राजीव शुक्ला ने कहा कि वंदे मातरम हमेशा वंदे मातरम ही रहा है और यह कांग्रेस के समय में लागू हुआ था। हर दूसरी चीज़ को छीनने की आदत गलत है। वंदे मातरम की सबसे बड़ी भक्ति कांग्रेस की ही है। अगर आदेश आया नहीं होता तो यह कार्य काफी पहले ही होना चाहिए था। ग्यारह साल बाद यह बात याद आई, जिसे लेकर स्वागत किया जा रहा है।