावा दिया है, जिससे सार्वजनिक सेवाएं कमजोर हो रही हैं. राजधानी काराकास और उत्तरी तट पर आबादी बनी हुई है, लेकिन देश की स्थिरता खतरे में है.

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एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पहली नजर  वेनेजुएला की जनसंख्या का काफी घनी नजर आती है, लेकिन अंदर के इलाके पूरी तरह से खाली पड़े हैं. क्योंकि आर्थिक पतन और महंगाई की वजह से लोगों का जीवन जीना नामुमकिन होने हो रहा है और इस वजह से लाखों नागरिक पलायन कर रहे हैं.

खाली हो रहे हैं अंदरूनी इलाके

रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तरी तट और राजधानी काराकास में लोगों की घनी आबादी है, लेकिन अंदरूनी इलाके खाली हो रहे हैं. डॉक्टरों और इंजीनियरों जैसे कुशल युवाओं ने बेहतर भविष्य के लिए देश छोड़ दिया है. वहीं, राजनीतिक तनाव ने अब पलायन की नई लहर का डर पैदा कर दिया है.

कैसे तबाह हुआ वेनेजुएला

वेनेजुएला कभी अपने तेल भंडार की बदौलत बेहद समृद्ध हुआ करता था. तेल की कमाई से सरकार ने शहरों में शानदार बुनियादी ढांचा तैयार किया था, लेकिन अचानक पूरी अर्थव्यवस्था ढह गई और कीमतें नियंत्रण से बाहर हो गईं. बढ़ती महंगाई से पैसों का कोई महत्व नहीं बचा और रोजमर्रा की जिंदगी बेहद नाजुक हो गई. नक्शे पर आज भी काराकास और मराकाइबो जैसे शहर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. हालांकि, एक दशक में लाखों नागरिक स्थिरता और बेहतर जिंदगी की तलाश में पलायन कर चुके हैं.

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खोखले होते जा रहे हैं शहर

बताया जा रहा है कि देश छोड़ने वालों में ज्यादातर डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक जैसे युवा और कुशल लोग शामिल हैं. इनके जाने से अस्पताल, स्कूल और सार्वजनिक सेवाएं पूरी तरह खोखली हो गई हैं. शहरों आज भी भीड़ भाड़ है, लेकिन उनकी बुनियादी ताकत खत्म हो चुकी है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि वेनेजुएला अभी-भी लैटिन अमेरिका के सबसे शहरीकृत देशों में से एक है. जब वहां बिजली गुल होती है या पानी की सप्लाई रुकती है तो लाखों लोग एक साथ इस भारी दबाव और अभाव को महसूस करते हैं.

मौजूदा तनाव में बढ़ाई अनिश्चितता

वहीं,  मौजूदा राजनीतिक तनाव और सत्ता को लेकर ताजा विवादों ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है. इन परिस्थितियों ने लोगों के मन में देश छोड़ने का डर पैदा कर दिया है जो सीमाएं कभी निराशा में पार की गई थीं, वे अब फिर से व्यस्त होने लगी हैं. वेनेजुएला आज उपस्थिति और अनुपस्थिति के बीच झूल रहा है. लोग उन शहरों में सिमटे हुए हैं, जिन्हें कभी खुशहाली के लिए बनाया गया था.

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