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धर्म

जानिए, इतिहास की सबसे खूबसूरत महिला को क्यों मिली ऐसी सजा!

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 17 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 2:01 PM IST
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आम्रपाली को इतिहास की सबसे खूबसूरत महिला कहा जाता है. आम्रपाली की खूबसूरती की तुलना किसी भी चीज से नहीं की जा सकती है. लेकिन आम्रपाली की खूबसूरती ही उसके दुर्भाग्य की सबसे बड़ी वजह बनी. आम्रपाली को बहुत ही कम उम्र में राज्य के आदेश से 'वेश्या' बनना पड़ा. वह शायद इतिहास की इकलौती ऐसी महिला थी जिसे ऐसी बदनसीबी झेलनी पड़ी. एक खूबसूरत लड़की से नगरवधु बनने और उसके बाद भिक्षुणी बन जाने की यात्रा में उस युग के कई प्रसिद्ध लोगों के नाम आते हैं. आइए जानते हैं आम्रपाली की ट्रैजिक और दुख भरी यह कहानी...

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प्राचीन भारत में 500 ईसा पूर्व लिच्छवी गणराज्य की राजधानी वैशाली में एक गरीब दंपती को एक आम के पेड़ के नीचे एक लड़की पड़ी मिली थी. आम्रपाली के माता-पिता का नाम ज्ञात नहीं है. वह आम के पड़े के नीचे पड़ी मिली थी इसलिए उसका  आम्रपाली रख दिया गया.

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आम्रपाली अपने समय की सबसे खूबसूरत महिला थी. पाली ग्रन्थों में उसके सौंदर्य का विवरण मिलता है. आम्रपाली इतनी खूबसूरत थी कि नगर का हर पुरुष उससे विवाह करने के लिए लालायित था. पाली ग्रन्थों के मुताबिक, राजा से लेकर व्यापारी हर कोई आम्रपाली को पाना चाहता था. आम्रपाली के लिए शादी के प्रस्तावों के ढेर लग गए. इतने सारे विवाह प्रस्तावों की वजह से आम्रपाली के माता-पिता बड़ी दुविधा में फंस गए थे.

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अगर आम्रपाली के लिए किसी एक को उसके माता-पिता चुनते तो नगर के बाकी पुरुष खफा हो जाते. नगर में अशांति तक फैल सकती थी.

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पाली ग्रन्थों के मुताबिक, वैशाली एक लोकतांत्रिक राज्य था जिसकी अपनी एक संसद भी थी. जब आम्रपाली की खबर वैशाली संसद के सदस्यों तक पहुंची तो उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा करने का फैसला किया. उन्होंने तय किया कि वैशाली राज्य की एकता और शांति के लिए सभी की खुशी को जरूरी है इसलिए आम्रपाली को नगरवधू बना दिया गया. आम्रपाली पूरे नगर की दुल्हन बन गई जिसे अब हर किसी से प्यार करना था.

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आम्रपाली को नगरवधु बनाने से वैशाली के लोग तो खुश हो गए लेकिन इस तरह से आम्रपाली अपनी ही खूबसूरती का शिकार बन गई. आम्रपाली को जनपथ कल्याणी की उपाधि दी गई. यह खिताब 7 साल के लिए दिया जाता था और इसे साम्राज्य की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली महिला को दिया जाता था.

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आम्रपाली को अपना महल मिला. उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए अपना पार्टनर चुनने का अधिकार भी मिला. इसके साथ ही वह दरबार की नर्तकी भी बन गई.

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आम्रपाली और बिम्बिसार-
मगध के राजा बिम्बिसार के वैशाली के साथ हमेशा ही शत्रुतापूर्ण रिश्ते रहे थे. ऐसे में आम्रपाली से मिलने जाने के लिए उन्हें दूसरा भेष धारण करना पड़ा ताकि कोई उन्हें पहचान नहीं सके. बिंबिसार खुद एक संगीतकार था. जब वह आम्रपाली से मिले तो दोनों एक-दूसरे के साथ प्यार में पड़ गए. आम्रपाली बिंबिसार के बच्चे की मां भी बनीं. उसका बेटा आगे चलकर एक बौद्ध भिक्षु बन गया.

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एक बार जब बिंबिसार ने वैशाली पर आक्रमण किया तो उसने आम्रपाली के महल में शरण ली. उसी दौरान आम्रपाली को बिंबिसार की असली पहचान पता चल गई. आम्रपाली ने बिंबिसार से युद्ध रोकने के लिए कहा और बिंबिसार ने आम्रपाली की बात मान ली. बिंबिसार ने आम्रपाली को मगध की महारानी बनने का प्रस्ताव भी दिया लेकिन आम्रपाली ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया क्योंकि वैशाली और मगध शत्रु थे. अगर आम्रपाली ने बिंबिसार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया होता तो शायद भयंकर युद्ध छिड़ जाता और हजारों लोग मारे जाते.

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आम्रपाली और अजातशत्रु-
बिंबिसार का पुत्र अजातशत्रु भी आम्रपाली पर मोहित हो गया था. आम्रपाली भी उससे प्रेम करने लगी थी. लेकिन जब वैशाली के लोगों को पता चला तो उन्होंने आम्रपाली को जेल में डाल दिया गया. अजातशत्रु इस बात से इतना क्रोधित हो गया कि उसने वैशाली पर कहर बरपा दिया. कई लोगों की जानें चली गईं. इस विभीषिका से आम्रपाली दुखी हो गई. वह अपने राज्य से बहुत प्यार करती थी, उसकी कीमत पर वह अपने प्रेम को नहीं पाना चाहती थी.

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जहां बड़े-बड़े व्यापारी, राजकुमार आम्रपाली पर मोहित हो गए थे वहीं आम्रपाली एक बौद्ध भिक्षु पर मोहित हो गईं. आम्रपाली ने बौद्ध भिक्षु को ना केवल खाने पर आमंत्रित किया बल्कि 4 महीने के प्रवास के लिए भी अनुरोध किया. बौद्ध भिक्षु ने उत्तर दिया कि वह अपने गुरू बुद्ध की आज्ञा के बाद ही ऐसा कर सकते हैं.

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बुद्ध ने सबको हैरानी में डालते हुए बौद्ध भिक्षु को इसकी अनुमति दे दी. 4 महीने बाद आम्रपाली बौद्ध भिक्षु के साथ आई और बुद्ध के चरणों में गिर गई. आम्रपाली ने जो कहा, उसे सुनकर सब हैरान रह गए.

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आम्रपाली ने कहा, मैं आपके बौद्ध भिक्षु को मोहित नहीं कर पाई लेकिन उनकी आध्यात्मिकता ने मुझे उन्हीं की राह पर चलने को विवश कर दिया है.


(आचार्य चतुरसेन शास्त्री के उपन्यास वैशाली की नगरवधु और बुद्धचरित, जातक कथाओं पर आधारित)

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