यूपी के सुल्तानपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री विनोद सिंह ने जिला पंचायत कार्यालय के सभागार में अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की. विधायक का आरोप है कि जिले के अधिकारी जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान नहीं देते और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का बहाना बनाकर मिलने का समय भी नहीं देते हैं.
अधिकारियों के इस रवैये से आहत होकर विधायक ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि विधायकों के पास अब सिर्फ सम्मान ही बचा है और अधिकारी उसे भी छीनने की कोशिश कर रहे हैं. बिना किसी एजेंडे के बुलाए जाने पर उन्होंने खुद को हरकारा न समझने की चेतावनी दी है.
अधिकारियों के रवैये से नाराज हैं विधायक
विधायक विनोद सिंह का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों की मनमानी की शिकायत कमिश्नर से भी की है. उनके मुताबिक, अधिकारी न तो कोई एजेंडा जारी करते हैं और न ही बातचीत के लिए उपलब्ध रहते हैं. विधायक ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे कोई ऐसे सेवक नहीं हैं कि अधिकारियों का जब मन किया उन्हें बुला लिया. प्रोटोकॉल के उल्लंघन और अधिकारियों की बेरुखी ने उन्हें मीडिया के सामने अपनी बात रखने को मजबूर कर दिया है.
अपनों पर भी साधा निशाना, जाम की समस्या पर घेरा
विनोद सिंह ने सिर्फ अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल पर भी निशाना साधा. शहर में अतिक्रमण और जाम की समस्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि चेयरमैन में मजबूत इच्छाशक्ति होती, तो इन ठोस समस्याओं का समाधान हो जाता. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो वे अपने निजी विद्यालय के 10 हजार बच्चों को लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे.
विपक्ष को मिला सरकार को घेरने का मौका
विधायक की इस नाराजगी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे भाजपा की किरकिरी हो रही है और विपक्ष को एक नया मुद्दा मिल गया है. यह वही विनोद सिंह हैं जो पहले भी पूर्व विधायक स्वर्गीय इंद्रभद्र सिंह की मूर्ति हटाने को लेकर चर्चा में रहे थे. तब भाजपा के ही एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह उनके विरोध में खड़े हो गए थे. अब अधिकारियों के खिलाफ उनके इस बागी तेवर ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है.
नितिन श्रीवास्तव