जवान, पतली, नीली आंखों वाली लड़कियों को ही नौकरी देती थी ये एयरलाइंस, मैटर पहुंच गया कोर्ट...

ऐसे आरोप हैं कि प्रोफेशनल और कॉलेज स्पोर्ट्स टीमों को सेवा प्रदान करने वाली चार्टर फ्लाइट्स में अटेंडेंट की नौकरी के लिए न तो अनुभव देखा जा रहा है और न ही काम करने का तरीका.

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एयरलाइन पर लगा भेदभाव का आरोप (प्रतीकात्मक तस्वीर- Pexels) एयरलाइन पर लगा भेदभाव का आरोप (प्रतीकात्मक तस्वीर- Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:41 PM IST

अमेरिका की यूनाइटेड एयरलाइंस पर आरोप लगा है कि वो नौकरी देने के मामले में भेदभाव कर रही है. उसके खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है. एयरलाइंस को लेकर आरोप लगाया गया है कि वो विशेष फीचर और आयु वर्ग के लोगों को ही नौकरी दे रही है. प्रोफेशनल और कॉलेज स्पोर्ट्स टीमों को सेवा प्रदान करने वाली चार्टर फ्लाइट्स में अटेंडेंट की नौकरी के लिए न तो अनुभव देखा जा रहा है और न ही काम करने का तरीका. 
 
लॉस एंजिल्स टाइम्स के अनुसार, यूनाइटेड एयरलाइंस की दो फ्लाइट अटेंडेंट ने एक मुकदमे में दावा किया है कि उन्हें लॉस एंजिल्स डोजर्स बेसबॉल टीम के लिए चार्टर फ्लाइट्स पर काम करने की अनुमति नहीं मिली. क्योंकि खिलाड़ी ऐसी अटेंडेंट पसंद करते हैं, जो युवा, पतली, गोरी और नीली आंखों वाली हों.

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50 साल की डोन टोड और 44 साल की डार्बी क्यूजादा ने दावा किया कि नौकरी देने के मामले में उनकी उपेक्षा की गई. बाद में इस तरह की फ्लाइट्स से दोनों को बाहर कर दिया गया. इनके स्थान पर उन महिला सहकर्मियों को चुना गया, जो 'युवा और पतली' हैं.

मुकदमा 25 अक्टूबर को लॉस एंजिल्स काउंटी सुपीरियर कोर्ट में दायर किया गया. इसमें दोनों महिलाओं ने यूनाइटेड की चार्टर फ्लाइट्स के कर्मचारियों के संबंध में नस्ल, जन्म स्थान, धर्म और उम्र के आधार पर उत्पीड़न और भेदभाव का आरोप लगाया है.

मुकदमे में बताया गया है कि टोड और क्यूजादा दोनों ने यूनाइटेड के लिए 15 साल से अधिक वक्त तक काम किया है और खास उड़ानों में स्टाफ का काम करने के लिए एयरलाइन के कार्यक्रम में शामिल होने की कोशिश में एक दशक से अधिक समय बिताया है. उड़ान के लंबे समय और अन्य सुविधाओं के कारण इस तरह के असाइनमेंट से अटेंडेंट्स को सामान्य असाइनमेंट के मुकाबले तीन गुना तक पैसा मिल सकता है.

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मुकदमे में कहा गया है, 'दोनों महिलाओं के पास आवश्यक अनुभव और योग्यताएं थीं लेकिन उनके अनुरोधों को खारिज कर दिया गया क्योंकि वो श्वेत (गोरी) नहीं हैं.' न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, यूनाइटेड एयरलाइंस के पिछले मामले में एयरलाइन पर 'जवान, श्वेत, महिला और मुख्य रूप से सुनहरी या नीली आंखों वाली' फ्लाइट अटेंडेंट ही नियुक्त करने का आरोप लगाया गया था.

वहीं इस नए मुकदमे में साल 2020 के समझौते को नए मामले के आधार के रूप में इस्तेमाल किया गया है. इसमें कहा गया कि 'साल 2022 में चीजें फिर से बदल गईं, जब कई श्वेत यूनाइटेड फ्लाइट अटेंडेंट को क्रू के तौर पर चुना गया.'

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