मुस्लिम देश मलेशिया ने अमेरिका को सुनाई दो टूक, फिलिस्तीन को लेकर इस प्रतिबंध को मानने से किया इनकार

मुस्लिम बहुल देश मलेशिया लंबे समय से फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर मुखर समर्थक रहा है. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने मंगलवार को कहा है कि अमेरिका द्वारा फिलिस्तीनी संगठन हमास पर लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों को मलेशिया मान्यता नहीं देगा.

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मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (फाइल फोटो-रॉयटर्स) मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (फाइल फोटो-रॉयटर्स)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:38 PM IST

इजरायल और हमास में जारी खूनी जंग के बीच इस्लामिक देश मलेशिया ने एक बार फिर खुलकर हमास का समर्थन किया है. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने मंगलवार को कहा है कि मलेशिया अमेरिका द्वारा फिलिस्तीनी संगठन पर लगाए गए एकतरफा प्रतबंधों को मान्यता नहीं देगा. दरअसल, फिलिस्तीनी संगठनों को मिलने वाली वित्तीय मदद में कटौती करने के उद्देश्य से अमेरिकी सीनेट में 'हमास अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण रोकथाम' अधिनियम पर वोटिंग होनी है. 

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हमास अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण रोकथाम अधिनियम पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पारित किया गया था. वहीं, अमेरिकी सीनेट में इसकी वोटिंग होनी है. इस अधिनियम का मकसद फिलिस्तीनी संगठनों के वित्तपोषण में कटौती करना है. 

एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों को मान्यता नहींः मलेशिया

मलेशिया ने मंगलवार को कहा, " हमास और अन्य फिलिस्तीनी समूहों के विदेशी मदद के खिलाफ प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावित अमेरिकी कानून के जवाब में मलेशिया अमेरिका के एकतरफा प्रतिबंधों को मान्यता नहीं देगा.'' 

मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा कि उनकी सरकार इस विधेयक के पारित होने के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है. उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह विधेयक मलेशिया को तभी प्रभावित करेगा, जब यह फिलिस्तीनी संगठन को मैटेरियल सपोर्ट प्रदान करने वाला हो.

मलेशियाई प्रधानमंत्री ने मंगलवार को यह टिप्पणी एक विपक्षी सांसद की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब का देते हुए की. विपक्षी सासंद ने उस अमेरिकी विधेयक पर सरकार का रुख पूछा था. जिस विधेयक में फिलिस्तीनी संगठन हमास को अमेरिका और यूरोपीय संघ ने आतंकवादी समूह करार दिया है. 

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मंगलवार को मलेशिया की संसद में प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने एक प्रश्न के जवाब में फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकार और जारी संघर्ष पर जोर देते हुए कहा, "मलेशिया के खिलाफ कोई भी प्रतिबंध अमेरिकी सरकार और मलेशिया में कारोबार कर रहे अमेरिकी कंपनियों को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा मलेशिया में अमेरिकी कंपनियों के निवेश के अवसरों को प्रभावित कर सकता है."

कोई धमकी स्वीकार नहींः मलेशिया

मलेशियाई प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "अमेरिका की यह कार्रवाई एकतरफा और अवैध है. इस विधेयक समेत किसी भी धमकी को मैं स्वीकार नहीं करूंगा. क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य के रूप में हम केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को मान्यता देते हैं."

उन्होंने आगे कहा कि इजरायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में मामला लाने के लिए फिलिस्तीन सहित किसी भी देश के प्रयासों को मलेशिया समर्थन करेगा. 

लंबे समय से फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर मुखर रहा है मलेशिया

मुस्लिम बहुल देश मलेशिया लंबे समय से फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर मुखर समर्थक रहा है. इजरायल और फिलिस्तीन के बीच जारी संघर्ष के समाधान के रूप में मलेशिया ने दो देश की वकालत की है. इजरायल के साथ मलेशिया का कोई राजनयिक संबंध नहीं है. अतीत में हमास के टॉप लीडर अक्सर मलेशिया का दौरा करते रहे हैं और वहां के प्रधानमंत्रियों से मुलाकात की है.

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मलेशिया के वर्तमान प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी हमास की निंदा करने के पश्चिमी देशों के दबाव को खारिज कर दिया था. 

अमेरिका, मलेशिया का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल दोनों देशों के बीच लगभग 77 अरब अमेरिकी डॉलर का लेनदेन हुआ. जिसमें सबसे ज्यादा मलेशिया ने अमेरिका को प्रोडक्ट निर्यात किया. पिछले वित्तीय वर्ष में मलेशिया का लगभग 31.3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस रहा. ऐसे में दोनों के बीच कोई भी तनाव व्यापारिक रिश्ते को खराब कर सकता है.
 

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