साईं बाबा को समाधि लिए आज 101 वर्ष पूरे हो चुके हैं. 15 अक्टूबर 1918 को साईं बाबा ने शिरडी में समाधि ली थी. ऐसा कहा जाता है कि साईं महज 16 साल की उम्र में शिरडी आए थे और 1918 तक वो यहीं रहे. जिस दिन साईं ने समाधि ली थी उस दिन दशहरा भी था.
शिरडी वाले साईं बाबा का वास्तविक नाम, जन्मस्थान और जन्म की तारीख किसी को नहीं पता है. हालांकि साईं का जीवनकाल 1838-1918 तक माना जाता है. साईं 16 साल की उम्र में शिरडी आए और चिर समाधि में लीन होने तक यहीं रहे.
साईं को लोग आध्यात्मिक गुरु और फकीर के रूप में भी जानते हैं. शिरडी का साईं मंदिर शिरडी गांव में साईं की समाधि के ऊपर बनाया गया है. साईं के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए इस मंदिर का निर्माण 1922 में किया गया था.
शिरडी में साईं का एक विशाल मंदिर है. मान्यता है कि, चाहे गरीब हो या अमीर साईं के दर्शन करने इनके दरबार पहुंचा कोई भी शख्स खाली हाथ नहीं लौटता है. एक अनुमान के मुताबिक शिरडी में हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये का चढ़ावा
आता है. दूसरे शब्दों में कहें तो साईं धाम देश के पांचवें सबसे अमीर तीर्थ
स्थलों में शुमार है.
शिरडी के साईं की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है और यह पवित्र धार्मिक स्थल महाराष्ट्र के अहमदनगर के शिरडी गांव में स्थित है. यह साईं की धरती है जहां साईं ने अपने चमत्कारों से लोगों को विस्मृत किया.
साईं का जीवन शिरडी में बीता जहां उन्होंने लोक कल्याणकारी कार्य किए. साईं बाबा ने अपना ज्यादातर समय शिरडी के द्वारका माई में बिताया.
यहां उनकी इस्तेमाल की गई चीजें आज भी संभालकर रखी गई हैं. शिरडी स्थित साईं धाम के कपाट सुबह 5 बजे ही श्रद्दालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं.