80–90 की उम्र में भी कुर्सी पर माई लॉर्ड... अमेरिका में जज कभी रिटायर क्यों नहीं होते? उम्र, कानून और विवाद की पूरी कहानी

अमेरिकी न्यायपालिका के दिग्गज जज 92 साल के एल्विन हेलरस्टीन चर्चा में हैं. वे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के सबसे बड़े केस की सुनवाई कर रहे हैं. ऐसे में अमेरिका में जजों की उम्र को लेकर हर कोई चकित हो रहा है. दरअसल, दुनिया के ज्यादातर देशों में जजों के लिए रिटायरमेंट उम्र तय है, लेकिन अमेरिका में संघीय जज और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जीवनभर पद पर बने रह सकते हैं.

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अमेरिका की न्याय व्यवस्था दुनिया से अलग क्यों है? (File Photo) अमेरिका की न्याय व्यवस्था दुनिया से अलग क्यों है? (File Photo)

उदित नारायण

  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:53 AM IST

अमेरिका में 92 साल के जज एल्विन हेलरस्टीन आज भी कोर्ट में बैठकर बड़े केस सुन रहे हैं. सवाल उठता है कि अमेरिका में जज रिटायर क्यों नहीं होते, क्या उनकी उम्र की कोई सीमा नहीं है? अमेरिका में कई बार देखा जाता है कि 80–90 साल के जज भी अदालत में सक्रिय रहते हैं. भारत या दूसरे देशों के उलट, अमेरिका में जजों के लिए रिटायरमेंट की कोई तय उम्र नहीं है. इसके पीछे संविधान, कानून और राजनीति- तीनों की बड़ी भूमिका है.

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दरअसल, अमेरिका में ज्यादातर नौकरियों में रिटायरमेंट उम्र तय होती है, लेकिन संघीय जज और सांसद इस नियम से बाहर हैं. यही वजह है कि कई जज और नेता 80-90 की उम्र पार करने के बाद भी अहम संवैधानिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. 

आजीवन पद पर रहने के लिए सिर्फ एक शर्त...

न्यूयॉर्क कोर्ट में वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के मामले में 92 साल के सीनियर जज एल्विन हेलरस्टीन सुनवाई कर रहे हैं. अमेरिका का संविधान साफ कहता है कि फेडरल जज आजीवन पद पर रह सकते हैं, बशर्ते उनका आचरण ठीक रहे. संविधान के अनुच्छेद के अनुसार, जब तक जज पर कोई गंभीर आरोप साबित ना हो जाए, वह जीवनभर जज बना रह सकता है.

इस नियम के पीछे तीन बड़े कारण माने जाते हैं. पहला- राजनीतिक दबाव से आजादी. यानी जज को डर नहीं रहता कि सरकार या राष्ट्रपति उसे हटा देगा. दूसरा- निष्पक्ष फैसले. जज अपने फैसले वोट, चुनाव या सरकार को खुश करने के लिए नहीं करता. तीसरा- न्यायपालिका की स्वतंत्रता. कोर्ट को कार्यपालिका और संसद से अलग और मजबूत रखना माना जाता है.

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फिर बूढ़े होने पर क्या करते हैं जज?

अमेरिका में जजों के पास एक विकल्प होता है जिसे कहा जाता है- सीनियर स्टेटस. यह फुल रिटायरमेंट नहीं है. जज चाहें तो कम केस सुनें. सिर्फ बड़े या खास केस लें. अपनी सुविधा से काम करें, लेकिन वे जज बने रहते हैं. जज एल्विन हेलरस्टीन ने भी 2011 में सीनियर स्टेटस लिया, लेकिन आज भी बड़े केस सुन रहे हैं.

विवादों की वजह क्यों बना ये सिस्टम?

इस व्यवस्था पर कई बार सवाल उठे हैं. बड़ा मसला उम्र और सेहत से जुड़ा होता है. 85-90 साल की उम्र में फैसले लेने की क्षमता पर सवाल होते हैं. मानसिक और शारीरिक फिटनेस की बहस अक्सर देखी जाती है. इसके अलावा, जज के पद खाली नहीं होते है. क्योंकि जब जज हटता नहीं, तब तक नया जज नियुक्त नहीं हो सकता. इसमें राजनीतिक खेल के भी आरोप लगते. कई जज जानबूझकर अपनी पसंद की सरकार आने तक रिटायर नहीं होते, ताकि अगला जज उसी पार्टी का हो.

भारत से अलग क्यों है अमेरिका का सिस्टम?

