भारत और मालदीव के बीच चल रहे तनाव के बीच ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसमें कहा जा रहा है कि मालदीव ने इसी महीने के अंत में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा का प्रस्ताव रखा था. पिछले साल नवंबर में मालदीव की सत्ता संभालने के बाद मुइज्जू मालदीव में दशकों से चली आ रही परंपरा के उलट, भारत आने के बजाए तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा पर गए और अब वो चीन दौरे पर हैं.
WION की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी से पहले मालदीव ने मुइज्जू के भारत दौरे का प्रस्ताव दिया था. मालदीव ने जनवरी के अंत तक राष्ट्रपति मुइज्जू के भारत दौरे का प्रस्ताव रखा था.
राष्ट्रपति मुइज्जू इस समय चीन के एक हफ्ते के दौरे पर हैं. चीन दौरे में मुइज्जू ने फुजियान प्रांत में जियामेन फ्री ट्रेड जोन का दौरा किया और चीन की सरकारी हिस्सेदारी वाली बड़ी कंपनी, चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (सीसीसीसी) के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. अपनी इस यात्रा में मुइज्जू चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात भी करेंगे.
भारत के साथ विवाद के बीच चीन दौरे पर निकले थे राष्ट्रपति मुइज्जू
भारत से जारी तनाव के बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 8 जनवरी को चीन के राजकीय दौरे पर निकले. 12 जनवरी को समाप्त होने वाले मुइज्जू के दौरे को लेकर चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पद ग्रहण करने के बाद मुइज्जू का यह पहला आधिकारिक विदेश दौरा है.
भारत और मालदीव के बीच तनाव की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करने से हुई. तस्वीरें ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने भारतीयों से एक बार लक्षद्वीप जाने की अपील की थी.
मुइज्जू के भारत विरोधी रुख को देखते हुए सोशल मीडिया पर लोगों ने कहना शुरू किया कि भारतीयों को मालदीव नहीं बल्कि लक्षद्वीप जाना चाहिए.
इसके बाद पीएम मोदी की लक्षद्वीप की तस्वीरों पर मुइज्जू सरकार में मंत्री मरियम शिउना ने आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी जिसकी खूब आलोचना हुई और शिउना को अपना ट्वीट हटाना पड़ा.
मालदीव के नेता मालशा शरीफ और महजूम माजिद ने भी लक्षद्वीप की पीएम मोदी की तस्वीरों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की.
वहीं, सीनेट के मेंबर जाहिर रमीज ने ट्विटर पर लिखा, 'अच्छा कदम है लेकिन हमसे मुकाबला करने वाली बात भ्रम पैदा करती है. भारत के लोग इतने साफ कैसे हो सकते हैं. उनके कमरों से बराबर बदबू आती है जो इस राह में बड़ी रुकावट है.'
मालदीव नेताओं की इन टिप्पणियों पर भारी विवाद खड़ा हो गया. राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ चीन दौरे पर गए मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने इस पूरे विवाद पर सरकार का पक्ष रखते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, 'विदेशी नेताओं और पड़ोसी देश पर जो टिप्पणियां की गई हैं, उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता है. ऐसी टिप्पणियां मालदीव सरकार का रुख नहीं हैं. हम अपने सभी सहयोगियों, खासकर पड़ोसियों के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं.'
इसके बाद ऐसी खबरें आईं कि मालदीव की मुइज्जू सरकार ने मरियम समेत तीन मंत्रियों को निलंबित कर दिया है.
मुइज्जू ने शुरू से ही अपना रखा है भारत विरोधी रुख
राष्ट्रपति मुइज्जू 'इंडिया आउट' के नारे के साथ सत्ता में आए थे. चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कसम खाई थी कि जीत के बाद वो मालदीव से भारतीय सैनिकों को वापस भेज देंगे.
सत्ता में आने के तुरंत बाद उन्होंने भारत से कहा कि वो अपने सैनिकों को वापस बुला ले. मुइज्जू कई बार भारत सरकार से यह आह्वान कर चुके हैं. मुइज्जू ने हाल ही में भारत के साथ हाइड्रोग्राफिक समझौता रद्द कर दिया था जिसके तहत भारत वहां के समुद्री क्षेत्र का हाइड्रोग्राफिक सर्वे करता था.
मुइज्जू से पहले काफी अच्छे थे भारत-मालदीव के रिश्ते
भारत और मालदीव का रिश्ता ऐतिहासिक रहा है. दोनों देशों के बीच का संबंध इतना गहरा रहा है कि मालदीव में नया राष्ट्रपति अपनी पहली पहली विदेश यात्रा में भारत आता था. भारत ने मालदीव की कई तरह से मदद की है. खासकर 1988 के तख्तापलट के प्रयास और 2004 के सुनामी के दौरान.
दिसंबर 2014 में माले में जलसंकट गहरा गया था जिसे लेकर भारत ने काफी मदद की थी. इससे दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए थे. कोविड महामारी के दौरान भारत ने मालदीव को कोविड वैक्सीन भेजा था. मालदीव की Maldivian National Defence Force की ट्रेनिंग में भारत एक अहम भूमिका निभाता रहा है.
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