इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने मुस्लिम समुदाय के लिए एडवाइजरी जारी की है. होली और शबे बरात एक ही दिन होने पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा है कि होली और शबे-बरात एक ही दिन है. इसलिए एक-दूसरे के धार्मिक जज्बातों का ख्याल रखा जाए.
साथ ही उन्होंने कहा है कि शबे-बरात वाले दिन शाम 5 बजे के बाद मुसलमान कब्रिस्तान जाएं. शबे बरात इबादत की रात होती है, इसलिए आतिशबाजी न की जाए. देश की तरक्की और अमन के लिए दुआ करें.
गौरतलब है कि, इस बार होली 8 मार्च (बुधवार) को है. साथ ही इसी दिन शबे-बरात भी है. इसको ध्यान में रखते हुए इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने मुसलमानों के लिए एडवाइजरी जारी की है.
शबे-बरात का अर्थ
शबे-बरात का अर्थ कुछ इस प्रकार है. शब यानी रात और बरात का मतलब होता है बरी होना. शबे-बरात के दिन इस दुनिया को छोड़कर जा चुके लोगों की कब्रों पर उनके प्रियजनों द्वारा रोशनी की जाती है और दुआ मांगी जाती है. इस दिन अल्लाह से सच्चे मन से अपने गुनाहों की माफी मांगने से जन्नत में जगह मिलती है.
मुस्लिम समुदाय के लोग शबे-बरात के अगले दिन रोजा रखते हैं. यह रोजा फर्ज नहीं है बल्कि नफिल रोजा कहा जाता है. यानी रमजान के रोजों की तरह ये रोजा जरूरी नहीं होता है, कोई यह रोजा रखे तो इसका पुण्य तो मिलता है, लेकिन न रखे तो इसका गुनाह नहीं होता.
इस्लाम की चार खास रातों में से होती है एक
इस्लाम धर्म में चार रातों को सबसे ज्यादा खास माना जाता है. जिनके नाम हैं अशूरा, शब-ए-मेराज, शबे-बरात और शब-ए-कद्र. इन चार रातों के दौरान अल्लाह की इबादत को काफी अहम माना जाता है. कहा ये भी जाता है कि इन रातों में एक वक्त ऐसा आता है, जब मांगी गई दुआ जरूर पूरी होती है.
समर्थ श्रीवास्तव