ना फिटनेस-ना परमिट, एक आदमी के नाम पर 39 बस... उन्नाव हादसे के बाद जागा प्रशासन, हुआ चौंकाने वाला खुलासा

उन्नाव बस हादसे (Unnao Bus Accident) के बाद जांच के दौरान पाया गया कि दुर्घटनाग्रस्त हुई बस महोबा जिले के एआरटीओ में दर्ज है. और परतें खुली तो एक बड़े नटवरलाल का नाम सामने आया, जिसके नाम पर एक या दो नहीं बल्कि 39 बसें दर्ज हैं.

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उन्नाव बस हादसे की तस्वीर उन्नाव बस हादसे की तस्वीर

नाह‍िद अंसारी

  • उन्नाव ,
  • 11 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 11:55 AM IST

यूपी के उन्नाव में हुए बस हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया है. इस हादसे में 18 यात्रियों की मौत हुई थी. जांच के दौरान पाया गया कि दुर्घटनाग्रस्त बस यूपी 95 टी 4729 महोबा जिले के एआरटीओ में दर्ज है. और परतें खुली तो एक बड़े नटवरलाल का नाम सामने आया, जिसके नाम पर एक या दो नहीं बल्कि 39 बसें दर्ज हैं. जिसमें 35 बसें तो बिना फिटनेस और परमिट के ही सड़को पर दौड़ रही हैं. 

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ये सब देख विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया और दुर्घटना की कड़ी जोड़ते हुए ट्रैवल एजेंसी के मालिक, ठेकेदार और उक्त नटवरलाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज़ करने के लिए पुलिस को तहरीर दी गई. बस हादसे के बाद और तार जुड़े तो पता चला कि बुंदेलखंड के महोबा से लेकर दिल्ली और बिहार तक बस माफियाओं द्वारा एक सिंडीकेट बनाकर बसों का संचालन किया जा रहा है. 

उन्नाव बस हादसे के बाद बस संचालन के बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें विभागीय अधिकारियों की साठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्नाव में जो बस हादसे शिकार हुई है वो बिना फिटनेस, परमिट के सड़क पर दौड़ रही थी. नतीजन 18 लोगों की जिंदगी खत्म हो गई. बस महोबा के व्यक्ति के नाम दर्ज थी. लेकिन हैरत इस बात पर है कि उसी व्यक्ति के नाम पर 38 और बसें रजिस्टर हैं. 

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उन्नाव बस हादसे में गई 18 की जान

जांच में उक्त दुर्घटनाग्रस्त बस महोबा जिले के खन्ना थाना क्षेत्र के मवई खुर्द गांव निवासी पुष्पेंद्र सिंह के नाम अस्थाई पते पर दर्ज पाई गई. शासन से जानकारी मिलने पर मंडल के आरटीओ उदयवीर सिंह अपनी दो सदस्यीय टीम के साथ महोबा आरटीओ विभाग पहुंचे और उन्होंने जब दस्तावेजों को खंगाला तो वह हैरान रह गए कि कैसे एक ही व्यक्ति पुष्पेंद्र के नाम पर 39 बस रजिस्टर्ड हैं, जो दिल्ली, बिहार, जोधपुर, राजस्थान सहित कई इलाकों पर बिना फिटनेस, परमिट के सड़कों पर दौड़ रही हैं. 

वर्ष 2018–19 में दर्ज इन सभी बसों की फिटनेस को लेकर यदि विभाग गंभीर होता तो शायद इतना बड़ा हादसा ना होता. सवाल यह भी है कि इतनी बसें बिना फिटनेस के कैसे दौड़ रही थीं और अब तक इस पर कोई एक्शन क्यों नहीं हुआ. इससे इतना तो साफ होता है कि विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ से बसों का सिंडिकेट चल रहा है. 

मंडल आरटीओ उदयवीर सिंह ने बताया कि ऐसी सभी बसों को चिन्हित किया जा रहा है, जो अस्थाई पते या गलत नाम पर फर्जी तरीके से दर्ज़ हैं. इसकी जांच के लिए एक टीम बनाई गई है, जो ऐसी बसों का डाटा कलेक्ट कर उन पर एक्शन लेने का काम करेगी. 

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फिलहाल, पुष्पेंद्र सिंह के नाम पर दर्ज़ 39 बसों का डाटा एकत्र कर एआरटीओ दयाशंकर जांच करने में जुट गए हैं. जिसमे 35 बसों की फिटनेस और परमिट न पाए जाने पर 3 माह के लिए सभी का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया गया है. यही नहीं ट्रैवल एजेंसी मालिक, बस संचालक ठेकेदार वा पुष्पेंद्र के खिलाफ़ शहर कोतवाली में नामजद तहरीर दी गई है. घटना के बाद से पुष्पेंद्र सिंह फरार बताया जा रहा है. वह घरवालों से अलग आलीशान मकान में रहता है. 

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