भारत द्वारा 41 कनाडाई राजनयिकों को वापस भेजने के कदम पर अमेरिका और ब्रिटेन के बाद न्यूजीलैंड ने भी कनाडा का साथ दिया है. न्यूजीलैंड ने कहा है कि हम इस बात से चिंतित हैं कि भारत ने कनाडा से नई दिल्ली में अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने के लिए कहा, जिसके बाद बड़ी संख्या में कनाडाई राजनयिक भारत से वापस चले गए हैं.
न्यूजीलैंड भी 'फाइव आइज' का सदस्य है. जिसके इनपुट के आधार पर कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं. हालांकि, आमतौर पर न्यूजीलैंड इस तरह की टिप्पणी करने से बचता रहा है. यहां तक कि जस्टिन ट्रूडो ने जब भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे, उस वक्त भी न्यूजीलैंड ने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से परहेज किया था.
फाइव आइज में शामिल न्यूजीलैंड एक मात्र देश था जिसने भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद में सार्वजनिक रूप से कनाडा का समर्थन नहीं किया था.
भारत के इस कदम से चिंतितः न्यूजीलैंड
न्यूजीलैंड विदेश मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, "हम इस बात से चिंतित हैं कि भारत ने कनाडा से वहां अपनी राजनयिक उपस्थिति कम करने की मांग की. जिसके कारण बड़ी संख्या में कनाडाई राजनयिक भारत से वापस चले गए हैं. यह समय और अधिक राजनयिक बातचीत करने का है ना कि कम.
हम उम्मीद करते हैं कि सभी देश राजनयिक संबंधों के लिए 1961 में बने वियना कन्वेंशन के तहत अपने दायित्वों का पालन करेंगे, जिसमें मान्यता प्राप्त राजनयिकों के विशेषाधिकार और उनकी सुरक्षा भी शामिल है."
न्यूजीलैंड की यह टिप्पणी इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि न्यूजीलैंड ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की थी. लेकिन पिछले सप्ताह अमेरिका में हुई 'फाइव आइज' की बैठक के बाद न्यूजीलैंड ने भी भारत की आलोचना की है.
भारत ने कनाडा को दिया था अल्टीमेटम
देश के आंतरिक मामलों में कनाडाई राजनयिकों के हस्तक्षेप और संख्या की अधिकता का हवाला देते हुए मोदी सरकार ने ट्रूडो सरकार को 41 डिप्लोमैट्स को वापस बुलाने का अल्टीमेटम दिया था. तीन अक्टूबर को भारत सरकार की ओर से कनाडा को चेतावनी दी गई थी कि अगर राजनयिकों की संख्या कम नहीं की जाती है तो उनकी सभी राजनयिक छूट खत्म कर दी जाएगी.
जिसके बाद 19 अक्टूबर को कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा था, "भारत की धमकी के बाद राजनयिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमने भारत से उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है. भारत में रह रहे हमारे 41 राजनयिक और उनका परिवार भारत छोड़ चुके हैं." मेलानी जॉली ने यह भी आरोप लगाया था कि भारत ने वियना कन्वेंशन का उल्लंघन किया है.
ब्रिटेन और अमेरिका के साथ हुआ न्यूजीलैंड
इससे पहले ब्रिटेन ने भी भारत के इस कदम पर नाराजगी जाहिर की थी. ब्रिटेन ने कहा था, "किसी भी प्रकार के मतभेदों को सुलझाने के लिए बातचीत और राजनयिकों की जरूरत होती है. हम भारत सरकार द्वारा लिए गए फैसलों से सहमत नहीं हैं. भारत के इस निर्णय से कई कनाडाई राजनयिकों को भारत छोड़ना पड़ा है."
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी कहा था, "हम कनाडा के राजनयिकों के भारत से चले जाने से चिंतित हैं. मतभेदों को सुलझाने के लिए जमीनी स्तर पर राजनयिकों की जरूरत होती है. हमने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वो कनाडा की राजनयिक उपस्थिति में कमी पर जोर ना दे और कनाडा में चल रही जांच में सहयोग करे."
क्या है फाइव आइज?
'फाइव आइज' कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्टेलिया और न्यूजीलैंड देशों की खुफिया एजेंसियों का एक समूह है. इसे दुनिया का सबसे बड़ा सर्विलांस नेटवर्क ग्रुप कहा जाता है. फाइव आइज के गठन का मकसद ही यही है कि अगर कभी इन पांच देशों के अंदर ऐसा कुछ भी गलत हो, तो ये पांचों देश अपनी-अपनी खुफिया एजेंसियों के जरिए एक दूसरे की मदद करेंगे, उन्हें जरूरी सूचना और सबूत देंगे.
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