ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी अगले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित निजी आवास मार-ए-लागो का दौरा करने वाले हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो पहलवी वहां 'जेरूसलम प्रेयर ब्रेकफास्ट' में भी शामिल होंगे. हालांकि, अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि इस दौरान उनकी ट्रंप से मुलाकात होगी या नहीं. यह संभावित दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं और व्हाइट हाउस से प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयानबाजी बढ़ी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को फिर से प्रदर्शनकारियों का समर्थन जताते हुए अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामिक ईरानी शासन को कड़ी चेतावनी दी. एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, 'मैंने उन्हें बता दिया है कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा कि वे अपने दंगों में करते हैं... तो हम उन्हें बहुत जोरदार जवाब देंगे.' ट्रंप ने पिछले महीने भी चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाएंगे तो परिणाम भुगतने होंगे. जब ट्रंप से प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सभी मौतें सीधे सुरक्षा बलों की कार्रवाई का नतीजा नहीं थीं.
ट्रंप के मुताबिक, कुछ लोगों की मौत भगदड़ जैसी घटनाओं में भी हुई है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरानी नेतृत्व को बहुत सख्त शब्दों में चेतावनी दी जा चुकी है और अगर हिंसा जारी रही तो उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. इस बीच, ईरान की राजधानी तेहरान से लेकर प्रांतीय शहरों तक सड़कों पर भारी संख्या में लोग उतर आए हैं. प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक सुधारों और दशकों से चली आ रही सख्त इस्लामिक शासन व्यवस्था के अंत की मांग कर रहे हैं, जिसे वे 'मुल्ला शासन' कह रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की उमड़ती भीड़ दिखाई दे रही है और शासन-विरोधी नारे साफ सुने जा सकते हैं.
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इस्लामी शासन के खिलाफ आक्रोश
ईरान में प्रदर्शनकारी खामेनेई के खिलाफ 'तानाशाह मुर्दाबाद', 'मुल्लाओं को छोड़ना होगा देश' जैसे नारे लगा रहे हैं. वहीं रजा पहलवी के समर्थन में 'शाह जिंदाबाज' के नारे लग रहे हैं. ईरान से गुरुवार को सामने आए एक वीडियो में आग की लपटों के बीच नारेबाजी करते लोग दिखाई दिए, जो हालात की गंभीरता को दर्शाता है. ये प्रदर्शन हाल के वर्षों में ईरान के सबसे बड़े सरकार-विरोधी आंदोलनों में से एक माने जा रहे हैं, जिनमें छात्र, मजदूर और महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं. दूसरी ओर, ईरानी सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है, इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई है और प्रदर्शनकारियों को 'कड़े अंजाम भुगतने' की चेतावनी दी है.
बावजूद इसके, आर्थिक बदहाली, भ्रष्टाचार, राजनीतिक दमन और इस्लामिक शासन के अंतर्गत बुनियादी आजादी पर सख्त प्रतिबंधों से उपजा जनाक्रोश थमता नजर नहीं आ रहा है. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, लगातार 12 दिनों से देश में प्रदर्शनों का दौर चल रहा है. यह विरोध डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरने से पैदा हुए गुस्से के बाद शुरू हुआ और ईरान के सभी 31 प्रांतों के 100 से ज्यादा शहरों और कस्बों तक फैल गया. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी (ARANA) ने कहा है कि अब तक कम से कम 39 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें पांच बच्चे शामिल हैं. इसके अलावा आठ सुरक्षाकर्मियों की भी मौत हुई है और 2270 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है.
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क्राउन प्रिंस रजा पहलवी कौन हैं?
रजा पहलवी ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं. वह 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले ईरान के क्राउन प्रिंस थे. ईरान में इस्लामी क्रांति के दौरान शाह को देश छोड़ना पड़ा और तभी से रजा पहलवी निर्वासन में रह रहे हैं. वर्तमान में वह अमेरिका में रहते हैं और खुद को एक लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और स्वतंत्र ईरान के समर्थक के रूप में प्रस्तुत करते हैं. रजा पहलवी किसी राजनीतिक पद पर नहीं हैं, लेकिन वह ईरान की मौजूदा इस्लामिक शासन व्यवस्था के मुखर आलोचक हैं. उनका कहना है कि ईरान को तानाशाही और धार्मिक नियंत्रण से मुक्त होकर जनता की इच्छा पर आधारित व्यवस्था अपनानी चाहिए. वह अक्सर मानवाधिकार, महिला स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक सुधारों की बात करते हैं.
ईरान में प्रदर्शनों से उनका संबंध
हालिया सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान रजा पहलवी ने खुले तौर पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है. उन्होंने ईरानियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट होने और शासन परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है. कई प्रदर्शनों में शाह के समर्थन में नारे और रजा पहलवी के नाम के पोस्टर देखे गए, जो यह दर्शाते हैं कि कुछ प्रदर्शनकारी उन्हें इस्लामिक शासन के विकल्प के रूप में देख रहे हैं. ईरान में दशकों तक शाह के समर्थन को अपराध माना जाता था, लेकिन मौजूदा प्रदर्शनों में ऐसे नारे सुनाई देना यह दिखाता है कि जनता का गुस्सा कितना गहरा है. हालांकि, सभी प्रदर्शनकारी राजशाही की वापसी नहीं चाहते. वे रजा पहलवी को ईरानी जनता को एकजुट करने वाले प्रतीक और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी आवाज के रूप में देखते हैं.
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