अगर भारत और अमेरिका में जजों के रिटायरमेंट उम्र की तुलना करें तो भारत में सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल में रिटायर हो जाते हैं. जबकि हाई कोर्ट में जज के रिटायरमेंट की उम्र सीमा 62 साल है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में जजों के रिटायरमेंट की कोई तय उम्र नहीं है. हाईकोर्ट में भी आजीवन नियुक्ति होती है. ऐसे में सीनियर स्टेटस का विकल्प रहता है. यानी भारत में उम्र तय है ताकि सिस्टम में नए जज आते रहें. जबकि अमेरिका में फोकस स्वतंत्रता पर है, भले उम्र कितनी भी हो.

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विशेषज्ञ कहते हैं कि दुनिया के ज्यादातर देशों में रिटायरमेंट की व्यवस्था पहले से मौजूद है, जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ना उम्र सीमा है, ना टर्म लिमिट, जो असामान्य है.

पिछले साल चुनाव में देश के नेताओं की बढ़ती उम्र बड़ा मुद्दा बनी. पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन अपने कार्यकाल के अंत में 82 वर्ष के थे, जबकि डोनाल्ड ट्रंप 78 साल की उम्र में दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेकर अमेरिकी इतिहास के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति बने.

अमेरिकी संसद में भी उम्र का यही हाल है. हाल तक सीनेट में रिपब्लिकन और हाउस में डेमोक्रेटिक नेतृत्व ऑक्टोजेनेरियन नेताओं के हाथ में था. सीनेटर मिच मैककॉनेल ने 83वें जन्मदिन पर रिटायरमेंट की घोषणा की, जबकि नैन्सी पेलोसी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा करते समय 86 वर्ष की होंगी. कांग्रेस के एक सदस्य की औसत उम्र करीब 59 साल है.

सुप्रीम कोर्ट की बात करें तो जस्टिस क्लेरेंस थॉमस (77) और सैमुअल एलिटो (75) सबसे वरिष्ठ हैं. उनके बाद सोनिया सोतोमयोर (71) और चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स (70) आते हैं. फेडरल ज्यूडिशियल सेंटर के मुताबिक 2024 में अमेरिकी संघीय जजों की औसत उम्र 67.68 साल थी.

प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर अमेरिकी नागरिक राजनेताओं और सुप्रीम कोर्ट जजों के लिए उम्र सीमा का समर्थन करते हैं. लेकिन इसके लिए संविधान संशोधन जरूरी होगा. अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति के लिए न्यूनतम उम्र 35, सीनेटर के लिए 30 और प्रतिनिधि के लिए 25 तय करता है, लेकिन अधिकतम उम्र तय नहीं करता. सुप्रीम कोर्ट जस्टिस के लिए तो न्यूनतम या अधिकतम उम्र का कोई प्रावधान ही नहीं है.

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न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के 20 फीसदी से ज्यादा सदस्य 70 साल या उससे ज्यादा उम्र के हैं. अमेरिका में पहले से कहीं ज्यादा उम्रदराज लोग सत्ता में हैं.

राज्य स्तर पर स्थिति अलग है. 50 में से 32 अमेरिकी राज्यों में जजों के लिए अनिवार्य रिटायरमेंट उम्र तय है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रशासनिक रूप से इसे लागू करना आसान है और उम्र से जुड़ी मानसिक गिरावट की आशंका कुछ हद तक कम होती है.

दुनिया में जजों के रिटायरमेंट की उम्र क्या है?

वैश्विक स्तर पर देखें तो ज्यादातर देशों में उच्चतम अदालतों के जजों के लिए 60 से 75 साल के बीच अनिवार्य रिटायरमेंट उम्र या तय कार्यकाल होता है. ऑस्ट्रेलिया ने 1977 में लाइफ टेन्योर खत्म कर दिया था. जापान में सुप्रीम कोर्ट जजों के लिए 70 साल की रिटायरमेंट उम्र है, जबकि बेल्जियम और न्यूजीलैंड जैसे देशों में भी उम्र सीमा लागू है.

समझ लीजिए अमेरिकी ज्यूडिशियल सिस्टम...

- फेडरल जज बनने के लिए उम्र, शिक्षा या पेशे से जुड़ी कोई तय शर्त नहीं है. इसके अलावा न तो कोई योग्यता परीक्षा होती है और न ही अनिवार्य ट्रेनिंग. हालांकि इतिहास में ऐसे जज रहे हैं जिनके पास कानून की डिग्री नहीं थी, लेकिन आधुनिक समय में फेडरल जज आमतौर पर लॉ स्कूल से स्नातक होते हैं और नियुक्ति से पहले उनके पास काफी कानूनी अनुभव होता है.

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- Article III के तहत आने वाले जजों को अमेरिका के राष्ट्रपति नामित करते हैं और सीनेट उनकी पुष्टि करती है. जब किसी जज के रिटायर होने, सीनियर स्टेटस लेने या निधन के कारण पद खाली होता है तो उस राज्य के सीनेटर, जहां रिक्ति होती है, व्हाइट हाउस को संभावित उम्मीदवारों के नाम सुझा सकते हैं. कुछ राज्यों में सीनेटर मेरिट सिलेक्शन कमेटियों के जरिए समुदाय से सुझाव लेते हैं. राष्ट्रपति को अन्य सोर्स से भी नाम मिल सकते हैं.

