रावण का अंत असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है. लेकिन रावण बेहद महाज्ञानी भी थे. वह अपने ज्ञान के अहंकार में अंधे हो चुके थे. कहा जाता है कि उनकी बुराइयों की वजह से ही उनका अंत हुआ था.
बता दें, अपने जीवन में रावण कुछ काम पूरे करना चाहते थे, लेकिन उनकी इच्छाएं पूरी
होने से पहले ही उनका अंत हो गया था. आइए जानें रावण की उन्हीं इच्छाओं के
बारे में जो अधूरी रह गईं....
रावण चाहते थे कि लोग भगवान राम की पूजा करना बंद कर दें और उनकी पूजा करें. लेकिन रावण की ये इच्छा पूरी नहीं हो पाईं.
रावण को सोने की चीजों का बहुत शौक था. वह सोने में सुगंध भरना चाहते थे, ताकि सोने की सुगंध के जरिए वो आसानी से कहीं भी मौजूद सोने को पा सकें.
रावण का एक सपना धरती से स्वर्ग तक सीढ़ी बनाने का था. वे चाहते थे कि उन सीढ़ियों से चढ़कर सभी लोग धरती से स्वर्ग चले जाएं. अपने इस सपने को पूरा करने के लिए रावण ने सीढ़ियां बनानी भी शुरू कर दी थीं, लेकिन सपना पूरा होने से पहले ही रावण मर गए और उनका सपना अधूरा रह गया.
रावण का एक सपना शराब से आने वाली गंध को खत्म करने का था, ताकि सभी लोग शराब पी सकें और अपने जीवन का आनंद ले सकें.
रावण समुद्र के पानी को मीठा करना चाहते थे, ताकि पीने के पानी की समस्या खत्म हो जाए.
रावण की एक इच्छा रक्त के लाल रंग को सफेद करने की थी. उनका मानना था कि अगर रक्त सफेद रंग का हो जाएगा तो कोई रक्त को देख नहीं सकेगा.