'ऐसा धोखा मुझे भी मिला था...' अखिलेश ने बताया क्यों टूट गया था बसपा से गठबंधन

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने हिंदी दिवस की लोगों को बधाई दी. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि 2019 के बाद सपा-बसपा के बीच गठबंधन क्यों टूट गया.

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संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 14 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:16 PM IST

हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है. इसी क्रम में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी हिंदी दिवस की बधाई दी. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि आजादी के दीवानों के बीच हिंदी उर्दू को लेकर एक क्रांति बनी. हम जितना हिंदी भाषा का सम्मान कर रहे, उतना ही अन्य भाषाओं का भी सम्मान करना होगा.

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अखिलेश यादव ने बसपा से गठबंधन टूटने का भी दिया जवाब

दान वीरता और त्याग का कर्ण से बड़ा कोई उदाहरण नहीं है. राजनीति में हमे विचारों को, सिद्धांतो को लेकर जो त्याग करना होगा, वो त्याग हम करेंगे. इस दौरान अखिलेश ने बसपा के साथ गठबंधन टूटने को लेकर भी जवाब दिया.

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अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ परिस्थितियां ऐसी रही जिसकी वजह से गठबंधन नहीं चला. जिस समय बसपा का गठबंधन टूटने का एलान हुआ, उस समय मेरी बाई तरफ बैठे बीएसपी के एक नेता ने कहा कि ऐसा धोखा मुझे भी मिला था और आप को भी मिला है. इस दौरान उन्होंने मंगेश यादव एनकाउंटर पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पूरा पुलिस विभाग साजिश और झूठी कहानी गढ़ने में लगा है.

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2019 में टूट गया था सपा-बसपा का गठबंधन

उत्तर प्रदेश में 2019 लोकसभा चुनाव के बाद सपा और बसपा का गठबंधन टूट गया था. गठबंधन क्यों टूटा था, इसको लेकर बीते दिनों बसपा सुप्रीमों मायावती ने बयान भी दिया था. एक कार्यक्रम के दौरान बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़ने की वजह भी बताई.

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मायावती ने कहा कि 2019 में लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया था. आपको बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जिसमें यूपी की 80 सीटों में से सपा ने 37 तो बसपा ने 38 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे. इसके अलावा तीन सीटों पर जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी ने चुनाव लड़ा था. जबकि अमेठी और रायबरेली सीट को कांग्रेस के लिए छोड़ा गया था. इसके बाद सपा को सिर्फ पांच सीटों पर जीत मिली थी, जबकि बसपा 10 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. 
 

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