विशाल गैंडे से मुकाबला करने लगा बेबी हिरण, फिर हुआ कुछ ऐसा… आखिरी सीन देख हैरान रह गए लोग

एक छोटा सा हिरण 1.7 टन वजनी गैंडे से भिड़ गया. इस अनोखी भिड़ंत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. लोग हैरानी के साथ मज़ाक में यह भी पूछ रहे हैं कि आखिर इतने छोटे हिरण में इतनी हिम्मत आई कहां से.

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 चिड़ियाघर प्रशासन ने इस असामान्य व्यवहार की वजह भी बताई है (Photo:AFP) चिड़ियाघर प्रशासन ने इस असामान्य व्यवहार की वजह भी बताई है (Photo:AFP)

aajtak.in

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  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:54 AM IST

पोलैंड के व्रोकलॉ चिड़ियाघर में एक बेहद चौंकाने वाला नजारा देखने को मिला, जहां एक छोटे से हिरण ने विशालकाय गैंडे को खुली चुनौती दे दी. इस अनोखी घटना का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

वीडियो में साफ दिखाई देता है कि हिरण पहले गैंडे को अपने सींगों से टक्कर मारता है और फिर उससे कई गुना बड़े गैंडे के पीछे दौड़ लगाने लगता है. गैंडे का नाम मारुस्का बताया गया है. आकार में जमीन-आसमान के फर्क के बावजूद हिरण का यह बेखौफ अंदाज़ वहां मौजूद लोगों को हैरान कर देता है.

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छोटे से हिरण में कहां से आई इतनी हिम्मत?

चिड़ियाघर प्रशासन ने इस असामान्य व्यवहार की वजह भी बताई है. अधिकारियों के मुताबिक, हिरण के हार्मोन इस समय काफी सक्रिय हैं. दरअसल, उसकी मादा साथी हीट में है और नर हिरण टेस्टोस्टेरोन से भरपूर अवस्था में है. इसी कारण वह अपनी ऊर्जा निकालने और अपना दबदबा दिखाने की कोशिश कर रहा था.

चिड़ियाघर की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उसे अपनी ताकत दिखानी थी और यह जताना था कि बॉस कौन है, भले ही सामने वाला 1.7 टन वजनी ही क्यों न हो.अधिकारियों ने मजाकिया अंदाज में यह भी जोड़ा कि किसने सोचा था कि इतने छोटे से शरीर में ऐसा योद्धा छिपा होगा?.

देखें वायरल वीडियो

 

यह हिरण रीव्स मंटजैक प्रजाति का है, जिसे आमतौर पर 'भौंकने वाला हिरण' भी कहा जाता है, क्योंकि यह कुत्ते जैसी आवाज निकालता है. यह प्रजाति मूल रूप से दक्षिण-पूर्वी चीन और ताइवान की मानी जाती है और बर्फीले जंगलों से लेकर उपोष्णकटिबंधीय इलाकों तक, अलग-अलग वातावरण में आसानी से रह सकती है.

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खुरदार जानवरों के देखभालकर्ता माचेय ओकुपनिक के मुताबिक, यह टकराव भले ही असामान्य लगे, लेकिन आम तौर पर हिरण और गैंडे एक-दूसरे के साथ शांतिपूर्वक रहते हैं. उन्होंने बताया कि चिड़ियाघर और जंगल, दोनों जगह ये जानवर एक ही इलाके में पाए जाते हैं, हालांकि वे आमतौर पर दूरी बनाए रखते हैं. दोनों प्रजातियां अपने-अपने क्षेत्र को चिन्हित करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाती हैं, यही वजह है कि इस तरह की भिड़ंत बहुत कम देखने को मिलती है.

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