- संभावित उम्मीदवारों की व्हाइट हाउस के स्टाफ और एफबीआई द्वारा गहन जांच की जाती है. अमेरिकन बार एसोसिएशन उम्मीदवारों की पेशेवर योग्यता का आकलन करता है, हालांकि इसकी राय कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती.

- उम्मीदवारों को सीनेट ज्यूडिशियरी कमेटी के लिए एक विस्तृत प्रश्नावली भरनी होती है और फिर खुली सीनेट सुनवाई में उनके न्यायिक रिकॉर्ड पर सवाल पूछे जाते हैं. अगर कमेटी उम्मीदवार के पक्ष में वोट देती है तो नाम पूरी सीनेट के पास अंतिम मतदान के लिए भेजा जाता है.

- Article III के तहत जजों को आजीवन कार्यकाल मिलता है. इनके लिए कोई अनिवार्य रिटायरमेंट उम्र नहीं है और संविधान के अनुसार इन्हें सिर्फ 'गंभीर अपराध और दुराचार' के आधार पर ही हटाया जा सकता है. यह एक बहुत ऊंचा मानदंड है. अमेरिका के इतिहास में अब तक सिर्फ आठ फेडरल जजों को हटाया गया है.

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- दिवालिया जज अपने सर्किट के एक्टिव कोर्ट ऑफ अपील्स जजों के बहुमत से नियुक्त होते हैं और उनका कार्यकाल 14 साल का होता है, जिसे नवीनीकृत किया जा सकता है. मैजिस्ट्रेट जज अपने जिले के एक्टिव डिस्ट्रिक्ट जजों के बहुमत से चुने जाते हैं और उनका कार्यकाल 8 साल का होता है, जिसे बढ़ाया जा सकता है.

राज्यों के जज कैसे चुने जाते?

- अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में जजों की नियुक्ति की अपनी-अपनी प्रक्रियाएं होती हैं. आमतौर पर ये पांच तरीकों के किसी न किसी संयोजन पर आधारित होती हैं. इनमें गैर-दलीय चुनाव, दलीय चुनाव, राज्यपाल द्वारा नियुक्ति, विधानसभा द्वारा नियुक्ति, मेरिट सिलेक्शन कमेटी के जरिए चयन शामिल है.

- आधे से ज्यादा राज्य अपने कम से कम कुछ जजों को चुनाव के जरिए चुनते हैं (दलीय और गैर-दलीय दोनों). पांच राज्य ऐसे हैं जहां सभी जज दलीय चुनावों से चुने जाते हैं. ओहायो में जजों के लिए दलीय प्राइमरी चुनाव होते हैं, लेकिन जनरल चुनाव गैर-दलीय होते हैं.

- मिशिगन में सुप्रीम कोर्ट के जजों का नामांकन पार्टी कन्वेंशन में होता है और वे गैर-दलीय जनरल चुनाव लड़ते हैं. टेक्सास में सभी जज दलीय चुनावों से चुने जाते हैं.

मेरिट सिलेक्शन कमेटी क्या होती है?

- मेरिट सिलेक्शन या नामांकन कमेटियां आमतौर पर गैर-दलीय वकीलों और गैर-वकीलों से बनी होती हैं. ये आवेदकों की जांच करती हैं और योग्य उम्मीदवारों की सूची राज्यपाल को भेजती हैं. कुछ राज्यों में राज्यपाल इन्हीं नामों में से किसी एक को चुनते हैं, लेकिन उस चयन को विधानसभा की मंजूरी जरूरी होती है.

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- न्यू हैम्पशायर में राज्यपाल के चयन को संवैधानिक रूप से अधिकृत कार्यकारी परिषद की पुष्टि चाहिए होती है. आमतौर पर नियुक्त जज पहले कम अवधि का प्रारंभिक कार्यकाल पूरा करता है और फिर रिटेंशन चुनाव होता है, जिसमें जनता से पूछा जाता है कि जज को आगे के लंबे कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त किया जाए या नहीं.

रिटायरमेंट और ट्रेनिंग का क्या प्रावधान?

अधिकांश राज्यों में जजों के लिए या तो अनिवार्य कार्यकाल सीमा होती है या फिर अनिवार्य रिटायरमेंट उम्र तय होती है. ज्यादातर राज्यों में जजों के लिए किसी न किसी तरह की न्यायिक ट्रेनिंग भी जरूरी होती है, जो नियुक्ति से पहले, सेवा के दौरान या दोनों समय हो सकती है.

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