बागपत का 'कैंसर विलेज': जहरीले पानी ने ली 70 जानें, कृष्णा नदी के प्रदूषण से सिसक रहा गंगनौली गांव!

बागपत के गंगनौली गांव में दूषित पानी के कारण कैंसर का तांडव जारी है. फैक्ट्रियों और शुगर मिलों के रसायनों ने कृष्णा नदी के जरिए भूजल को जहरीला बना दिया है. एनजीटी के आदेश के बावजूद ग्रामीणों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है, जिससे मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा.

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बागपत के गंगनौली गांव के लोगों की आपबीती (Photo- Screengrab) बागपत के गंगनौली गांव के लोगों की आपबीती (Photo- Screengrab)

अशोक सिंघल

  • बागपत,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:49 AM IST

Uttar Pradesh News: बागपत के गंगनौली गांव में दूषित पेयजल के कारण पिछले कुछ वर्षों में 70 से ज्यादा ग्रामीणों की कैंसर से मौत हो गई है. शुगर मिल और फैक्ट्रियों का रसायन युक्त कचरा पास की कृष्णा नदी में गिरने से भूजल जहरीला हो गया है. एनजीटी के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने यहां हैंडपंप बंद कर पानी की टंकी तो लगवाई, लेकिन पाइपलाइन फटने के कारण 7000 की आबादी वाले इस गांव को स्वच्छ जल नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीण पीलिया, एलर्जी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और दिल्ली के बड़े अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं.

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बेअसर आदेश और बदहाल व्यवस्था

गांव वालों का संघर्ष साल 2010 से जारी है, जब दूषित पानी ने कहर बरपाना शुरू किया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण एनजीटी (NGT) तक गए, जहां से स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया. 

प्रशासन ने 2015 में गांव के हैंडपंपों को पीले और बदबूदार पानी के कारण सील कर दिया था. हालांकि, वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लगाई गई पानी की टंकी सफेद हाथी साबित हो रही है. पाइपलाइन कई जगह से लीक है, जिससे शुद्ध पानी लोगों के घरों तक नहीं पहुंच पा रहा और लोग निजी सबमर्सिबल का जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं.

चेक डैम ने बढ़ाया जहर

प्रदूषण का एक बड़ा कारण कृष्णा नदी के किनारे बने चेक डैम भी हैं. ग्रामीणों के अनुसार, भूजल स्तर बढ़ाने के लिए बनाए गए ये डैम अब मुसीबत बन गए हैं. इन चेक डैम में फैक्ट्रियों का जहरीला और रसायन युक्त पानी एक ही जगह जमा रहता है. लंबे समय तक पानी रुकने के कारण यह रिसकर जमीन के नीचे जा रहा है, जिससे पाताल का पानी और भी जहरीला हो गया है. गांव की प्रधान का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिला है.

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बीमारियों का जाल और प्रशासनिक अनदेखी

गंगनौली गांव में इस वक्त भी कई लोग लीवर और मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं. पिछले एक साल में ही करीब 20 लोगों की जान जा चुकी है. ग्रामीण एम्स और सफदरजंग जैसे अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं.

हैरानी की बात यह है कि जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. टी लाल इन मौतों के पीछे दूषित पानी को वजह मानने से इनकार कर रहे हैं. उनका कहना है कि जांच में पानी का सीधा संबंध कैंसर से नहीं पाया गया है. हालांकि, गांव की हर गली में मौजूद मरीज प्रशासन के इन दावों की पोल खोल रहे हैं.

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