UAE ने कर दिखाया नामुमकिन को मुमकिन! भारत का जिक्र कर क्या बोले वहां के मंत्री

यूएई तेल से अपनी अर्थव्यवस्था की निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा है और वो सफल होता भी दिख रहा है. साल 2023 में यूएई के गैर तेल निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी आई है. इसका एक बड़ा कारण यूएई का दूसरे देशों के साथ CEPA समझौता करना है. भारत यूएई के साथ CEPA समझौता करने वाला पहला देश था.

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दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद अल-मकतूम (बाएं) के साथ यूएई के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल-मकतूम (दाएं) (Photo- Reuters) दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद अल-मकतूम (बाएं) के साथ यूएई के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल-मकतूम (दाएं) (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 5:38 PM IST

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब समेत मध्य-पूर्व के कई देश तेल पर अपनी निर्भरता कम करते हुए अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं. इस क्षेत्र में यूएई को बड़ी सफलता हाथ लगी है जिसकी जानकारी यूएई के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल-मकतूम ने रविवार को दी है. उन्होंने कहा कि 2023 में यूएई का गैर तेल व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.

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सोशल मीडिया साइट एक्स पर किए गए एक ट्वीट में अल-मकतूम ने कहा, 'संयुक्त अरब अमीरात का गैर-तेल व्यापार 2023 में रिकॉर्ड उच्च 3.5 खरब दिरहम (952.93 अरब डॉलर) तक पहुंच गया है. यह तेल पर निर्भरता कम करने की देश की पहल को दिखाता है.'

यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी अल जायौदी ने एक भी एक पोस्ट कर कहा कि 2022 से गैर-तेल वस्तुओं का व्यापार 12.6% बढ़ गया है जबकि वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 1 खरब दिरहम को पार कर गया है जो कि एक नया रिकॉर्ड है.

खाड़ी के तेल निर्यातक देश यूएई ने साल 2021 के बाद से अपने आय के स्रोतों और आर्थिक क्षेत्रों में विविधता लाने के बड़े प्रयास शुरू किए हैं. उसी साल यूएई ने द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और सहयोग समझौतों को बढ़ावा देने के लिए कई देशों के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPAs) किए. भारत यूएई का पहला CEPA पार्टनर बना था.

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यूएई की इस सफलता में भारत का भी योगदान

यूएई के गैर-तेल सेक्टर ने 2023 के पहले छह महीनों में जीडीपी की वृद्धि दर से भी काफी बेहतर प्रदर्शन किया है. जीडीपी में जहां 3.7% की बढ़ोतरी हुई वहीं, गैर-तेल सेक्टर लगभग 6% बढ़ गया.

जायौदी ने बताया, 'CEPA हमारे विदेशी व्यापार आंकड़ों को आगे बढ़ाने में एक प्रमुख भूमिका निभाने जा रहा है. यूएई का अपने पहले CEPA भागीदार, भारत के साथ व्यापार पिछले साल लगभग 4% बढ़ा, जबकि तुर्की के साथ व्यापार दोगुना से अधिक हो गया जो कि यूएई के शीर्ष 10 व्यापार साझेदारों में सबसे तेज वृद्धि है.'

यूएई गैर-तेल सेक्टर्स जैसे यात्रा, पर्यटन, सूचना और संचार तकनीक, फाइनेंशियल और प्रोफेशनल सर्विसेज को बढ़ावा दे रहा है. खाड़ी देश सोना, एल्यूमीनियम, आभूषण, तांबे के तार और एथिलीन पॉलिमर जैसी चीजों के निर्यात को भी तेजी से बढ़ा रहा है.

जायौदी ने कहा कि यूएई का गैर-तेल वस्तु निर्यात पिछले साल 16.7% बढ़कर 441  अरब दिरहम हो गया. यह यूएई के कुल विदेशी व्यापार का 17.1% का है. साल 2019 में यह महज 14.1% था. वहीं, यूएई का पुनः निर्यात (Re-Exports) लगभग 7% बढ़कर 690 अरब दिरहम हो गया.

हूतियों के हमले का यूएई के व्यापार पर असर

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इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही लाल सागर से गुजर रहे जहाजों को अपना निशाना बना रहे हैं.

उनका कहना है कि वो इजरायल से संबंध रखने वाले हर जहाज पर हमले करेंगे. हूतियों के हमले के डर से लाल सागर से होने वाला व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. लाल सागर एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग है. साल 2023 में लाल सागर से होकर 12-15% वैश्विक व्यापार हुआ था लेकिन हूतियों के हमले से इसमें रुकावट आ रही है. 

यूएई के विदेश व्यापार मंत्री जायौदी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए कहा है कि हूती विद्रोहियों के लाल सागर से गुजर रहे जहाजों पर हमले से यूएई पर अब तक कोई असर नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि हमारा देश इससे परेशान नहीं होगा... हम एक अच्छी स्थिति में हैं. यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम चीजों को लेकर कितने लचीले हैं और सामने आने वाली चुनौतियों के लिए यहां का सिस्टम कितना अनुकूल है.'

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