दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने औपचारिक रूप से अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को मंजूरी दी. इसे ‘ट्रंप कोरोलरी (Trump Corollary)’ नाम दिया गया. अमेरिका की यह नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पिछले सौ साल में पहली बार पश्चिमी गोलार्ध में उसकी ताकत दिखाने की सबसे आक्रामक कोशिश मानी जा रही है.
इसका प्रभाव सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लैटिन अमेरिका से लेकर रूस और चीन तक, पूरी दुनिया की राजनीति पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है.
वेनेजुएला पर ट्रंप का अभूतपूर्व कब्जा इसी नई नीति का प्रत्यक्ष नतीजा माना जा रहा है, इसलिए इस पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है.
यह 1823 की मूल मुनरो डॉक्ट्रिन और बाद में आई रूजवेल्ट कोरोलरी पर आधारित है. इसके तहत अमेरिका को 'इंटरनेशनल पुलिस पावर' की भूमिका दी जाती है और पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी सर्वोच्चता को राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य शर्त बताया जाता है.
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला में एक टार्गेटेड मिलिट्री ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन के तहत वेनेजुएला के बंदरगाहों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हवाई हमले किए गए, जिसके बाद स्पेशल फोर्सेज ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया.
अमेरिकी न्याय विभाग ने 2020 में मादुरो पर नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए थे. ट्रंप प्रशासन ने मादुरो के खिलाफ इस कार्रवाई को ड्रग कार्टेल से जुड़े एक शासन के खिलाफ निर्णायक कदम बताया.
ऑपरेशन के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला को 'चलाएगा' और दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों पर कंट्रोल का संकेत दिया. उन्होंने वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए अमेरिकी तेल कंपनियों को ले जाने की बात भी कही.
हालांकि, विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान से अमेरिका की असली मंशा और साफ हो गई. उन्होंने कहा कि पश्चिमी गोलार्ध 'हमारा' है और रूस, चीन व ईरान को यहां से बाहर निकलना होगा. इसके साथ ही सुधारों के लिए उन्होंने तेल नाकेबंदी की घोषणा भी की.
ट्रंप कोरोलरी पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभुत्व को दोबारा स्थापित करती है. इसका मकसद चीन और रूस जैसे बाहरी प्रतिद्वंद्वियों को गोलार्ध से बाहर रखना और अहम संसाधनों व सप्लाई चेन को सुरक्षित करना है.
वेनेजुएला पर कब्जा ट्रंप की नीति का पहला बड़ा उदाहरण हैं जो इसके ऐलान के कुछ ही हफ्तों बाद सामने आया.
मादुरो के शासन में वेनेजुएला चीन, रूस और ईरान के लिए एक अहम केंद्र बन गया था. चीन ने 2007 से अब तक वेनेजुएला को 60 अरब डॉलर से ज्यादा के कर्ज दिए, रूस ने सैन्य सहयोग किया और ईरान से भी रिश्ते मजबूत हुए.
ट्रंप कोरोलरी ऐसे प्रतिस्पर्धियों को रणनीतिक संपत्तियों से दूर रखने की बात करती है. मादुरो की गिरफ्तारी के जरिए अमेरिका इन गठबंधनों को तोड़ना और वेनेजुएला को अपने हितों के हिसाब से चलाना चाहता है.
वेनेजुएला के तेल पर कब्जा अमेरिका को तेल के मामले में आजाद बनाएगा और इससे सप्लाई चेन भी मजबूत होगी. अमेरिकी कंपनियों के जरिए तेल उत्पादन की बात कहकर चीन को भी संकेत दे दिया गया है कि वेनेजुएला के तेल भंडारों पर अमेरिकी निगरानी रहेगी.
2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर कार्रवाई और अब वेनेजुएला में अपने ऑपरेशन की सफलता से ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि वो निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे. पनामा नहर या ग्रीनलैंड जैसे मुद्दे भी उनकी इसी सोच का हिस्सा हो सकते हैं.
गार्जियन के एक संपादकीय के मुताबिक, ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर सैन्य बल के इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है और कनाडा को 51वां राज्य बनाने की बात भी दोहराई है. पनामा नहर पर कब्जे की धमकी दी गई है और ट्रेड पार्टनर्स पर भारी टैरिफ लगाए गए हैं.
गार्जियन का कहना है कि ट्रंप की हर बात को शब्दशः नहीं लेना चाहिए, लेकिन उन्हें गंभीरता से जरूर लिया जाना चाहिए.
वेनेजुएला के साथ भारत के संबंध मुख्य रूप से तेल आयात तक सीमित रहे हैं. मादुरो की गिरफ्तारी पर भारत ने लगभग तटस्थता बनाए रखी है और कहा है कि दोनों पक्षों को शांति स्थापना के लिए बातचीत का जरिया अपनाना चाहिए.
ट्रंप की नीति भारत की गुटनिरपेक्षता को चुनौती देती है. अमेरिका के करीब जाने से रूस और चीन के साथ रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं, जबकि दूरी बनाने से अमेरिका से तनाव बढ़ सकता है.
ट्रंप ने भारत को लेकर तीखी बयानबाजी कम नहीं की है. वेनेजुएला पर हमले के अगले ही दिन उन्होंने रूस से तेल आयात को लेकर भारत पर नए टैरिफ लगाने के संकेत दिए हैं.
चीन के लिए वेनेजुएला में दांव कहीं बड़े हैं. वो वेनेजुएला का सबसे बड़ा कर्जदाता और प्रमुख तेल खरीदार रहा है. अमेरिकी कार्रवाई से चीन का यह समीकरण बिगड़ सकता है.
तेल पर अमेरिकी नियंत्रण से निर्यात की दिशा बदल सकती है, जिससे चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ेगा. ट्रंप कोरोलरी का मकसद चीनी स्वामित्व को सीमित करना है.
भू-राजनीतिक रूप से यह लैटिन अमेरिका में चीन की रणनीति को कमजोर करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई चीन को ताइवान या दक्षिण चीन सागर पर अपने कदमों के लिए एक खाका भी दे सकती है.
रूसी विश्लेषकों ने इसे अमेरिकी विदेश नीति का 'पुतिनीकरण' बताया है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मौजूदा राष्ट्रपति को सैन्य बल के जरिए हटाकर अमेरिका ने यह संकेत दिया है कि दुनिया में एक बार फिर बड़ी ताकतों का अपना-अपना प्रभाव क्षेत्र ही सबसे अहम नियम बन गया है.
रूस इस कार्रवाई का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध पर अमेरिकी आलोचना को कमजोर करने के लिए कर रहा है. हालांकि, वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला रूस की सीमित शक्ति क्षमता को भी दिखाता है. रूस और वेनेजुएला में 2025 में एक रणनीतिक समझौता हुआ था जिसमें रूस ने कहा था कि वो संकट में वेनेजुएला के नेतृत्व की मदद करेगा.
युद्धजीत शंकर दास