वाराणसी स्थित काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव के मंदिर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इसके चलते मंदिर के महंत परिवार और प्रबंधन ने बड़ा फैसला लेते हुए काल भैरव मंदिर में केक काटने पर रोक लगा दी है. इतना ही नहीं अब मंदिर के गर्भगृह में न तो फोटो, न ही वीडियोग्राफी और न ही रील बनाई जा सकेगी. काशी विद्वत परिषद ने मंदिर प्रबंधन के इस फैसले का विधिवत स्वागत किया है.
दरअसल, ऐसा फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि हाल ही में एक महिला मॉडल ने काल भैरव मंदिर के गर्भगृह में केक काटा और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था. जिसके बाद मंदिर के पुजारियों पर पश्चिमी संस्कृति को बढ़ावा देने और सनातन परंपरा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा था.
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काल भैरव मंदिर के महंत परिवार के सदस्यों ने बताया कि मंदिर परिसर में हमेशा केक काटा जाता था. पिछले शनिवार को भैरव अष्टमी का पर्व मनाया गया और इस पर्व पर भी केक काटा गया. इस उत्सव के बाद एक महिला मॉडल आती है और बाबा काल भैरव को केक चढ़ाने का अनुरोध करती है. जिसके बाद उसका सम्मान करते हुए उसे गर्भगृह में केक काटने की इजाजत दी गई.
इस बात की जानकारी नहीं थी कि महिला रील बना रही है और उसका जन्मदिन भी था. जब वीडियो वायरल होने लगा और मंदिर पर पैसे लेकर दर्शन कराने जैसे तमाम आरोप लगने लगे. इसके बाद मंदिर परिवार ने सामूहिक निर्णय लिया कि अब से काल भैरव मंदिर में केक नहीं काटा जाएगा. उन्होंने बताया कि अब से केक की जगह विशेष उत्सवों पर लड्डू और प्रसाद का भोग लगाकर भक्तों में बांटा जाएगा.
केक काटने पर रोक लगाने का फैसला सराहनीय
वहीं महंत परिवार के सदस्यों ने बताया कि आने वाले समय में पूरे मंदिर परिसर में फोटोग्राफी पर रोक रहेगी और गर्भगृह में यह प्रतिबंध लगाया गया है. वहीं विशेष दर्शन के सवाल पर पुजारियों ने बताया कि विशेष पूजा करने के लिए भक्तों से दक्षिणा ली जाती है, क्योंकि इसमें काफी सामग्री का इस्तेमाल होता है. उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में गर्भगृह में जाकर दर्शन करने वालों पर विशेष नजर रखी जाएगी. इसके अलावा काशी विद्वत परिषद ने कालभैरव मंदिर के महंत परिवार और प्रबंधन द्वारा लिए गए फैसले का समर्थन किया. परिषद के महासचिव प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि कालभैरव मंदिर में केक काटने की घटना अक्षम्य है, लेकिन केक काटने की परंपरा पर रोक लगाने का फैसला सराहनीय है.
रोशन जायसवाल