बेंगलुरु एयरपोर्ट पर कुर्सी पर सोता दिखा आवारा कुत्ता, वीडियो वायरल, छिड़ी बहस

एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुत्ते की मौजूदगी का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. जहां कुछ लोग स्वच्छता और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं, वहीं कई यूज़र्स इसे इंसानियत और आवारा पशुओं के अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं. 

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सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. Photo: X/@@i_m_harshitsing) सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. Photo: X/@@i_m_harshitsing)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:30 AM IST

एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुर्सी पर आवारा कुत्ता सोते हुआ दिखा. इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर ज़ोरदार बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों ने इसे यात्रियों की सुरक्षा और साफ़-सफाई से जोड़कर देखा, तो वहीं कई यूज़र्स ने इसे इंसान और जानवरों के रिश्ते से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बताया. एक तरफ, कई यूज़र्स ने एयरपोर्ट जैसे हाई-सिक्योरिटी और भारी भीड़ वाले स्थान पर स्वच्छता को लेकर चिंता जताई. उनका कहना था कि रोज़ाना हज़ारों यात्री यहां से गुजरते हैं, ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही भी स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है. 

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कुत्ते के समर्थन में भी खड़े नजर आए लोग
एक यूज़र ने टिप्पणी करते हुए लिखा- सोचिए अगर उस कुत्ते ने कुर्सी पर अपना गंदा शरीर उस पर रगड़ा हो. बाद में कोई यात्री बिना जाने उसी कुर्सी पर बैठ जाए और वही गंदगी फ्लाइट के अंदर तक ले जाए. ऐसे ही कई लोगों का मानना था कि एयरपोर्ट प्रशासन को साफ़-सफाई के मामले में बेहद सख्त नियम अपनाने चाहिए, क्योंकि यहां बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार यात्रियों की आवाजाही भी होती है. वहीं दूसरी ओर, इस मुद्दे पर कई लोग कुत्ते के समर्थन में भी खड़े नजर आए. उनका कहना था कि आवारा जानवरों की समस्या इंसानों की बनाई हुई है और इसके लिए जानवरों को दोष देना गलत है.

'धरती सिर्फ इंसानों की नहीं'
एक यूज़र ने लिखा- उन्हें भी जीने का उतना ही हक है जितना हमें. हम उन्हें आवारा कहते हैं, लेकिन असल में इस स्थिति के लिए इंसान खुद जिम्मेदार हैं. धरती सिर्फ इंसानों की नहीं है. कई लोगों ने यह भी कहा कि वीडियो में दिख रहा कुत्ता शांत और किसी को नुकसान पहुंचाने वाला नहीं लग रहा था. उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक कोई असुविधा नहीं होती, तब तक सब ठीक रहता है, लेकिन जैसे ही थोड़ी परेशानी शुरू होती है, इंसान की संवेदनशीलता और दया क्यों खत्म हो जाती है. इस पूरी बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर साफ़-सफाई और सुरक्षा के साथ-साथ इंसानियत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.

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