सोमवती अमावस्या व्रत का खास महत्व है क्योंकि यह सोमवार को आती है और इस
दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है. मानसिक परेशानी या चंद्रमा कमजोर हो तो
इस दिन विशेष लाभ मिल सकता है. इस बार सोमवती अमावस्या का संयोग 16 अप्रैल
सोमवार को बन रहा है. इस दिन विशेष योग बन रहा है. पौष मास में मूल
नक्षत्र के कारण दोषों से ज्यादा आसानी से मुक्ति मिल सकती है.
आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या के दिन कौन से कार्य वर्जित हैं...
ये नकारात्मक शक्तियां मानसिक रूप से कमजोर किसी भी व्यक्ति को तुरंत अपने प्रभाव में ले लेती हैं. यदि कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर हो और नकारात्मक सोच से घिरा हुआ हो तो ये संभावना और भी बढ़ जाती है. प्रायः जब कोई व्यक्ति इन नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव में आता है तो उसका खुद पर काबू नहीं रहता. वह उनके वश में हो जाता है.
सोमवती अमावस्या के दिन सुबह देर तक सोते ना रह जाएं. जल्दी उठे और पूजा-पाठ करें.
सोमवती अमावस्या के दिन स्नान का खास महत्व है इसलिए अगर आप किसी पवित्र नदी में स्नान नहीं कर पाएं है तो घर पर जरूर स्नान कर लें. स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना नहीं भूलें.
अमावस्या पर संयम बरतना चाहिए. इस दिन पुरुष और स्त्री को यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए. गरुण पुराण के अनुसार, अमावस्या पर यौन संबंध बनाने से पैदा होने वाली संतान को आजीवन सुख नहीं मिलता है.
अमावस्या के दिन पीपल की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं लेकिन शनिवार के अलावा अन्य दिन पीपल का स्पर्श नहीं करना चाहिए इसलिए पूजा करें लेकिन पीपल के वृक्ष का स्पर्श ना करें. इससे धन की हानि होती है.
इस अमावस्या पर शराब और मांस इत्यादि से दूर रहें.
इस दिन चटाई पर सोना चाहिए तथा शरीर में तेल नहीं लगाना चाहिए. दोपहर में न सोएं.
सोमवती अमावस्या के दिन लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजें भी न खाएं.
सोमवती अमावस्या के दिन शेव, हेयर और नेल कटिंग ना करें. इन कामों को भी वर्जित किया गया है.
अमावस्या पर घर में पितरों की कृपा पाने के लिए घर में कलह का माहौल बिल्कुल नहीं होना चाहिए. लड़ाई-झगड़े और वाद-विवाद से बचना चाहिए. इस दिन कड़वे वचन तो बिल्कुल नहीं बोलने चाहिए.
अगर सोमवती अमावस्या का व्रत हैं तो श्रृंगार करने से बचें. सादगी अपनाएं.
इस दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा करके सुखद वैवाहिक जीवन का वरदान मिलता है.