क्या माया-अखिलेश को BJP का अघोषित प्रवक्ता बता रही हैं प्रियंका गांधी

उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग कानपुर ने प्रियंका गांधी वाड्रा को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है. इस पर प्रिंयका गांधी ने योगी सरकार के साथ-साथ इशारों-इशारों में मायावती और अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा है. प्रियंका ने कहा कि फिजूल की धमकियां देकर समय बर्बाद ना करें. उन्होंने कहा कि वह इंदिरा गांधी की पोती हैं, कोई अघोषित भाजपा प्रवक्ता नहीं हैं.

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (फोटो-INC) कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (फोटो-INC)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2020,
  • अपडेटेड 2:16 PM IST

  • शेल्टर होम मामले को लेकर प्रियंका-योगी सरकार आमने-सामने
  • प्रियंका ने योगी के साथ-साथ अखिलेश-माया पर भी साधा निशाना

उत्तर प्रदेश के कानपुर शेल्टर होम (बालिका गृह) में कई बच्चियों के कोरोना संक्रमित मिलने के बाद से सियासी संग्राम छिड़ गया है. कांग्रेस महासिचव प्रियंका गांधी कोरोना संक्रमण से लेकर कानपुर शेल्टर होम मामले तक योगी सरकार को जबरदस्त तरीके से घेरने में जुटी हैं. वहीं, उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी सपा और बसपा कांग्रेस की तर्ज पर योगी सरकार को घेरती नजर नहीं आई.

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आगरा डीएम के बाद अब उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग कानपुर ने प्रियंका गांधी वाड्रा को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है. इस पर प्रिंयका गांधी ने योगी सरकार के साथ-साथ इशारों-इशारों में मायावती और अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा है. प्रियंका ने कहा कि फिजूल की धमकियां देकर समय बर्बाद ना करें. उन्होंने कहा कि वह इंदिरा गांधी की पोती हैं, कोई अघोषित भाजपा प्रवक्ता नहीं हैं. ऐसे में प्रियंका कहीं, अघोषित रूप से मायावती और अखिलेश को बीजेपी का अघोषित प्रवक्ता तो नहीं बता रही हैं.

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प्रियंका गांधी ने अपने ट्वीट कर लिखा, 'जनता के एक सेवक के रूप में मेरा कर्तव्य यूपी की जनता के प्रति है और वह कर्तव्य सच्चाई को उनके सामने रखने का है. किसी सरकारी प्रोपेगेंडा को आगे रखना नहीं है. उत्तर प्रदेश सरकार अपने अन्य विभागों द्वारा मुझे फिजूल की धमकियां देकर अपना समय व्यर्थ कर रही है'. प्रियंका गांधी ने आगे लिखा कि जो भी कार्रवाई करना चाहते हैं, बेशक करें. मैं सच्चाई सामने रखती रहूंगी. मैं इंदिरा गांधी की पोती हूं, कुछ विपक्ष के नेताओं की तरह भाजपा की अघोषित प्रवक्ता नहीं.

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प्रियंका के इस ट्वीट को योगी सरकार के साथ-साथ बीएसपी अध्यक्ष मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल कोरोना संकट सहित तमाम मुद्दों को लेकर प्रियंका गांधी ट्वीट कर योगी सरकार को घेरने में जुटी हैं तो कांग्रेसी कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर सरकार को कठघरे में खड़ा करे हैं. यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को 21 दिनों तक जेल में भी रहना पड़ा है.

मजदूरों की घर वापसी के लिए प्रियंका गांधी और योगी सरकार के बीच बस विवाद में जब मायावती कूदी थी तो ऐसा लगा मानो वह यूपी सरकार का बचाव कर रही हो. अपने ट्वीट के एक पूरी श्रृंखला में मायावती का तीखा हमला योगी सरकार के बजाय कांग्रेस पार्टी पर दिखाई दिखाई दिया. वहीं, अखिलेश यादव ने भी आजतक को दिए अपने इंटरव्यू में इशारों में कांग्रेस पर ही सवाल खड़े कर दिए थे. ऐसे में कांग्रेस पार्टी ने बसपा को बकायदा बीजेपी का सहयोगी दल और मायावती को बीजेपी का प्रवक्ता तक कहा था.

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कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने कहा था कि मायावती तो बीजेपी की भाषा बोलती हैं. पुनिया ने कहा था कि 'ट्विटर बहनजी' जिस तरह की भाषा और ट्वीट का इस्तेमाल कर रही हैं, उससे साफ पता चलता है कि वह बीजेपी का प्रेस नोट बनाकर भेजती हैं. कांग्रेस अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बृजलाल खाबरी ने तो मायावती को दलित विरोधी और बीजेपी के साथ अंदरखाने समझौते का आरोप लगाया था. साथ ही मायावती को बीजेपी की अघोषित प्रवक्ता बताया था. अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि वो बीजेपी की अघोषित प्रवक्ता नहीं हैं.

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दरअसल, कानपुर के एक शेल्टर होम में बीते दिनों उस वक्त हड़कंप मच गया था, जब यहां 57 लड़कियां कोरोना वायरस पॉजिटिव पाई गई थीं. इसके अलावा इनमें से कुछ लड़कियां गर्भवती भी थीं. इसी के बाद से प्रियंका गांधी इस मामले को उठा रही थीं. प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने फेसबुक पोस्ट में कानपुर शेल्टर होम में नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने और खासकर एचआईवी और हेपेटाइटिस सी के संक्रमित होने की बात कही थी. साथ ही कांग्रेस महासचिव ने बिहार मुजफ्फरपुर और यूपी के बलिया वाले शेल्टर होम का मामला भी सामने रखा था.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि कानपुर के सरकारी बाल संरक्षण गृह से आई खबर से उप्र में आक्रोश फैल गया है. कुछ नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने का गंभीर खुलासा हुआ है. इनमें 57 कोरोना से व एक एड्स से भी ग्रसित पाई गयी है, इनका तत्काल इलाज हो. सरकार शारीरिक शोषण करनेवालों के खिलाफ तुरंत जांच बैठाए.

वहीं, मायावती ने कहा था कि कानपुर राजकीय संरक्षण गृह में काफी बहन-बेटियों के कोरोना संक्रमित होने व कुछ के गर्भवती होने की खबर से सनसनी और चिंता की लहर दौड़ना स्वाभाविक ही है. बीएसपी की मांग है कि यूपी सरकार कानपुर बालिका संरक्षण गृह की घटना की लीपापोती न करे बल्कि इसको गंभीरता से ले व इसकी उच्च-स्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे.

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