11 टेथर्ड ड्रोन, एंटी ड्रोन सिस्टम और एडीजी रैंक के अधिकारियों की तैनाती... महाकुंभ में सुरक्षा के ये हैं इंतजाम

प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के दौरान हर रोज लाखों की तादाद में श्रद्धालु स्नान करने पहुंच रहे हैं. इस दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूपी पुलिस अत्याधुनिक तकनीक का भी सहारा ले रही है.

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Mahakumbh 2025 Mahakumbh 2025

आनंद राज

  • प्रयागराज,
  • 15 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 3:12 PM IST

प्रयागराज में दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम की शुरुआत हो चुकी है. पौष पूर्णिमा पर स्नान के साथ ही महाकुंभ का आगाज हो गया. करोड़ों की तादाद में श्रद्धालुओं के इस समागम के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. महाकुंभ मेला क्षेत्र में हवाई निगरानी और भीड़ प्रबंधन के लिए 11 टेथर्ड ड्रोन के साथ ही एंटी-ड्रोन सिस्टम भी तैनात किए गए हैं. टेथर्ड ड्रोन की निगरानी करने की जिम्मेदारी एडीजी रैंक के अधिकारियों को सौंपी गई है.

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महाकुंभ मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. उन्होंने सुरक्षा निगरानी के लिए टेथर्ड ड्रोन के उपयोग को एक नए युग की शुरुआत बताया है. ये टेथर्ड ड्रोन काम कैसे करते हैं? चर्चा इसे लेकर भी हो रही है.

टेथर्ड ड्रोन कैसे करते हैं काम?

टेथर्ड ड्रोन केबल के जरिये ग्राउंड स्टेशन से जुड़े होते हैं. केबल के जरिये ही इन ड्रोन्स तक बिजली आपूर्ति की जाती है जिसकी वजह से ये आम ड्रोन के मुकाबले अधिक समय तक काम करने में सक्षम होते हैं. ये ड्रोन्स लगातार 12 घंटे तक निगरानी कर सकते हैं. ये 120 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं और 3 किलोमीटर के दायरे को कवर कर सकते हैं. नवीनतम थर्मल और आईआर कैमरों से सुसज्जित ये ड्रोन दिन और रात, दोनों समय 4K लाइव फुटेज के साथ 36x ऑप्टिकल और 8x डिजिटल जूम क्षमता से भी लैस हैं.

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चार टेथर्ड ड्रोन यूपी पुलिस के सुरक्षा विभाग ने तैनात किए हैं जबकि चार यातायात विभाग और तीन आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने तैनात किए हैं. इन ड्रोन्स का उपयोग भीड़ प्रबंधन से लेकर यातायात प्रबंधन, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने, आपातकालीन प्रतिक्रिया के साथ ही मैनपावर के प्रबंधन के लिए किया जा रहा है.

एंटी ड्रोन सिस्टम भी तैनात

ड्रोन का उपयोग सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तो किया ही जा रहा है, साथ ही हवाई खतरे से निपटने के लिए एंटी ड्रोन सिस्टम की तैनाती भी की गई है. महाकुंभ मेला क्षेत्र के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों पर तीन एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए हैं जो आठ किलोमीटर के दायरे में दुश्मन ड्रोन का पता लगाने और दो किलोमीटर तक उनके सिग्नल जाम करने में सक्षम हैं. एक रडार-आधारित सिस्टम 15 किमी दूर तक ड्रोन का पता लगा सकता है और तीन किलोमीटर के भीतर उन्हें निष्क्रिय कर सकता है.

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जानकारी के मुताबिक महाकुंभ मेला क्षेत्र में अब तक नौ अवैध ड्रोन निष्क्रिय किए जा चुके हैं. इनमें से छह ड्रोन तो अकेले 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन ही निष्क्रिय किए गए जिसमें से एक ड्रोन रेड जोन के करीब निष्क्रिय किया गया था. यूपी पुलिस के टेथर्ड ड्रोन के संचालन की निगरानी एडीजी रैंक के अधिकारी रघुबीर लाल के साथ ही एसपी ट्रेनिंग और एसपी सुरक्षा कर रहे हैं जबकि यातायात विभाग के ड्रोन की निगरानी एडीजी (ट्रैफिक) सत्य नारायण और आईजी ट्रैफिक सुभाष दुबे, एटीएस के ड्रोन की निगरानी एडीजी एटीएस नीलाब्जा चौधरी के जिम्मे रही.

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