कोई मर जाए तो खुद का शरीर काटती हैं औरतें, हैरान कर देगी यहां की अनोखी प्रथा

इंडोनेशिया की एक जनजाति 'दानी' के बीच प्रचलित एक ऐसी मान्यता है जिसे जानकर ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. इस जनजाति की महिलाएं अपने प्रियजनों की मौत के बाद मानों खुद को सजा देती हैं और अपने ही शरीर का अंग काट लेती हैं.

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सांकेतिक तस्वीर (Getty Images) सांकेतिक तस्वीर (Getty Images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2024,
  • अपडेटेड 1:17 PM IST

दुनिया के कई देशों और सभ्यताओं में आज भी सदियों पुरानी मान्यताएं कायम हैं. ये मान्यताएं कभी हैरान कर देती हैं तो कभी डरा देती हैं. भले हमें ये रीति-रिवाज विचित्र लगें मगर इन आदिवासियों के लिए ये मान्यताएं बेहद खास हैं. ऐसी ही एक मान्यता इंडोनेशिया की एक जनजाति 'दानी' के बीच प्रचलित है जिसे जानकर ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. इस जनजाति की महिलाएं अपने प्रियजनों की मौत के बाद मानों खुद को सजा देती हैं. 

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महिलाएं काट लेती हैं शरीर के ये अंग

यहां परिवार की औरतों को किसी प्रियजन के निधन के बाद, उनके सम्मान और शोक के संकेत के रूप में अपनी उंगलियों के ऊपरी हिस्से को काटना होता है. वह बिना हिचकिचाए ऐसा करती भी हैं.
 
इस प्रथा का उद्देश्य उस दर्द का प्रतीक है जो किसी प्रियजन को खोने के बाद महसूस होता है. इसी तरह इस जनजाति में कई लोग अक्सर अपने जीवनकाल के दौरान अपनी कई अंगुलियों को काट देते हैं. डेली मेल की खबर के अनुसार  पड़ोसी देश सिंगापुर के फ़ोटोग्राफ़र और आईटी सपोर्ट इंजीनियर तेह हान लिन ने चार दिन की अवधि में इस जनजाति की कई तस्वीर खींची थीं.

फोटो- Getty Images

जनजाति के मर्द पहनते हैं पारंपरिक 'कोटेका'

उन्होंने कहा-'दानी जनजाति एक बहुत ही अनोखी जनजाति है, विशेष रूप से उनके जीवन जीने के तरीके और उनके पारंपरिक 'कोटेका (मर्दों द्वारा प्राइवेट पार्ट छुपाने के लिए पहना जाने वाला अनोखा वस्त्र) ' पहनने को लेकर भी. मैं  नहीं जानता कि यह जनजाति कब विलुप्त हो जाएगी, यही कारण है कि मैंने इस साल उनसे मिलने का फैसला किया.'

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1938 में हुई जनजाति की खोज

दानी लोगों के रूप में जानी जाने वाली इस जनजाति की खोज 1938 में एक अभियान के बाद अनजाने में अमेरिकी शख्स रिचर्ड आर्चबोल्ड ने की थी. बीसवीं सदी के मध्य से दानी जनजाति अपने अनूठे रीति-रिवाजों और पहचान की मजबूत भावना के लिए प्रसिद्ध हो गई है.
 
तेह हान ने कहा-'केवल महिलाओं को अपनी उंगलियां काटनी पड़ती हैं. मुझे लगता है कि यह एक क्रूर और अमानवीय प्रथा है, लेकिन उनके लिए प्रियजनों के प्रति दुख दिखाने का यही एकमात्र तरीका है और वे ऐसा करने में जरा भी नहीं सकुचाते हैं.'

फोटो- Getty Images

इंडोनेशियाई सरकार ने लगाया रिवाज पर बैन

हालांकि, अब इस प्रथा को इंडोनेशियाई सरकार ने गैरकानूनी घोषित कर दिया है, लेकिन ये पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. इसके अलावा इस परंपरा के संकेत जनजाति की वृद्ध महिलाओं में अभी भी देखे जा सकते हैं. अपने विवादास्पद रीति-रिवाजों के बावजूद, दानी जनजाति दशकों से इस क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित कर रही है क्योंकि अधिक से अधिक लोग इस क्षेत्र में आते हैं. लोग उनकी थोड़ी अनोखी और थोड़ी सरल जीवनशैली को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं.

नृशंस हेडहंटर्स के रूप में जाने जाते हैं दानी
 
क्षेत्र की अन्य जनजातियों के बीच दानी जनजाति की इमेज थोड़ी डरावनी है, और उन्हें सबसे नृशंस हेडहंटर्स के रूप में जाना जाता है. लेकिन वे खुद से मिलने आने वाले लोगों का बहुत गर्मजोशी से स्वागत करते हैं. भाषा की बात करें तो ये लोग वास्तव में बहासा इंडोनेशिया या अंग्रेजी नहीं बोलते हैं, वे शारीरिक भाषा और हाथ के संकेतों के माध्यम से बात समझाने का प्रयास करते हैं.'वे उग्र दिख सकते हैं लेकिन बहुत दोस्ताना और विनम्र होते हैं.

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