नोएडा के सेक्टर 150 में पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच चौथे दिन भी जारी रही. इस मामले में अब 24 जनवरी को SIT अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि क्या जांच में बड़े अफसरों की भूमिका भी सामने आएगी और उन पर कार्रवाई होगी या नहीं.
SIT की जांच का फोकस अब सिर्फ बिल्डरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नोएडा अथॉरिटी और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में है. SIT के अध्यक्ष ADG भानु भास्कर, मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और PWD चीफ इंजीनियर अजय वर्मा ने CP लक्ष्मी सिंह, DM मेधा रूपम, ACEO कृष्ण करुणेश और ACEO सतीश पाल से जवाब तलब किए हैं.
SIT ने 7 बिंदुओं पर नोएडा अथॉरिटी से मांगा जवाब
सूत्रों के मुताबिक नोएडा अथॉरिटी के संबंधित विभाग आज SIT को 7 बिंदुओं पर विस्तृत जवाब सौंपेंगे. इनमें डिजास्टर मैनेजमेंट की रिपोर्ट, रिस्पॉन्स टाइम, कंट्रोल रूम और फील्ड स्टाफ के बीच समन्वय, सड़क, पानी, सीवर जैसी सुविधाओं की स्थिति, प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया और युवराज की मौत से पहले हुई ट्रक दुर्घटना के बाद क्या सावधानी बरती गई जैसे सवाल शामिल हैं.
अधिकारियों का कहना है कि विभाग 60 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट SIT को सौंपेंगे. इसमें घटना के समय किए गए उपायों, बचाव कार्य की तैयारी और संभावित लापरवाहियों का ब्यौरा होगा.
अब तक दो FIR हो चुकी हैं दर्ज
SIT ने अब तक दो FIR दर्ज कर चुकी है. पहली FIR 18 जनवरी को युवराज के पिता की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें MZ Wiztown Planners और लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन पर लापरवाही, गैर इरादतन हत्या और जान को जोखिम में डालने जैसे आरोप शामिल थे. दूसरी FIR 20 जनवरी को पर्यावरण और प्रदूषण कानूनों के उल्लंघन के तहत दर्ज की गई, जिसमें लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन और MZ Wiztown Planners के पांच बिल्डरों के खिलाफ Environment Protection Act, Water Pollution Act और BNS की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.
पुलिस ने बताया कि अभियुक्तों में MZ Wiztown के डायरेक्टर अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
अब सवाल यह है कि SIT की रिपोर्ट में बिल्डरों के अलावा नोएडा अथॉरिटी और प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी कितनी सामने आती है. अगर रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि विभागीय लापरवाही, समन्वय की कमी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई, तो बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना है.
अरविंद ओझा