नोएडा में फर्जी फाइनेंस रैकेट का भंडाफोड़... पुलिस ने ठगी के मास्टरमाइंड्स को किया गिरफ्तार

नोएडा पुलिस और सीआरटी स्वाट-2 ने फाइनेंस के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है. पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से पांच लग्जरी कारें व 28 फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं. आरोपी फर्जी पहचान और दस्तावेजों का उपयोग कर लोन लेकर वाहन खरीदते और बिना किस्त जमा किए उन्हें दूसरे राज्यों में बेच देते थे.

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी. (Photo: Screengrab) पुलिस की गिरफ्त में आरोपी. (Photo: Screengrab)

भूपेन्द्र चौधरी

  • नोएडा,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:31 PM IST

नोएडा के थाना फेस-2 पुलिस और सीआरटी स्वाट-2 की संयुक्त टीम ने फाइनेंस के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है. पुलिस ने इस मामले में तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से वाहन लोन लेकर ठगी कर रहे थे. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं.

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इसके साथ ही पुलिस को कुल 28 अहम दस्तावेज भी मिले हैं, जिनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और वाहनों की आरसी शामिल हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये सभी दस्तावेज अलग-अलग लोगों के नाम पर थे, जिनका इस्तेमाल फर्जी तरीके से किया जा रहा था.

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फर्जी पहचान से लोन, फिर गाड़ियों की बिक्री

पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी अलग-अलग व्यक्तियों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराते थे. इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वे बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से वाहन लोन मंजूर करवा लेते थे और महंगी लग्जरी गाड़ियां खरीदते थे.

गाड़ी खरीदने के बाद आरोपी लोन की मासिक किस्तें जमा नहीं करते थे. इसके बजाय वे इन वाहनों को दूसरे राज्यों में ले जाकर बेच देते थे. खरीदारों को यह भरोसा दिया जाता था कि दो से तीन महीने में वाहन की एनओसी दिला दी जाएगी.

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कई राज्यों में फैला नेटवर्क

सेंट्रल नोएडा के डीसीपी शक्ति अवस्थी ने बताया कि आरोपी फाइनेंस की गई गाड़ियों को पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान जैसे राज्यों में कम दामों पर बेचते थे. जब बैंक एजेंट किस्त न जमा होने पर दिए गए पते पर संपर्क करते थे, तो वह पता पूरी तरह फर्जी निकलता था.

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक ही गाड़ी पर बार-बार फ्रॉड करते थे. वे आरसी में दर्ज हाइपोथेकशन हटवाकर उसी गाड़ी पर किसी दूसरे बैंक से दोबारा लोन करा लेते थे. इस तरीके से फाइनेंस कंपनियों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है.

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