पितृपक्ष का सम्बन्ध पूर्वजों और पितरों से होता है. वे सूक्ष्म शरीर में आकर अपने लोगों की श्रद्धा ग्रहण करते हैं. साथ ही अपने लोगों को आशीर्वाद भी देते हैं. पूर्वजों और पितरों का सम्बन्ध मुख्यतः राहु केतु से होता है. कुछ अंश में इनका सम्बन्ध सूर्य चंद्र और बृहस्पति से भी होता है. अगर कुंडली में इनसे सम्बंधित योग हों तो इसका निराकरण इस समय बहुत सरलता से हो सकता है. गुरु चांडाल दोष और ग्रहण योग के निराकरण के लिए यह सर्वोत्तम अवसर होता है.
गुरु चांडाल दोष-
- यह योग राहु और बृहस्पति के साथ रहने से बनता है
- इस योग के होने पर जीवन में कई तरह की समस्याएं आती हैं
- विवाह, स्वास्थ्य और संतान के मामले में इसके परिणाम शुभ नहीं होते
- इसके निवारण के लिए पितृपक्ष में केले का दान करें
- रोज शाम को गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करें
- रोज शाम को उरद के बड़े और पानी किसी भूखे को खिलाएं
- अगर संभव हो तो एक पीपल का वृक्ष लगवा दें
चन्द्र ग्रहण दोष-
- यह योग चन्द्र राहु के सम्बन्ध से बनता है
- यह योग मानसिक समस्याएं, हार्मोन्स और रिश्तों की समस्या देता है
- इसके निवारण के लिए पितृपक्ष में पवित्र नदी में स्नान करें
ये उपाय भी करें-
- नित्य पितरों को जल में सफेद फूल डालकर अर्घ्य दें
- अपनी माता या किसी महिला को वस्त्र और आभूषण का दान करें
- पूरे पितृपक्ष में सुबह शाम "रुद्राष्टक" का पाठ करें
- अमावस्या के दिन किसी निर्धन को चावल का दान करें
सूर्य ग्रहण दोष
यह योग सूर्य राहु के सम्बन्ध से बनता है-
- इसके कारण आंखों की, मान सम्मान की, रोजगार की और रिश्तों की समस्या होती है
- इसके निवारण के लिए पितृपक्ष में सूर्य देव को काले तिल मिलाकर जल अर्पित करें
- ब्रह्म पुराण में उल्लिखित "सूर्य स्तोत्र" का पाठ करें
- किसी पुरुष को लकड़ी की वस्तु उपहार में दें
- अमावस्या के दिन किसी निर्धन व्यक्ति को गुड का दान करें