साल 2008 से पहले नेपाल में राजशाही व्यवस्था थी और नेपाल एक हिंदू राष्ट्र हुआ करता था. लेकिन 2008 में संवैधानिक व्यवस्था की नींव पड़ने के साथ ही नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के तौर पर स्थापित हुआ.
दरअसल नेपाल की 80 प्रतिशत से ज्यादा की आबादी हिंदू है. अभी भी समय-समय पर नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग उठती रहती है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह पड़ोसी देश नेपाल के लिए रवाना हो गए हैं.
बतौर प्रधानमंत्री ये नरेंद्र मोदी का तीसरा नेपाल दौरा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनकपुर के जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नेपाल का जानकी मंदिर क्यों इतना मशहूर है?
नेपाल के जनकपुर के केन्द्र में स्थित जानकी मंदिर देवी सीता को समर्पित है. इस मंदिर को जनकपुरधाम भी कहा जाता है. हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग इस मंदिर के विशाल परिसर को देखकर दंग रह जाते हैं.
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ की रानी ने इस मंदिर को 1911 में बनवाया था. इसका निर्माण कार्य में तकरीबन 16 साल लगे थे. मन्दिर के विशाल परिसर के आसपास कुल मिलाकर 115 सरोवर हैं. इसके अलावा कई कुण्ड भी हैं, जिनमें गंगासागर, परशुराम कुण्ड एवं धनुष-सागर अधिक प्रसिद्ध हैं.
टीकमगढ़ की रानी वृषभानु कुमारी के आदेश पर इस मंदिर का निर्माण कार्य साल 1895 में शुरू हुआ था जो 1911 तक चलता रहा. उस समय इस मंदिर के निर्माण में कुल 9 लाख रुपये खर्च हुए थे. इस वजह से आसपास के लोग इस मंदिर को नौलखा मंदिर भी कहते हैं.
कहा जाता है कि विवाह से पहले मां सीता इसी जगह पर रहती थीं. सन् 1657 में एक संन्यासी को यहां पर सीता माता की एक मूर्ति मिली थी. इसी के बाद संन्यासी शुरकिशोरदास ने आधुनिक जनकपुर की स्थापना की थी. मान्यता यह भी है कि इसी स्थान पर राजा जनक ने शिव-धनुष के लिए तप किया था.
कहते है कि भगवान राम ने इसी जगह पर शिव धनुष तोड़ा था. यहां मौजूद एक पत्थर के टुकड़े को उसी धनुष का अवशेष कहा जाता है. विवाह पंचमी के अवसर पर लोग अक्सर इस मंदिर में आते हैं.
यहां धनुषा नाम से विवाह मंडप स्थित है इसी में विवाह पंचमी के दिन पूरी
रीति-रिवाज से राम-जानकी का विवाह किया जाता है. यहां से 14 किलोमीटर
'उत्तर धनुषा' नाम का स्थान है.