ईरानी मूल की जर्मन-अमेरिकी स्वतंत्रता कार्यकर्ता गजेल शर्माहद का कहना है कि ईरान में जारी अशांति को अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा व्यापक रूप से गलत समझा जा रहा है और खतरनाक रूप से कम करके आंका जा रहा है. आजतक से बात करते हुए, शर्माहद ने इस बात पर जोर दिया कि जो कुछ घट रहा है वह 'सत्ता परिवर्तन' के बारे में नहीं है, बल्कि 'एक राष्ट्र की आजादी' के बारे में है.
शर्माहद, जमशेद शर्माहद की बेटी हैं, जो एक जर्मन-अमेरिकी पत्रकार और तेहरान के मुखर आलोचक थे, जिन्हें 2020 में ईरानी एजेंटों द्वारा अगवा कर लिया गया था और अक्टूबर 2024 में एक ऐसे मुकदमे के बाद फांसी दे दी गई थी.
शर्माहद के लिए शब्दावली में अंतर बेहद जरूरी है. उनका तर्क है कि 1979 की घटनाएं क्रांति नहीं, बल्कि एक 'इस्लामो-मार्क्सवादी तख्तापलट' थीं, जिसने 'ईरान विरोधी' शक्ति को स्थापित किया.
फ्रांस से की ईरान प्रोटेस्ट की तुलना
बातचीत में शर्माहद ने कहा, 'हम सत्ता परिवर्तन की बात नहीं कर रहे हैं. यह एक राष्ट्र को विदेशी कब्जे और हत्यारी शासन से मुक्ति दिलाने की बात है. आप इसकी तुलना ऐतिहासिक रूप से फ्रांस से कर सकते हैं, जो नाजी कब्जे में था.'
अंतर्राष्ट्रीय दबाव को कम करने के लिए ईरानी अधिकारियों द्वारा फांसी की सजा पर रोक लगाने के दावों को खारिज करते हुए, शर्माहद ने कहा, 'शासन ने पिछले 47 वर्षों से लोगों को फांसी देना, पीट-पीटकर मारना और उनकी हत्या करना बंद नहीं किया है. बिलकुल नहीं.'
शर्माहद ने आईआरजीसी और अर्धसैनिक इकाइयों सहित ईरानी सुरक्षा बलों पर 'हजारों निहत्थे प्रदर्शनकारियों' को गोली मारने का आरोप लगाया और इसे एक नरसंहार करार दिया. उन्होंने इसपर इंटरनेशनल लेवल पर केस चलाने की मांग की.
'यह अंतिम चरण है,' शर्माहद ने कहा. 'शासन का पतन होगा. सवाल सिर्फ इतना है कि उनके सत्ता से हटने के दौरान हम कितना रक्तपात होने देंगे.'
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