जयराम ठाकुर ने मुफलिसी से लड़कर बनाई अपनी पहचान, ऐसा रहा सियासी सफर

सीमित साधनों और मुफलिसी से संघर्ष करते हुए कई चेहरे देश की राजनीति में अपनी अहम जगह और पहचान कायम करने में कामयाब रहे हैं. इन्हीं में से एक नाम आता है हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का. जानिए कैसा रहा उनका निजी और सियासी सफर.

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जयराम रमेश(फाइल फोटो) जयराम रमेश(फाइल फोटो)

राहुल झारिया

  • नई दिल्ली,
  • 09 अप्रैल 2019,
  • अपडेटेड 3:11 AM IST

देश की राजनीति में सीमित साधनों और मुफलिसी से संघर्ष करने वाले कई चेहरे अपनी अहम जगह और पहचान कायम करने में कामयाब रहे हैं. इन्हीं में से एक नाम हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आता है. 27 दिसंबर 2017 को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) विधायक दल के नेता बने ठाकुर ने मुख्यमंत्री की गद्दी संभाली. वे प्रदेश के 13वें और बीजेपी की ओर से तीसरे मुख्यमंत्री प्रदेश में हैं. बढ़ई के घर से ताल्लुक रखने वाले जयराम मंडी के चच्योट सीट फिर सिराज (पुनर्सीमांकन के बाद नया नाम मिला) से 5वीं बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. राष्ट्रीय सेवक संघ (आरएसएस) और एबीवीपी से उनका गहरा नाता रहा है.

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जयराम ठाकुर का जन्म 6 जनवरी 1965 को मंडी जिले के टांडी में सीमित साधनों वाले परिवार में हुआ. उनके पिता का नाम जेठूराम ठाकुर है. इनकी पत्नी का नाम डॉक्टर साधना ठाकुर है. जो पेशे से डॉक्टर हैं और उनकी दो बेटियां हैं. उनके एक भाई, सोमाभाई एक सेवानिवृत्त स्वास्थ्य अधिकारी हैं, जो अब अहमदाबाद में एक वृद्धाश्रम चलाते हैं. उनके एक और भाई प्रहलाद की अहमदाबाद में ही अपनी उचित मूल्य की दुकान है. उनके तीरे भाई पंकज गांधीनगर में सूचना विभाग में कार्यरत हैं.  

जयराम ठाकुर ने वल्लभ गवर्नमेंट कॉलेज से बीए की ग्रैजुएशन किया और चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सटी से एमए की डिग्री हासिल की.

उन्होंने अपना सियासी सफर छात्र राजनीति से ही शुरू कर दिया था. वल्लभ गवर्नमेंट कॉलेज से पढ़ाई के दौरन ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए. जल्द ही वे संगठन के संयुक्त सचिव बन गए और 1986 तक इस पद पर रहे. वे एबीवीपी के संगठन सचिव भी रहे. 1993-95 के दौरान उन्होंने बीजेपी युवा मोर्चा के राज्य सचिव के तौर पर काम किया. छात्र जीवन में एबीवीपी के समर्पित कार्यकर्ता रहे ठाकुर बाद में संघ के करीब आते गए.

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political carrier before CM

आरएसएस के आंगन में पले-बढ़े ठाकुर ने 28 साल की उम्र में पहली बार 1993 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुनाव लड़ा था. महज 800 वोटों के अंतर से हारने के बाद भी वे बीजेपी आलाकमान की नजर में आ गए. इसके बाद 1998 में ठाकुर ने इसी सीट से चुनाव लड़ा. इस तरह उन्होंने 1998 में अपना पहला चुनाव जीता. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा एक के बाद एक बतौर विधायक लगातार पांच बार जीत दर्ज करते आए हैं.

उन्होंने मंडी के सिराज विधानसभा से जीत दर्ज की है. इससे पहले जयराम हिमाचल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के पद पर रहे हैं. वे धूमल सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग का कार्यभार भी संभाल चुके हैं. 2000-03 में उन्होंने पार्टी के उपाध्यक्ष तौर पर काम किया. वे पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के करीबी माने जाते हैं.

27 दिसंबर 2017 को जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री बने. उन्होंने अपना शपथ ग्रहण खुले मैदान में आयोजित कर रिकॉर्ड बनाया है. इस दौरान छोटे से मैदान पर जनता की भारी भीड़ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थी.

गौरतलब है कि चुनाव से पहले प्रेम कुमार धूमल को सीएम केंडिडेट घोषित किया गया था. लेकिन वे चुनाव हार गए. जिसके बाद नए नाम पर चर्चा की गई. हालांकि, इस बीच जेपी नड्डा का नाम भी सामने आया था और समर्थकों के बीच खींचतान और झड़पें भी हुईं.

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यहां तक कि केंद्रीय मंत्री नड्डा को सीएम बनाने पर कुछ विधायकों ने उनके लिए अपनी विधानसभा सीट खाली करने का भी ऑफर भी रख दिया था. लेकिन मुख्यमंत्री का नाम तय होने में एक बार फिर संघ का फैक्टर निर्णायक साबित हुआ. नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ-साथ संघ का भी करीबी होने के चलते जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब रहे. अंतिम वक्त में जेपी नड्डा भी रेस में न सिर्फ बने हुए थे, बल्कि जयराम ठाकुर से आगे चल रहे थे. लेकिन जेपी नड्डा पर संघ फैक्टर भारी पड़ गया और ताज जयराम के सिर सजा.

लगातार पांचवीं बार जीत हासिल करने के बाद मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचने वाले मृदुभाषी और कर्मठ जयराम के सामने पदग्रहण करते ही कई चुनौतियों से भी सामना करना पड़ा. हालांकि अब तक के राजनीतिक सफर में उन्हें जो जिम्मेदारी मिली उसमें उन्होंने कामयाबी हासिल की.

हिमाचल प्रदेश में भी मोदी-शाह की जोड़ी ने कई बड़े नामों को पीछे छोड़ते हुए जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री चुना है. ऐसे में जयराम के पास सबसे बड़ी यही चुनौती है कि बतौर मुख्यमंत्री कामयाबी हासिल करें और प्रदेश में स्थायी सरकार चलाकर मोदी-शाह की पसंद को सही साबित करना होगा.

पार्टी और संगठन के मजबूत नेता माने जाने वाले ठाकुर को सबसे मेहनती राजनेताओं में से एक माना जाता है और उन्होंने विभिन्न जिम्मेदार पदों जैसे शिक्षा, ग्रामीण नियोजन और सामान्य विकास समिति के अध्यक्ष और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया है.

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क्षत्रिय समाज से आने वाले जयराम ठाकुर समाज में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले नेता के तौर पर पहचान बना चुके हैं. लो प्रोफाइल रहने से आम लोगों के बीच भी उनकी गहरी पैठ है. वे हिमाचल के उन इलाकों में जाकर पार्टी को मजबूत करते रहे हैं, जहां ठंड के मौसम में कोई जाना नहीं चाहता है.

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