US के इस्लामिक प्रचारक की ब्रिटेन में एंट्री बैन, हमास का किया था समर्थन

ब्रिटेन की गृह सचिव शबाना महमूद ने अमेरिकी इस्लामिक प्रचारक डॉ. शदी अल-मसरी की यूके यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने कहा कि नफरत फैलाने वालों को यूके में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. ये कदम पिछले महीने पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर तुहा इब्न जलील के वीजा रद्द करने की घटना के बाद आया है.

Advertisement
UK ने इस्लामिक प्रचारक शदी अल-मसरी की एंट्री पर लगाया बैन. (photo: Social Media) UK ने इस्लामिक प्रचारक शदी अल-मसरी की एंट्री पर लगाया बैन. (photo: Social Media)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:32 PM IST

ब्रिटेन की गृह सचिव शबाना महमूद ने अमेरिकी इस्लामिक प्रचारक डॉ. शदी अल-मसरी की यूके एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया है. अल-मसरी पर आरोप है कि उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के इजरायल पर हमास के हमले के बाद सोशल मीडिया पर हमास का बचाव किया और उसके द्वारा किए गए हमलों को सही ठहराया था.

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल-मसरी बर्मिंघम, बोल्टन और इल्फोर्ड (लंदन) में मुस्लिम चैरिटी ग्लोबल रिलीफ ट्रस्ट (GRT) द्वारा आयोजित वार्ताओं के लिए इस वीकेंड पर यूके आने वाले थे. उनकी यात्रा 4 से 6 जनवरी के बीच निर्धारित थी, लेकिन गृह सचिव ने उनकी ट्रैवल ऑथराइजेशन को रद्द कर दिया है.

Advertisement

'नफरत फैलाने वालों की एंट्री बैन'

यूके गृह मंत्रालय ने व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन एक प्रवक्ता ने कहा, 'ब्रिटेन में उन विदेशी नागरिकों के लिए कोई जगह नहीं है जो नफरत फैलाते हैं या चरमपंथी विचारों को बढ़ावा देते हैं. कोई भी व्यक्ति जो नफरत भड़काने या समुदायों को बांटने की कोशिश करेगा, उसे यूके में एंट्री नहीं दी जाएगी.'

हमास का समर्थन

अल-मसरी का गाजा में इजरायल-हमास संघर्ष के बारे में विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट का इतिहास रहा है, जिनमें वे अक्सर हमास की कार्रवाइयों को सही ठहराते हैं. वे न्यू जर्सी के न्यू ब्रंसविक इस्लामिक सेंटर में शिक्षा और सामुदायिक मामलों के निदेशक हैं.

कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद ने की रोक की मांग

विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद निक टिमोथी ने लेबर पार्टी सरकार से अल-मसरी की एंट्री रोकने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि गृह सचिव के पास विदेशी नागरिकों को सार्वजनिक हित के खिलाफ होने पर रोकने की मजबूत ताकत हैं और इस मामले में उन्हें बिना हिचकिचाहट अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए.

Advertisement

मानवीय आयोजन या कुछ और?

मुस्लिम चैरिटी 'ग्लोबल रिलीफ ट्रस्ट' (GRT) ने अल-मसरी के कार्यक्रमों का आयोजन किया था. चैरिटी का कहना है कि अल-मसरी की भागीदारी केवल एक मानवीय कार्यक्रम के समर्थन में थी, जिसका उद्देश्य कमजोर समुदायों की मदद करना था.

वहीं, अल-मसरी ने अपने बचाव में कहा कि उनका संदेश हमेशा दया और जुड़ाव का रहा है. उन्होंने कहां कि मुझे इंग्लैंड और इंग्लैंड के लोग बहुत पसंद हैं, मैं वहां चार साल रहा हूं और वापस जाने के लिए उत्साहित हूं. उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके प्रवेश पर लगा ये प्रतिबंध जल्द ही हट जाएगा, ताकि वे वहां जा सकें.

सरकार की सख्ती

दूसरी ओर ये घटना पिछले महीने की याद दिलाती है, जब गृह सचिव महमूद ने पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर तुहा इब्न जलील का वीजा रद्द किया था. जलील ने इजरायल के खिलाफ जिहाद की अपील की थी और वह यूके में मस्जिदों, कम्युनिटी सेंटरों, विश्वविद्यालय और स्कूल में  भाषण देने वाले थे.

बताया जाता है कि उन पर लगाया गया यात्रा प्रतिबंध इजरायल-हमास और भारत-पाकिस्तान संघर्ष समेत ऑनलाइन पोस्ट की गई भड़काऊ टिप्पणियों और सामग्री से जुड़ा था.

वीजा नियमों में बड़ा बदलाव

वहीं, अप्रैल 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री  ऋषि सुनक के नेतृत्व वाली सरकार ने एक नई नीति घोषित की थी. इसके तहत नफरत फैलाने वाले प्रचारकों और चरमपंथियों को स्वचालित रूप से गृह मंत्रालय के पास भेजा जाएगा, ताकि उनका वीजा रद्द या अस्वीकार किया जा सके.

सुनक ने उस वक्त स्पष्ट किया था कि यदि कोई वीजा पर यहां रहकर नफरत फैलाता है या लोगों को डराने की कोशिश करता है तो उसके यहां रहने का अधिकार छीन लिया जाएगा. साथ ही विश्वविद्यालयों में भी चरमपंथी गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement