भारत का भी अरबों रुपया रूस में फंसा, जानें क्या है मामला?

यूक्रेन में जारी युद्ध के कारण रूस पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध को झेल रहा है. इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी काफी प्रभावित किया है. इसी बीच भारत की प्रमुख तेल कंपनी ONGC ने कहा है कि कंपनी का एक अरब डॉलर से कम का लाभांश रूस में फंसा हुआ है. इससे पहले रूस ने कहा था कि उसके अरबों रुपये भारतीय बैंकों में जमा हैं.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो- रॉयटर्स) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो- रॉयटर्स)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 मई 2023,
  • अपडेटेड 1:02 PM IST

भारत में रूस के अरबों रुपये जमा होने की खबरों के बीच भारत की प्रमुख तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) ने कहा है कि कंपनी का एक अरब डॉलर से कम का लाभांश रूस में फंसा हुआ है. रूस में अरबों भारतीय रुपये जमा होने की खबर इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि हाल ही में रूस के विदेश मंत्री ने कहा था कि भारतीय बैंकों में रूस के अरबों रुपये जमा हैं. जिसे वह इस्तेमाल नहीं कर सकता है. जिसके बाद भारत सरकार को सफाई देनी पड़ी थी. 

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अंग्रेजी अखबार द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण भारत की प्रमुख तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) का एक अरब डॉलर से कम का लाभांश रूसी बैंक में जमा है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि उसे इस राशि को भारतीय बैंकों में ट्रांसफर करने की कोई जल्दबाजी नहीं है.

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों का रूस के चार अलग-अलग एसेट में लगभग 5.46 अरब डॉलर का निवेश है. यह राशि इसी निवेश का लाभांश (डिविडेंड) है. 

चार अलग-अलग रूसी संपत्तियों में भारतीय ऑयल कंपनियों का निवेश 

ONGC के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, रूस में चार अलग-अलग संपत्तियों में भारतीय ऑयल कंपनियों के लगभग 5.46 अरब डॉलर का निवेश है. इनमें वेंकोरनेफ्ट तेल और गैस फील्ड में 49.9% और TAAS-Yuryakh Neftegazodobycha फील्ड में 29.9% हिस्सेदारी है. इससे तेल और गैस की उत्पादन और बिक्री होती है. इस मुनाफे पर भारत को लाभांश मिलता है.

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TAAS से होने वाले लाभांश का भुगतान तिमाही आधार पर किया जाता है, जबकि वेंकोरनेफ्ट से होने वाले लाभांश का भुगतान छमाही के आधार पर किया जाता है. तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) की विदेशी फर्म OVL के पास  Suzunskoye, Tagulskoye और Lodochnoye में 26% हिस्सेदारी है. यह पश्चिमी साइबेरिया के उत्तर-पूर्वी भाग में वैंकोर क्लस्टर के रूप में जाता है. 

लेकिन फरवरी 2022 में यूक्रेन में युद्ध के कारण रूस ने विदेशी मुद्रा दरों में अस्थिरता को देखते हुए डॉलर के एक्सचेंज पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके बाद से भारत को लाभांश नहीं मिला है. ओवीएल को अंतिम बार रूसी फर्म से जुलाई 2022 में लाभांश मिला था. उसके बाद के सभी लाभांश रूस में स्थित कंपनी के बैंक खाते में जमा है.

ओएनजीसी के प्रबंध निदेशक राजर्षि गुप्ता का कहना है, "रूस में कंपनी का लाभांश आय एक अरब डॉलर से कम है. इसे भारतीय बैंकों में लाने की हमें कोई जल्दबाजी नहीं है क्योंकि कंपनी के पास रूस में तीन परियोजनाओं को चलाने के लिए पर्याप्त पूंजी है. जहां तक लाभांश का सवाल है, कारोबार में ये सब चलता रहता है. 

भारतीय कंपनियां ढूंढ रही है उपाय

ओएनजीसी की विदेशी फर्म OVL सिंगापुर की सहायक कंपनी के माध्यम से रूसी बाजार में कारोबार करती थी. लेकिन रूस ने पिछले साल सिंगापुर को अनफ्रेंडली कंट्री घोषित कर दिया. इस वजह से रूसी पैसा सिंगापुर के किसी भी बैंक या कंपनी को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है. ओएनजीसी के प्रबंध निदेशक राजर्षि गुप्ता ने कहा है कि कंपनी इस बात पर विचार कर रही है कि रूस से पैसा कैसे वापस लाया जाए. इसके लिए सही बैंकिंग चैनलों की तलाश जारी है. 

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पिछले सप्ताह ऑयल इंडिया के अधिकारियों ने भी कहा था कि कंपनी की लगभग 3 अरब डॉलर का लाभांश आय रूस में फंसा हुआ है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड की रूस की दो परियोजनाओं में हिस्सेदारी है. ऑयल इंडिया का यह लाभांश कॉमर्शियल इंडो बैंक एलएलसी (CIBIL) में जमा है. CIBIL भारतीय स्टेट बैंक और केनरा बैंक का एक ज्वाइंट वेंचर था. केनरा बैंक ने मार्च में अपनी 40 फीसदी हिस्सेदारी SBI को बेच दी. 

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, ऑयल इंडिया लिमिटेड और भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड की वेंकोर में 23.9 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. रूस की Rosneft 50.1% ब्याज के साथ ऑपरेट किया जाता है. 

                                                                      फोटो- ONGC

क्या है ONGC विदेश लिमिटेड (OVL)

ONGC कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सबसे बड़ी भारतीय कंपनी है. यह भारत सरकार का एक उपक्रम है. ओएनजीसी विदेश लिमिटेड भी इसी का एक उद्यम है. यह विदेश में तेल और गैस का उत्पादन करने वाली भारत की पहली कंपनी है. इसकी शुरुआत 2003 में वियतनाम से हुई थी. वहीं, ONGC की स्थापना 14 अगस्त 1956 में हुई थी.

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OVL के पास रूस के अलावा वेनेजुएला और वियतनाम समेत कुल 15 देशों के 33 तेल और गैस संपत्तियों में हिस्सेदारी है. पिछले साल की तुलना में वित्तीय वर्ष 2022-23 में OVL की तेल और गैस उत्पादन में कमी देखी गई है. पिछले वित्तीय वर्ष में OVL का कुल तेल उत्पादन 8.099 मिलियन टन था, जो इस साल घटकर 6.349 मिलियन टन रह गया है. लेकिन सस्ते आयात और ज्यादा कीमतों पर निर्यात की वजह से OVL को साल 2022-23 में कुल नेट प्रॉफिट 1,700 करोड़ रुपये का हुआ है. पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुल लाभ 1589 करोड़ था. इससे पहले 2020-21 में OVL को कुल 1890 करोड़ का लाभ हुआ था.

                                   OVL का टर्नओवर और कुल लाभ (स्रोतः ONGC Videsh)

रूस ने क्या कहा था?

गोवा में संपन्न हुए एससीओ समिट के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा था कि भारतीय बैंकों में हमारे अरबों रुपये जमा हैं लेकिन हम उसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. रूसी मंत्री का यह बयान इस ओर इशारा कर रहा था कि भारतीय रूपये में व्यापार से रूस को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. रूस भारत से बहुत कम चीजें आयात करता है, ऐसे में भारत के बैंकों में जमा रुपयों का रूस इस्तेमाल नहीं कर पाता है.

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रूसी विदेश मंत्री के इस बयान के बाद भारत सरकार ने कहा था कि आपसी करेंसी में व्यापार के लिए बनाए गए विशेष वोस्ट्रो बैंक अकाउंट्स में रूस का कोई रुपया जमा नहीं है. भारतीय विदेश व्यापार के महानिदेशक संतोष कुमार सारंगी ने कहा था कि रूस के पास रुपये का थोड़ा बहुत रिजर्व केवल रक्षा खरीद और बिक्री के कारण है. 

 

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