'मेरी वाइफ फाइव-इन-वन’… मौत की आहट के बीच 28 साल छोटी बुलबुल ने इस क्रिकेटर को जिंदा रखा

बुलबुल को 'फाइव-इन-वन' बताते हुए अरुण लाल कहते हैं कि वह वो सिर्फ मेरी पत्नी नहीं… वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त है, मेरी बेटी है, मेरी मां है, मेरी प्रेमिका है… सब कुछ एक में.' बीमारी के बाद बदली जीवनशैली, योग और प्रकृति से जुड़ाव के बीच अरुण खुद को 'गॉड्स सन' मानते हैं, लेकिन साफ है कि उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी रोशनी और असली ताकत बुलबुल ही हैं.

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बुलबुल बनीं अरुण लाल की जीवनरेखा...  (Bulbul Saha Face Book image) बुलबुल बनीं अरुण लाल की जीवनरेखा... (Bulbul Saha Face Book image)

विश्व मोहन मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:42 PM IST

जब उम्र का एक पड़ाव ऐसा आता है, जब कदम धीमे हो जाते हैं और जिंदगी जैसे ठहरकर पीछे मुड़कर देखने लगती है- तभी अगर कोई हाथ थाम ले, तो वही ठहराव फिर से रफ्तार बन जाता है. बंगाल टीम के पूर्व कोच और भारत के लिए 16 टेस्ट व 13 वनडे खेल चुके 70 साल के अरुण लाल की जिंदगी में वह रफ्तार, वह रोशनी हैं उनकी पत्नी बुलबुल साहा- जो सिर्फ साथ नहीं निभा रहीं, बल्कि हर मोड़ पर उनके जीवन को नए मायने, ऊर्जा और नया उत्साह दे रही हैं.

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2 मई 2022 को 66 साल के अरुण लाल अपने से 28 साल छोटी बुलबुल साहा के साथ शादी के बंधन में बंधे. करीब चार साल पहले जब उन्होंने बुलबुल का हाथ थामा था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह रिश्ता इतना सुंदर, संतुलित और जीवंत होगा. आज दोनों हर लम्हा साथ जी रहे हैं- बराबरी से, साझेदारी में.

भारत के लिए ओपनिंग करने वाले अरुण लाल की यह दूसरी शादी है. पहली पत्नी रीना से उनका तलाक हो चुका है. रीना की तबीयत लंबे समय से खराब रहने लगी थी और उनकी सहमति के बाद ही अरुण ने जीवन में यह नया अध्याय शुरू किया. इस निर्णय में भी वही संवेदनशीलता दिखती है, जो बाद में उनके रिश्ते की पहचान बनी.

पूर्व भारतीय क्रिकेटर अरुण लाल जब बोलते हैं तो सिर्फ क्रिकेट की बातें नहीं करते, वे जिंदगी का अर्थ खोलते हैं. उनके शब्दों में ठहराव है, अनुभव है और सबसे बढ़कर- एक गहरी कृतज्ञता है. इस इंटरव्यू (@EKDISHAMOMENTS) में उन्होंने क्रिकेट, बीमारी, जीवन-दर्शन और अपनी पत्नी बुलबुल साहा के बारे में जो कहा, वह किसी भावुक उपन्यास से कम नहीं.

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अरुण लाल को मिला बुलबुल साहा का सहारा...   (Bulbul Saha Face Book image)

'मैंने कभी भारत के लिए खेलने की जिद नहीं की…'

अरुण लाल कहते हैं, 'मैंने कभी कोई महत्वाकांक्षा नहीं पाली. मैं जो भी करता था, उसमें अपना 100 प्रतिशत देता था. लेकिन मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मुझे हर हाल में भारत के लिए खेलना है.'

उनके लिए क्रिकेट जीवन का एक हिस्सा था, पूरा जीवन नहीं. वे खुद को 'फ्री बर्ड' कहते हैं- एक ऐसा इंसान जिसने बचपन को जिया, पेड़ों को भगवान की तरह देखा, चिड़ियों को दाना खिलाया और जिंदगी को प्लानिंग से ज्यादा अनुभवों से सीखा.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट उनके लिए 'ट्रॉमा' भी रहा- बार-बार टीम में आना, बाहर होना, फिर घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बनाकर वापसी करना. लेकिन उन्होंने इसे भी स्वीकार किया.

- 'फॉर्म सिर्फ मानसिक अवस्था है… जब आप अच्छा खेल रहे होते हैं तो अगले मैच का इंतजार नहीं होता. जब खराब खेल रहे होते हैं तो डर लगता है.'

