एनसीपी, जो छात्रों के आंदोलन से बनी थी, को अभी तक के आंकड़ों के अनुसार केवल दो सीटें मिली हैं। इस पार्टी का गठजोड़ जमाते इस्लामी समेत 11 पार्टियों का था, लेकिन वे सम्मिलित होकर भी अधिकतम 62 सीटें ही हासिल कर पाए हैं। यह परिणाम दर्शाता है कि एनसीपी और उसके गठजोड़ ने चुनावी मैदान में पर्याप्त प्रभाव नहीं बनाया है। इस तरह की स्थिति ने पार्टी की उम्मीदों पर सवाल उठाए हैं और आगामी राजनीतिक परिदृश्य में उनकी भूमिका को चुनौती दी है।