बीते दिनों इजरायल ने जब लेबनान पर हमला किया तो इससे लेबनान में भारी तबाही मची है. लेबनान एक तरह से खंडहर के शहर में तब्दील हो चुका है और वहां लोगों के लिए अपनी आजीविका के लिए संघर्ष उनका नया सच बन चुका है. सबसे अधिक समस्या छोटी और रोज कमाई करने वाले लोगों को हो रही है, जिनमें मछुआरे भी शामिल है. आजतक की टीम ने लेबनान के मछुआरों से बात की और उनका हाल जाना.
मछुआरों को भूमध्य सागर में मछली पकड़ने से रोका गया
सामने आया है कि साइदा के करीब 3000 लेबनानी मछुआरों को इज़राइली रक्षा बलों (IDF) द्वारा भूमध्य सागर में मछली पकड़ने से रोका गया. इस इलाके के मछुआरे कई वर्षों से अपने पारंपरिक पेशे के जरिए आजीविका कमा रहे हैं, लेकिन हाल ही की घटनाओं ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. जब मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निकले, तो उन्हें इज़राइली नौसेना की नौकाओं द्वारा वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया. मछुआरों के अनुसार, इज़राइली सैनिकों ने उन्हें चेतावनी दी कि अगर वे फिर से समुद्र में देखे गए, तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह घटनाक्रम तब हुआ जब लेबनानी सेना ने पहले से ही मछुआरों को चेतावनी दी थी कि वे समुद्र में न जाएं.
गोली मारने की दी है धमकी
साइदा के एक प्रमुख मछुआरे अब्दुल्ला ने आजतक से बात करते हुए अपनी मजबूरी बयां की. उन्होंने कहा कि, उन्हें बताया गया था कि समुद्र में मछली पकड़ने न जाएं, लेकिन हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है. मछली पकड़ना ही हमारा एकमात्र काम है. जब हम गए, तो इज़राइली नौकाओं ने हमें धमकी दी कि अगर दोबारा देखा गया, तो गोली मार दी जाएगी. अब हम क्या करेंगे? हमारे पास कोई और काम नहीं है."
दूसरे मछुआरे बिलाल बाईकी ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि, "पहले हमारे घरों और कस्बों पर बमबारी की गई, अब हमारी नावें और समुद्र भी हमारे लिए बंद कर दिया गया है. हमारी रोज़ी-रोटी छीन ली गई है. कई अरब देश मदद भेज रहे हैं, लेकिन हमें नहीं पता कि वह सहायता कहां जा रही है." साइदा के मछुआरा समुदाय के लिए समुद्र ही जीवन का आधार है. यहां के अधिकतर लोग पीढ़ियों से मछली पकड़कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते आए हैं. मछली पकड़ने पर इस रोक से उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ा है. इज़राइली नौसेना द्वारा उनकी गतिविधियों पर इस तरह का प्रतिबंध उनके लिए गंभीर संकट का कारण बन गया है.
रोक के कारण जीवन हुआ कठिन
मछुआरे यह भी कह रहे हैं कि हाल के संघर्षों के चलते उन्हें मदद तो मिल रही है, लेकिन उस सहायता का उनके जीवन पर क्या असर पड़ रहा है, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है. अरब देशों से आ रही मदद उनके जीवन तक नहीं पहुँच पा रही है, जिससे उनके जीवनयापन की समस्याएं और भी बढ़ गई हैं. साइदा के मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति पहले से ही गंभीर थी, और अब इज़राइली नौसेना द्वारा उनकी समुद्री गतिविधियों पर प्रतिबंध और बढ़ते तनाव ने उनके जीवन को और कठिन बना दिया है. इस समुदाय के लोग अब अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें जल्द ही किसी प्रकार की सहायता मिलेगी.
अशरफ वानी