PAK की शर्तें, ICC की सख्ती और PCB का यू-टर्न... 48 घंटों में कैसे पलट गई पूरी कहानी

पिछले 48 घंटों में ICC और PCB के बीच चला यह टकराव सिर्फ भारत-पाकिस्तान मैच तक सीमित नहीं था, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बदलते पावर बैलेंस का संकेत भी था. ICC ने साफ कर दिया कि तय शेड्यूल और टूर्नामेंट की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं होगा, जबकि PCB का शुरुआती सख्त रुख घरेलू दबावों से प्रेरित था.

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PCB का रुख घरेलू दबावों से प्रेरित था. (Photo, Gett) PCB का रुख घरेलू दबावों से प्रेरित था. (Photo, Gett)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:44 AM IST

T20 वर्ल्ड कप के बीच अचानक उठा विवाद सिर्फ एक मैच तक सीमित नहीं था. यह टकराव था क्रिकेट के वैश्विक ढांचे और एक बोर्ड के राजनीतिक दबाव के बीच और पिछले 48 घंटों में यही टकराव पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को अपने सबसे सख्त रुख से पीछे हटने पर मजबूर कर गया.

मामला शुरू कहां से हुआ?

भारत के खिलाफ ग्रुप मैच को लेकर PCB के भीतर असहजता नई नहीं थी, लेकिन जब हालिया घटनाक्रम के बाद बहिष्कार का विकल्प खुले तौर पर चर्चा में आया, तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को हस्तक्षेप करना पड़ा. ICC के लिए यह सिर्फ भारत-पाकिस्तान मुकाबला नहीं था, बल्कि टूर्नामेंट की विश्वसनीयता, कॉन्ट्रैक्ट्स और वैश्विक प्रसारण व्यवस्था का सवाल था.

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ICC ने क्या साफ किया?

ICC का संदेश शुरुआती दौर में ही स्पष्ट था- तय शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा. मैच न खेलने की स्थिति में उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. प्वाइंट कट, वॉकओवर हार और आगे चलकर आर्थिक दंड जैसे विकल्प मौजूद हैं. यह ICC का अब तक का सबसे सख्त सार्वजनिक और निजी रुख माना गया.

PCB क्यों अड़ा रहा?

PCB के भीतर शुरुआती प्रतिक्रिया 'प्रिंसिपल स्टैंड' की थी. बोर्ड यह दिखाना चाहता था कि वह घरेलू राजनीतिक दबाव को नजरअंदाज नहीं कर सकता. साथ ही यह संदेश भी देना था कि भारत-पाक मैच सिर्फ खेल नहीं, संवेदनशील मुद्दा है.

इसी दौरान पाकिस्तानी मीडिया में बहिष्कार को 'मजबूत फैसला' बताकर पेश किया गया. यहीं से बैक-चैनल डिप्लोमेसी शुरू हुई.

शनिवार शाम से ICC और PCB के बीच अनौपचारिक बातचीत तेज हुई.
ICC ने साफ किया कि  कोई भी बोर्ड टूर्नामेंट को बंधक नहीं बना सकता. अगर एक टीम पीछे हटती है तो बाकी टीमें और ब्रॉडकास्टर्स उसका खामियाजा क्यों भुगतें?

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यह वह मोड़ था जहां मामला सार्वजनिक बयानबाजी से निकलकर नुकसान के गणित में बदल गया.

PCB के भीतर क्या बदला?

रविवार तक आते-आते PCB के अंदर दो साफ धड़े दिखने लगे- 

- सख्ती बनाए रखने वाला धड़ा

- ICC से टकराव के दीर्घकालिक असर को लेकर चिंतित धड़ा

यहीं पर यह सवाल उठा -

क्या एक मैच के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अलग-थलग पड़ना सही होगा?

पूर्व खिलाड़ियों, पूर्व अधिकारियों और कानूनी सलाहकारों की राय भी ली गई.

ICC का दूसरा और निर्णायक संकेत

रविवार दोपहर ICC ने फिर दोहराया -

मैच न खेलने की स्थिति में वॉकओवर हार तय है.

किसी तरह की विशेष छूट नहीं दी जाएगी.

इस संदेश ने PCB को यह समझा दिया कि इस बार ICC पीछे नहीं हटेगी.

यू-टर्न क्यों और कैसे हुआ?

सोमवार सुबह तक तस्वीर लगभग साफ थी.
PCB ने आकलन किया -

- बहिष्कार से आर्थिक नुकसान तय है.

- ICC के साथ रिश्ते खराब होने का जोखिम है.

- खिलाड़ियों को भी इसका सीधा नुकसान होगा.

नतीजा- बहिष्कार की भाषा चुपचाप बयानों से गायब हो गई.

अंतिम फैसला

सोमवार दोपहर PCB ने संकेत दिए कि टीम तय शेड्यूल के अनुसार खेलेगी. ICC ने भी राहत की सांस लेते हुए साफ किया कि कोई पेनल्टी नहीं लगाई जाएगी और टूर्नामेंट आगे बढ़ेगा.

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इसका बड़ा मतलब क्या है?

यह पूरा प्रकरण बताता है कि  ICC अब टूर्नामेंट संचालन को लेकर जीरो टॉलरेंस मोड में है. PCB ने यह समझ लिया कि क्रिकेट में सख्ती की एक सीमा होती है. भारत-पाकिस्तान मुकाबला, तमाम तनावों के बावजूद, अब भी विश्व क्रिकेट की धुरी है.

48 घंटे पहले जो मामला टकराव की तरफ बढ़ रहा था, वह आखिरकार समझौते और व्यावहारिकता पर खत्म हुआ.

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