13 घंटे की सर्जरी… और एक साल का अंधेरा

2016 में जब उनका कैंसर सामने आया, तब वे कमेंट्री के शिखर पर थे. लेकिन जीवन ने अचानक करवट ली. 13 घंटे की जटिल सर्जरी हुई. जबड़े की हड्डी, मांसपेशियां, लार ग्रंथि... सब निकाल दिया गया. बाएं पैर से हड्डी लेकर नया जबड़ा बनाया गया. रेडिएशन के दौरान गले में छाले, असहनीय दर्द, सांसों में सड़न की गंध…

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पर वह कहते हैं..., 'मैं दर्द पर ध्यान नहीं देता था. मैं रिकवरी पर ध्यान देता था. मुझे कभी नहीं लगा कि मैं मर जाऊंगा.'

ये सिर्फ साहस नहीं था- ये जीवन में गहरा विश्वास था.

उस कठिन दौर में एक नाम था- बुलबुल

और फिर बात आती है उस शख्स की, जिनके बारे में बोलते हुए अरुण लाल की आवाज बदल जाती है- बुलबुल साहा. 'वो सिर्फ मेरी पत्नी नहीं… वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त है, मेरी बेटी है, मेरी मां है, मेरी प्रेमिका है… सब कुछ एक में.'

बुलबुल संग खुशी के पल...  (Bulbul Saha Face Book image)

अरुण लाल कहते हैं, 'सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने कहा- 2000 कैलोरी रोज लेनी होगी. खाना निगलना मुश्किल था. रेडिएशन के बाद हर घूंट आग जैसा लगता था...तब बुलबुल दूध में रसगुल्ला, आइसक्रीम, पोषक चीजें मिलाकर 500-600 कैलोरी का शेक बनातीं. वो भी अरुण लाल मुश्किल से पी पाते थे. उल्टी हो जाती थी. लेकिन बुलबुल हार नहीं मानती थीं.'

अरुण ने माना, 'सर्जरी आसान थी… असली परीक्षा रेडिएशन थी. उन महीनों में बुलबुल ने मुझे जिंदा रखा.'

'वो झूठ नहीं बोलती…'

अरुण लाल मुस्कुराते हुए कहते हैं, 'वो मुझे कभी-कभी शर्मिंदा कर देती है, क्योंकि वो सच बोलती है- पूरा सच.'

वे बताते हैं कि बुलबुल बेहद पढ़ी-लिखी हैं- एमए, एमएल, बीएड, एमबीए डिप्लोमा… 11 साल की उच्च शिक्षा. लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा गर्व उनकी ईमानदारी और भावनाओं की गहराई पर है.

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अरुण लाल की बेबाकी गजब की रही..., 'मैं कहता हूं मैंने फाइव-इन-वन से शादी की है.' उनकी आवाज में गर्व भी है, कृतज्ञता भी और प्रेम भी.

बीमारी के बाद बदली जिंदगी

कैंसर के बाद उन्होंने कमेंट्री छोड़ दी. वह कहते हैं, 'मैं अब अलग तरह से जीता हूं. अब वे रोज दो घंटे योग, सूर्य नमस्कार और एक्सरसाइज करते हैं. स्वास्थ्य बैंक बैलेंस से बड़ा है. एक्सरसाइज आपके दिमाग को बदल देती है.'

उन्होंने नदी किनारे जमीन खरीदकर पेड़ लगाने शुरू किए. कहते हैं, 'ये निवेश नहीं, उपभोग है. मैंने ये धरती को लौटा दिया.'

अरुण लाल की सबसे बड़ी पारी जिंदगी के मैदान पर...  (Bulbul Saha Face Book image)

अंत में…

अरुण लाल खुद को 'गॉड्स सन' कहते हैं. उन्हें लगता है कि जब भी जिदगी नीचे जाती है, कोई अदृश्य हाथ संभाल लेता है.

शायद वो हाथ कभी माता-पिता का था, कभी क्रिकेट का, कभी दर्शकों का…
और सबसे ज्यादा- बुलबुल का.

इस पूरी बातचीत के बाद एक बात साफ हो जाती है- 
अरुण लाल की सबसे बड़ी पारी क्रिकेट के मैदान पर नहीं, जिंदगी के मैदान पर खेली गई. ... और उस पारी में नॉन-स्ट्राइकर एंड पर कोई नहीं, बल्कि उनके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ी थीं बुलबुल.

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