अमरमणि और मधुमणि त्रिपाठी हुए रिहा, मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में 16 साल बाद मिली राहत

पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि जेल से रिहा हो गए हैं. इसके बाद महाराजगंज के नौतनवां कस्बे में पूर्व मंत्री के आवास पर समर्थकों की भीड़ लगी हुई है. प्रशंसक मिठाई और ढोल बजाकर जश्न मना रहे हैं. बताते चलें कि कवियत्री मधुमिता शुक्‍ला के हत्या के मामले में 24 अक्टूबर 2007 को देहरादून की विशेष अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

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कवयित्री मधुमिता हत्याकांड के मामले में रिहा हुए अमरमणि कवयित्री मधुमिता हत्याकांड के मामले में रिहा हुए अमरमणि

अमितेश त्रिपाठी / संतोष शर्मा

  • महाराजगंज/गोरखपुर ,
  • 25 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 8:35 PM IST

उत्तर प्रदेश के चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि जेल से रिहा हो गई है. दोनों 20 सालों से सजा काट रहे थे. जेल में अच्छे आचरण की वजह से उनकी समय से पहले रिहाई हुई. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी बाकी की सजा को माफ कर दिया गया है. इसके बाद महाराजगंज के नौतनवां कस्बे में पूर्व मंत्री के आवास पर समर्थकों की भीड़ लग गई. उनके प्रशंसक मिठाई और ढोल बजाकर जश्न मनाने लगे.

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बता दें, कवियत्री मधुमिता शुक्‍ला के हत्या के मामले में 24 अक्टूबर 2007 को देहरादून की विशेष अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. 18 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने लोअर कोर्ट के द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा था. 13 मई 2022 को मधुमनी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अच्छे बर्ताव के चलते सजा में माफी को लेकर दया याचिका दायर की गई थी. 21 नवंबर 2022 को रिहाई का आदेश दिया गया था. 

कोर्ट के आदेश के बाद समर्थकों ने मनाया जश्न

मगर, कोर्ट के आदेश के बावजूद रिहाई न होने पर मधुमनी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का वाद दायर किया गया था. 3 जुलाई 2023 को मधुमनी की उम्र 61 साल और 22 नवंबर 2022 को 17 साल 3 महीने 9 दिन की सजा काटने व जेल में अच्छे आचरण के देखते हुए मधुमनी और अमरमणि की रिहाई का आदेश दिया गया. इसी आदेश के क्रम में उत्तर प्रदेश के कारागार प्रशासन ने मधुमनी और अमरमणि को जेल से रिहा करने का आदेश दिया है. 

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अमरमणि की तरफ से गाड़ियों के कागजात लगाए गए

बता दें, 25-25 लाख के निजी मुचलके और 25-25 लाख के 4 जमानतदार की जमानत पर अमरमणि त्रिपाठी और मधुमणि त्रिपाठी छोड़े गए. DM Office में अमरमणि की तरफ से 6 गाड़ियों के कागजात मुचलके के लिए लगाए गए.

 

20 साल से अपने मां-बाप के बिना लड़ाई लड़ रहा था

रिहाई के आदेश पर उनके बेटे अमन मणि ने कहा कि देश के संविधान ने एक आम आदमी को जो अधिकार दिया है, वो हमें भी मिला है. उसी के तहत रिहाई हुई है. संविधान, अदालत और देश की जनता का शुक्रिया. 20 साल से अपने मां-बाप के बिना लड़ाई लड़ रहा था. आज का दिन बेहद अहम है.

अमन मणि ने बताया कि अभी माता-पिता की तबीयत खराब है. वो कुछ दिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही रहेंगे. फिर डॉक्टर जैसा परामर्श देंगे, उसके हिसाब से आगे निर्णय लिया जाएगा. जरूरत पड़ी तो हम डॉक्टर के परामर्श के बाद बेहतर इलाज के लिए किसी बड़े अस्पताल भी ले जाएंगे.

जेल के बजाय ज्यादातर समय अस्पताल में बीता

जानकारी के मुताबिक अमरमणि और उनकी पत्नी का ज्यादातर समय गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में गुजरा. जब से सजा हुई दोनों अधिकतर समय बीमार रहे और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहे. BRD मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड की दूसरी मंजिल पर 32 कमरे हैं.  इसमें ऊपरी हिस्से के 16 नंबर कमरे में अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी एडमिट रहे हैं. 

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निधि शुक्ला ने किया रिहाई का विरोध 

जस्टिस अनिरूद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की. ये सुनवाई मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में हो रही थी. निधि शुक्ला ने अपनी बहन और कवियत्री मधुमिता शुक्ला की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी  को रिहा किए जाने का विरोध किया था. निधि के वकील ने कहा कि दोनों 14 साल से जेल की जगह अस्पताल में है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर आठ हफ्तों में जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से कहा कि अगर हम आपसे सहमत होंगे तो वापस उन्हें जेल भेज देंगे.

अमरमणि जैसा माफिया कैसे बना योगी सरकार की 'मजबूरी'

मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे माफिया टर्न पॉलिटिशियन अमरमणि त्रिपाठी की उनके अच्छे आचरण और उम्र को आधार बनाकर रिहाई हो रही है. माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाले यूपी सरकार को ये फैसला क्यों लेना पड़ा? विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

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