'दो बच्चों को जंजीरों से बंधा देखा...', फिर स्पेशल चाइल्ड की मां ने बनाया ऐसा App की पैरेंट्स कह रहे-थैंक्यू

नोएडा की रहने वाली अर्चना पांडे स्पेशल चाइल्ड (Special Child) पैरेंट्स के लिए फरिश्ता बनकर आई हैं. उन्होंने 'शिक्षा अर्चना' नाम का ऐप 2 महीने पहले ही लॉन्च की है, लेकिन इससे स्पेशल चाइल्ड के एक हजार से ज्यादा पैरेंट्स जुड़ चुके हैं. इस ऐप के जरिए स्पेशल चाइल्ड के लिए A से Z तक सारी जानकारी मिलेगी.

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अर्चना पांडे. अर्चना पांडे.

मनीष चौरसिया

  • नोएडा,
  • 20 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

नोएडा की रहने वाली अर्चना पांडे स्पेशल चाइल्ड (Special Child) पैरेंट्स के लिए फरिश्ता बनकर आई हैं. पेशे से टीचर अर्चना खुद भी स्पेशल चाइल्ड की मां हैं. उनका बेटा वैभव 16 साल का है. वैभव को सेरेब्रल पाल्सी समेत कई बीमारियां हैं. अर्चना ने स्पेशल चाइल्ड के लिए एक ऐप बनाया है, जिसमें उनके पालन-पोषण, उनकी शिक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने के बारे में जानकारी है. इस बारे में पूरी जानकारी इस ऐप पर मौजूद है. 'शिक्षा अर्चना' नाम का यह ऐप अभी 2 महीने पहले ही लॉन्च हुआ है, लेकिन इससे स्पेशल चाइल्ड के एक हजार से ज्यादा पैरेंट्स जुड़ चुके हैं.

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सभी के लिए नि:शुल्क

यह ऐप पूरी तरह नि:शुल्क है. इस ऐप से यूपी के 75 जिलों और 5 राज्यों के शिक्षक, न्यूरोसर्जन, थेरेपिस्ट और काउंसलर जुड़े हैं. कोई भी पैरेंट जो स्पेशल चाइल्ड के मामले में बिल्कुल नया है, उसे इस ऐप पर A से Z तक सारी जानकारी मिलेगी. थेरेपी सेंटर कहां है, सरकारी सेंटर कहां है, स्पेशल बच्चों से जुड़े उपकरण और चीजें कहां मिल सकती हैं, सारी जानकारी इस ऐप पर उपलब्ध है.

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दो बच्चों को जंजीरों से बंधा देखा

अर्चना बताती हैं कि जब उनका बेटा 3 साल का हुआ तो वह उसे स्पेशल बच्चों के स्कूल में भेजती थीं. एक दिन वहां दो ट्विन्स स्पेशल चाइल्ड को उनकी मां जंजीर में बांधकर लाईं, लेकिन जैसे ही उन दोनों बच्चों को मौका मिला वो एक दूसरे को पीटने लगे. उन्होंने एक दूसरे को इतना मारा कि दोनों को हॉस्पिटल ले जाना पड़ा. अर्चना ने उनकी मां से पूछा कि ये बच्चे एक दूसरे को ही क्यों मारते हैं? उनकी मां ने कहा पता नहीं. तब उन्हें लगा कि पैरेंट्स को गाइड करना कितना जरूरी है.

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डॉक्टर ने कहा था कि मेरा बेटा कभी खड़ा नहीं हो पाएगा

अर्चना बताती हैं कि उनका बेटा 6 महीने में पैदा हुआ और जन्म के समय उसका वजन 800 ग्राम था. 15 दिनों के अंदर उसे तीन बार वेंटिलेटर पर रखा गया. डॉक्टर ने कहा कि आपका बेटा कभी खड़ा नहीं हो पाएगा और चल नहीं पाएगा. लेकिन मैंने खुद को इसके लिए प्रशिक्षित किया. बहुत सारे कोर्स किए. आज मेरा बेटा अपने सारे काम खुद ही कर सकता है.

एक स्पेशल बच्चे की देखभाल करना अपने आप में एक बड़ा काम है. लेकिन सोचिए, अर्चना अपने बेटे के साथ-साथ उन सभी माता-पिता और उनके स्पेशल बच्चों की भी देखभाल करती हैं, जिन्हें वो जानती तक नहीं हैं. वो इस ऐप के जरिए उन सभी तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.

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