Maha Shivaratri 2019: महाशिवरात्रि का पर्व सोमवार 4 मार्च को है. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है. भगवान शिव के अनेक रूप हैं. कोई उन्हें भोलेनाथ कहता है तो कोई महादेव. कोई महेश कहता है तो कोई शिव. लेकिन इन सभी रूपो में एक चीज समान रहती है- शिव जी की तीसरी आंख. जी हां, हम सभी ने शिव की तीसरी आंख के बारे कई कथांए सुनी होंगी, लेकिन फिर भी ये एक रहस्य सा ही लगता है. तो चलिए आपको बताते हैं महादेव की तीसरी आंख का रहस्य क्या है?
इस के बाद कामदेव ने एक आम के पेड़ के पीछे से पुष्प बाण चलाया, जो सीधे शिव के हृदय में जाकर लगा और उनका ध्यान भंग हो गया. अपने ध्यान के भंग होने से महाकाल इतने क्रोधित हो गए कि उन्होंने अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया. अब देवताओं को इस बात की संतुष्टि थी कि भोलेनाथ का ध्यान समाप्त हो गया. लेकिन इस बात का दुख भी था कि कामदेव को अपनी जिंदगी का बलिदान देना पड़ा. जब कामदेव की पत्नि ने शिव से गुहार लगाई कि उनके पति को पुनः जीवित कर दें, तब शिव ने कहा कि द्वापर युग में कामदेव भगवान कृष्ण के पुत्र के रूप में फिर जन्म लेंगे.
एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान शिव अपने ध्यान में मग्न थे तब माता पार्वती ने अपनी दोनों हथेलियों से उनकी आंखों को ढक दिया. इसके चलते पूरी दुनिया में अंधेरा छा गया था.
कहा जाता है कि उस समय महादेव ने अपनी तीसरी आंख से इतना प्रकाश प्रजुलित किया की पूरी धरती जलने लगी. तब माता पार्वती ने तुरंत अपनी हथेलियां हटा लीं और सब सामान्य हो गया. इस कथा से ये पता चला कि भगवान शिव की एक आंख सूर्य के समान है तो दूसरी चंद्र के समान.
भगवान शिव की तीसरी आंख दिव्य दृष्टि की है प्रतीक-
मनुष्यों के पास दो नेत्र होते हैं. इसलिए हम सीमित देख सकते हैं लेकिन भगवान शिव सभी पहलुओं से अवगत होते हैं. भगवान शिव की तीसरी आंख उनकी शक्ति का केंद्र भी है. इससे उनकी छवि अत्यंत ही प्रभावशाली हो जाती है.
ये भी मान्यता है कि भगवान शिव की तीसरी आंख खुलते ही समस्त सृष्टि भस्म हो जाएगी. दूसरे शब्दों में महादेव के क्रोध के सामने किसी की नहीं चल सकती और सबकुछ तबाह हो जाएगा.