'ये मेरी जिंदगी के सबसे डरावने पल हैं. वो लोगों को जान से मारने के इरादे से गोलियां चला रहे हैं. लोगों के घर लाशों से पटे पड़े हैं...', ईरान की जानी-मानी पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता नेगीन शीरागाई अपने देश के हालत कुछ इस तरह से बयान कर रही हैं. ईरान में 28 दिसंबर से जारी प्रदर्शनों के बीच इंटरनेट और इंटरनेशनल फोन कॉल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है जिससे वहां की खबर बाहर निकलकर नहीं आ पा रही है. ईरान के प्रदर्शनों में कितने लोग मारे गए हैं, इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं.
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA के मुताबिक, ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई में 2,400 प्रदर्शनकारियों की जान गई है. हालांकि, लंदन से ऑपरेट वाली डिजीटल न्यूज वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के प्रदर्शनों में अब तक 12,000 से ज्यादा लोगों की जान गई है.
ईरान इंटरनेशनल ने वरिष्ठ सरकारी और सुरक्षा सूत्रों के हवाले से लिखा कि ईरान में समकालीन इतिहास की सबसे बड़ी हत्याएं हो रही हैं जिनमें कम से कम 12,000 लोगों की मौत हुई है. इनमें से बड़ी संख्या में हत्याएं 8 और 9 जनवरी को देशभर में इंटरनेट बंदी के दौरान की गईं.
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल और राष्ट्रपति कार्यालय सहित विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी का मिलान करने के बाद इस्लामिक रिपब्लिक की सुरक्षा संस्थाओं का शुरुआती आकलन है कि देश भर में हुई कार्रवाई में कम से कम 12,000 लोग मारे गए.
ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान में इतने बड़े पैमाने पर हत्याकांड सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के सीधे आदेश पर किया गया. सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने सुरक्षाबलों को आदेश जारी किया था कि लोगों को सड़क पर देखते ही गोली चला दी जाए.
इंटरनेट बैन की वजह से ईरान के अंदर की खबरें बाहर नहीं आ पा रही हैं. इस बीच एक्टिविस्ट नेगीन शीरागाई ने अपने देश के हालातों पर ब्रिटेन स्थित स्काई न्यूज की वरिष्ठ पत्रकार याल्दा हकीम के साथ बात की है. उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों को आदेश है कि वो लोगों को सड़क पर देखते ही गोली चला दें. शीरागाई ने बताया कि लोगों के घरों में शव रखे गए हैं.
उन्होंने बताया, 'ईरान की स्थिति बेहद भयानक है. मैंने 20 सालों तक पत्रकारिता की और अब कई सालों से एक्टिविस्ट हूं लेकिन मैंने अब तक अपने जीवन में ऐसा डरावना मंजर नहीं देखा था. कुछ सुरक्षा सूत्रों ने मुझे बताया कि उन्हें लोगों को देखते ही गोली मारने के आदेश हैं. आंदोलन जब शुरू हुआ तब पुलिसवाले एक जिंदा कारतूस के मुकाबले चार रबर बुलेट्स दाग रहे थे लेकिन अब तो बस गोलियां ही चलाई जा रही हैं...लोगों को मारने के इरादे से गोलियां चल रही है.'
शीरागाई ने आगे कहा, 'गोली या रबर बुलेट लगने के बाद जो लोग इलाज के लिए अस्पताल जा रहे हैं, उन्हें वहीं से गिरफ्तार कर लिया जा रहा है. लोगों को इलाज के लिए डॉक्टर, सर्जन नहीं मिल पा रहे हैं. सर्जरी रूम के बाहर सुरक्षाबल खड़े हैं और वहां से लोगों को गिरफ्तार कर रहे हैं. हम सुन रहे हैं कि लोग अस्पताल जाने से डर रहे हैं... जैसे ही आप अस्पताल जा रहे हैं, आपको गिरफ्तार किया जा रहा है और उसके बाद किसी को नहीं पता कि आप कहां है.'
ईरानी कार्यकर्ता ने कहा कि उनके देश की स्थिति वीभत्स रूप ले चुकी है जहां लोग मरने के बाद भी सुरक्षित नहीं है. उन्होंने कहा, 'लोगों के घरों में शव रखे गए हैं. हमने देखा है... जितना बताया जा रहा है, मरने वालों की संख्या उससे कहीं अधिक है. वो लोग मरने वालों के शव ले जा रहे हैं और परिवारवालों को एक पेपर साइन करने के लिए मजबूर कर रहे हैं जिस पर लिखा है कि व्यक्ति की मौत विपक्ष ने की है. लेकिन लोग इसका विरोध कर रहे हैं और इसलिए उन्होंने अपने लोगों के शव अपने ही घरों में छिपाकर रखे हैं.'
उन्होंने बताया कि ईरान में हर गुजरते दिन के साथ शासन की सख्ती बढ़ती जा रही है. सुरक्षाबलों ने अब लोगों के घरों में जाकर रेड करना शुरू कर दिया है. अस्पतालों पर छापे मारे जा रहे हैं, डॉक्टरों, सर्जनों को गिरफ्तार किया जा रहा है क्योंकि वो लोगों की मदद को सामने आए.
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