Penalty Shootout Rules: क्या होता है पेनल्टी शूटआउट? जिसने बिगाड़ दिया है बड़ी-बड़ी टीमों का खेल

फीफा वर्ल्ड कप 2022 में मुकाबले उलटफेर से भरपूर रहे हैं. नॉकआउट चरण में तो कुछ मुकाबलों का नतीजा निकालने के लिए पेनल्टी शूटआउट तक का सहारा लेना पड़ा है. देखा जाए तो स्पेन, ब्राजील जैेसी बड़ी टीमों का गेम पेनल्टी शूटआउट ने ही बिगाड़ा है. आइए जानते हैं कि ये पेनल्टी शूटआउट है क्या...

Advertisement
पेनल्टी का बचाव करते गोलकीपर पेनल्टी का बचाव करते गोलकीपर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

कतर में जारी फीफा वर्ल्ड कप 2022 अपने आखिरी सफर की ओर बढ़ चला है. अब केवल चार टीमें अर्जेंटीना, क्रोएशिया, मोरक्को और फ्रांस ही खिताबी रेस में बच गई हैं. इन चार टीमों में कौन-सी टीम चैम्पियन बनने में कामयाब रहेगी ये कहना अभी काफी मुश्किल है. इस बार के फीफा वर्ल्ड कप में मुकाबले काफी रोमांचक और उलटफेर से भरे रहे हैं. नॉकआउट चरण में कुछ मुकाबलों का नतीजा निकालने के लिए पेनल्टी शूटआउट का सहारा लेना पड़ा है.

Advertisement

मौजूदा टूर्नामेंट में अबतक चार मुकाबले पेनल्टी शूटआउट में गए हैं. सबसे पहले प्री-क्वार्टर फाइनल में क्रोएशिया ने जापान को शूटआउट में हराकर आउट कर दिया था. फिर स्पेन की टीम को मोरक्को ने शूटआउट में हार का स्वाद चखाया था. फिर क्वार्टर फाइनल स्टेज में क्रोएशिया और ब्राजील के साथ ही अर्जेंटीना-नीदर्लेंड का मुकाबला पेनल्टी शूटआउट में गया. कुल मिलाकर कहें तो स्पेन, ब्राजील, जापान और नीदरलैंड की टीम का गेम पेनल्टी शूटआउट ने ही बिगाड़ा है.

क्लिक करें- रोनाल्डो-नेमार जैसे चैम्पियन फेल, वर्ल्ड कप की रेस में अब बचे सिर्फ ये दो सुपरस्टार

कब होता है पेनल्टी शूटआउट का इस्तेमाल?

फीफा विश्व कप, यूरो कप जैसे फुटबॉल टूर्नामेंट्स में नॉकआउट चरण के मैचों के लिए पेनल्टी शूटआउट का विकल्प मौजूद रहता है. नॉकआउट मुकाबलों में यदि निर्धारित समय के साथ ही अतिरिक्त समय में भी स्कोर बराबरी पर रहता है तब विजेता का फैसला करने के लिए पेनल्टी शूटआउट की मदद ली जाती है. उदाहरण के लिए अर्जेंटीना-नीदरलैंड के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबले में निर्धारित समय तक दोनों टीमों का स्कोर 2-2 से बराबरी पर था, ऐसे में मुकाबला पहले अतिरिक्त समय में गया. 30 मिनट के अतिरिक्त समय में भी स्कोर 2-2 ही था जिसके चलते पेनल्टी शूटआउट का इस्तेमाल किया गया. पेनल्टी शूटआउट में लियोनेल मेसी की टीम अर्जेंटीना ने जीत हासिल कर ली.

Advertisement

केवल गोलकीपर कर सकता है बचाव

सबसे पहले दोनों ही टीमों के कोच पेनल्टी किक‌ लेने के लिए पांच-पांच खिलाड़ियों का चयन करते हैं. फिर दोनों ही टीमों के कप्तान मैच रेफरी से मिलकर यह निर्धारित करते हैं कि शूटआउट पिच के किस छोर पर होगा. इसके साथ ही टॉस करके तय किया जाता है कि कौन सी टीम शूटआउट में पहले पेनल्टी किक लेगी. शूटआउट में गोल का बचाव करने के लिए गोलकीपर एकमात्र खिलाड़ी होता है जो गोलपोस्ट के सामने खड़ा रहता है. प्रत्येक खिलाड़ी द्वारा पेनल्टी किक लेने के बाद, सबसे अधिक गोल करने वाली टीम मैच की विजेता होती है.

पेनल्टी किक का ये है दिलचस्प नियम

यदि पेनल्टी शूटआउट में पांच-पांच पेनल्टी शूटआउट के बाद भी स्कोर बराबर रहता है तो दोनों टीमें तबतक पेनल्टी किक लेना जारी रखती हैं, जबतक कि एक टीम दूसरी से अधिक गोल नहीं कर लेती. उदाहरण के लिए दोनों ही टीमों के पांचों खिलाड़ियों ने पेनल्टी शूटआउट में गोल कर दिया तो छठी पेनल्टी किक ली जाएगी. यदि छठी किक के दौरान एक टीम का प्लेयर गोल नहीं दाग पाया जबकि विपक्षी टीम ने स्कोर कर दिया तो वह विजेता बन जाएगा. यदि दोनों ही टीमों ने स्कोर किया तो सातवीं बार भी पेनल्टी किक का इस्तेमाल किया जाएगा.

Advertisement

पेनल्टी शूटआउट का किसने किया आविष्कार?

इजरायल फुटबॉल एसोसिएशन (IFA) के पूर्व महासचिव जोसेफ डेगन को पेनल्टी शूटआउट का आविष्कार करने का श्रेय दिया जाता है. साल 1969 में उन्होंने प्रस्तावित रखा कि फीफा पेनल्टी शूटआउट शुरू करे. बाद में साल 1970 में पेनल्टी शूटआउट को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई. तब से लगभग हर बड़े टूर्नामेंट में पेनल्टी शूटआउट का उपयोग किया गया है और यह फ़ुटबॉल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है.


 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement