यूरोप लंबे समय से दुनियाभर के यात्रियों का ड्रीम डेस्टिनेशन रहा है. फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड जैसे देशों की चमक-दमक फिल्मों और सोशल मीडिया रील्स में कुछ ऐसी दिखाई जाती है कि लोग वहां जाने का सपना संजो लेते हैं, लेकिन हाल ही में एक वीडियो ने यूरोप की उस तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो आमतौर पर इंटरनेट पर दिखाई जाती है.
भारतीय ट्रैवल व्लॉगर प्रतीक सिंह ने अपने वायरल वीडियो में यूरोप का एक अलग ही चेहरा दिखाया है. वीडियो में कई यूरोपीय शहरों की सड़कों पर फैली गंदगी साफ नजर आती है. प्रतीक का कहना है कि सोशल मीडिया रील्स में जो यूरोप दिखाया जाता है, हकीकत उससे काफी अलग है.
‘10 लाख खर्च कर के यही देखने आए?’
प्रतीक सिंह वीडियो में बताते हैं कि यूरोप घूमने के लिए शेंगेन वीजा लेना आसान नहीं है. इसके लिए छह महीने के बैंक स्टेटमेंट, तीन महीने के ITR, ढेर सारे डॉक्यूमेंट्स और महंगे फ्लाइट टिकट्स की जरूरत पड़ती है. इसके बावजूद, उनके मुताबिक, वहां पहुंचने पर कई जगहों पर गंदगी, अव्यवस्था और अपराध देखने को मिलते हैं.वीडियो में वह कहते हैं कि 10 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करके आप यूरोप यही देखने आते हैं? ये सब तो भारत में भी देखा जा सकता है.
‘पूरब आगे निकल गया, पश्चिम पिछड़ रहा’
प्रतीक ने अपने वीडियो में यह भी दावा किया कि आज के समय में जापान, चीन, ताइवान, साउथ कोरिया, मलेशिया और सिंगापुर जैसे पूर्वी देश टूरिज्म, इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास के मामले में आगे निकल चुके हैं. उनके मुताबिक, यूरोप और वेस्टर्न वर्ल्ड धीरे-धीरे अपनी चमक खो रहा है.
सुरक्षा और अव्यवस्था पर भी सवाल
व्लॉगर ने यूरोप में चोरी, लूटपाट और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने एक घटना का जिक्र किया, जब नीदरलैंड्स में एक फुटबॉल मैच के दौरान हालात बेकाबू हो गए और जमकर आतिशबाजी व हंगामा हुआ. इसके अलावा, उन्होंने सड़कों पर अवैध प्रवासियों की मौजूदगी और उससे जुड़ी समस्याओं की भी बात की.
देखें वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर दो हिस्सों में बंटी राय
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है.एक यूजर ने लिखा कि गंदगी, अवैध प्रवासी, रात में बढ़ता अपराध इतने पैसे खर्च कर यही देखने जाएं?वहीं नीदरलैंड्स में रहने वाले एक व्यक्ति ने अलग अनुभव साझा करते हुए कहा कि एम्स्टर्डम के टूरिस्ट इलाकों में गंदगी है, लेकिन बाकी हिस्से साफ और सुरक्षित हैं.कुछ यूजर्स ने अवैध प्रवासन को समस्या की जड़ बताया, तो कुछ ने वीडियो को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया नजरिया कहा.
नतीजा क्या निकलता है?
बहुत से लोग प्रतीक सिंह से सहमत नहीं दिखे. कुछ का कहना था कि वीडियो यूरोप को लेकर बनी परफेक्ट तस्वीर को चुनौती जरूर देता है, लेकिन हर किसी का अनुभव अलग हो सकता है
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