अखिलेश लाए अपना PDA पंचांग, क्या यूपी चुनाव से पहले बदल पाएंगे माहौल?

समाजवादी पार्टी ने नए साल 2026 की शुरुआत PDA पंचांग के साथ की है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पंचांग का विमोचन किया, जिसमें PDA समाज से जुड़े महापुरुषों की जयंती, पुण्यतिथि, सामाजिक आंदोलनों के महत्वपूर्ण दिन और राष्ट्रीय पर्व शामिल हैं.

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अखिलेश यादव ने किया PDA पंचांग का विमोचन (Photo: X/ @yadavakhiles) अखिलेश यादव ने किया PDA पंचांग का विमोचन (Photo: X/ @yadavakhiles)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 06 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं, लेकिन राजनीतिक पार्टियां अभी से ही चुनावी मोड में आती नजर आ रही हैं. नए साल के मौके का भी चुनावी गणित ध्यान रख इस्तेमाल करने की कवायद भी दिखने लगी है. समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने नए साल के मौके पर नए अंदाज में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड चला है.

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अखिलेश यादव ने साल 2026 की शुरुआत समाजवादी पार्टी का अपना एक अलग पीडीए कार्ड जारी किया है. सपा के PDA पंचांग 2026 को पार्टी की ओर से सामाजिक एकता और चेतना का प्रतीक बताया जा रहा है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नए साल के मौके पर पीडीए पंचांग जारी किया है.

इस पीडीए पंचांग को समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव और अखिल भारतीय चौरसिया महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अजय चौरसिया ने छपवाया है. इस पंचांग में पीडीए समाज के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि को विशेष तौर पर बताया गया है. अन्य धार्मिक पंचांग की तरह इस पीडीए पंचांग में भी अमावस पूर्णिमा व्रत त्यौहार की तिथियां दी गई है लेकिन इसमें देश के राष्ट्रीय पर्व, ऐतिहासिक दिवस के साथ-साथ सामाजिक आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण दिन भी दर्ज है. 

समाजवादी पार्टी का मानना है यह पीडीए पंचांग समाज को अपने नायकों को याद करने और उनके विचारों से प्रेरणा लेने का अवसर देता है. पर्व त्यौहार व्रत के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक महत्वपूर्ण दिनों के शामिल होने से यह पंचांग पूरी तरह से उपयोगी है और हर वर्ग के लिए लाभकारी.

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पंचांग का विमोचन करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि पीडीए समाज की एकता चेतना और अधिकारों की लड़ाई समाजवादी आंदोलन की आत्मा रही है. ऐसे में यह पंचांग समाज को उसके महापुरुषों उनके विचारों और संघर्षों से जोड़ने का काम करेगा. इतिहास तभी जीवित रहता है जब उसे नई पीढ़ी तक व्यवस्थित और सरल रूप से पहुंचाया जाए. समाजवादी पीडीए पंचांग 2026 इसी उद्देश्य को पूरा करता है.

इस पंचांग में समाजवादी और बहुजन समाज से जुड़े महापुरुषों के जीवन, योगदान और संघर्षों को भी स्थान दिया गया है. समाजवादी पार्टी इसे केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और वैचारिक जुड़ाव का माध्यम मान रही है. गौरतलब है कि सपा ने लोकसभा चुनाव से पहले पीडीए का नारा दिया था.

सपा का यह नारा सफल रहा था और यूपी में अखिलेश की पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी. विधानसभा चुनाव से पहले भी सपा की रणनीति पीडीए के दांव को धार देने की है. 

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