आमतौर पर अस्पताल में इलाज के दौरान किसी मरीज की मौत होने पर परिवार द्वारा शव ले जाने तक उसे हॉस्पिटल के ही मुर्दाघर में रखा जाता है. इस लाशों के बीच ऐसा मुर्दाघर में काम करने वाले कर्मचारियों को भी बड़ा हिम्मत वाला माना जाता है. लेकिन इन्हीं लाशों में से अगर कोई अचानक सांस लेने लगे को अच्छे- अच्छों की हिम्मत टूट जाए.
मुर्दाघर में जिंदा हो गई लाश
बीते दिनों ब्राजील के साओ जोसे रिजनल अस्पताल में सच में ही कुछ ऐसा हुआ. यहां इलाज के दौरान 90 साल की Norma Silveira da Silva की 25 नवंबर को मौत हो गई. जब तक परिजन लाश को घर ले जाते तब तक के लिए उन्हें अस्पताल के मुर्दाघर में एक बैग में रखा गया लेकिन कुछ घंटे बाद मुर्दाघर के एक कर्मचारी ने जैसे ही बैग को खोला उसे अहसास हुआ कि नोर्मा सांस ले रही है. वह शव तुरंत वापस डॉक्टर के पास ले गया. यहां डॉक्टरों की निगरानी में नोर्मा दो दिन तक जीवित लेकिन बेहोश रही और 27 नवंबर को उनकी मौत हो गई.
बनाए गए दो डेथ सर्टिफिकेट
नतीजा ये हुआ कि नोर्मा के लिए दो डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के अधिकारी, ब्राजील की मेडिकल एथिक्स कमेटी और डेथ कमीशन अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि जीवित होने के बावजूद महिला को मुर्दाघर में कैसे भेजा गया. नोर्मा की दोस्त जेसिका मार्टिंस सिल्वी परेरा ने कहा कि नोर्मा का परिवार अब अस्पताल पर मुकदमा करने की योजना बना रहा है. उन्होंने कहा, ये पूरी तरह से अस्पताल की लापरवाही का मामला है.
'घंटों से घुट रहा होगा दम'
जेसिका ने कहा- जब बैग खोला गया तो वह बहुत कमजोर तरीके से सांस ले रही थी. और, चूंकि वह होश में नहीं थी, इसलिए वह मदद नहीं मांग सकती थी, उसने सांस लेने की कोशिश की और तड़पती रही. इसका मतलब है कि रात 11:40 पर मृत घोषित किए जाने से लेकर आधी रात 1:30 बजे तक वह बैग के अंदर लगभग दम घुटने से मर रही थी. जेसिका के मुताबिक, नोर्मा के परिवार को अभी तक मौत का कारण नहीं बताया गया है.
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