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धर्म

आस्था के साथ-साथ जानिए क्या है छठ पूजा का वैज्ञानिक पहलू

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 12 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST
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छठ पर्व से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है. छठ के 4 दिनों के दौरान सूर्य उपासना आपको धन-धान्य और सेहत से मालामाल कर सकती है. इस चमत्कारी व्रत से जीवन के हर हिस्से में बेहतरी आती है. लेकिन छठ का नाता केवल धर्म से नहीं. इसके तमाम वैज्ञानिक पहलू भी हैं. इसीलिए इस महान पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है. कैसे? आइए जानते हैं...

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कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है, शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को इस पूजा का विशेष विधान है. छठ पूजा के तमाम वैज्ञानिक महत्व हैं.

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छठ पूजा का विधि-विधान व्रती के शरीर और मन को सौर ऊर्जा के अवशोषण के लिए तैयार करता है. बहुत कम ही लोगों को पता है कि छठ पूजा की इसी प्रक्रिया के जरिए प्राचीन भारत में ऋषि-मुनि बिना भोजन-पानी ग्रहण किए बिना कठोर तपस्या करने की ऊर्जा प्राप्त करते थे. छठ पूजा की विधि द्वारा ही वे भोजन-पानी से अप्रत्यक्ष तौर पर प्राप्त होने वाली ऊर्जा के बजाए सूर्य के संपर्क से सीधे ऊर्जा प्राप्त कर लेते थे.

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षष्ठी तिथि (छठ) एक विशेष खगोलीय अवसर होता है. इस समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती हैं. उसके संभावित कुप्रभावों से रक्षा करने का सामर्थ्य इस परंपरा में रहा है.

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अस्ताचलगामी और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान इसकी रोशनी के प्रभाव में आने से कोई चर्म रोग नहीं होता और इंसान निरोगी रहता है.

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इस पूजन का वैज्ञानिक पक्ष ये है कि इससे सेहत से जुड़ी समस्याएं परेशान नहीं करतीं.

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वैज्ञानिक रूप से देखें तो इस माह में सूर्य उपासना से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का स्तर बेहतर बनाए रख सकते हैं.

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दीपावली के बाद सूर्यदेव का ताप पृथ्वी पर कम पहुंचता है. इसलिए व्रत के साथ सूर्य के ताप के माध्यम से ऊर्जा का संचय किया जाता है, ताकि शरीर सर्दी में स्वस्थ रहे.

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इसके अलावा सर्दी आने से शरीर में कई परिवर्तन भी होते हैं. खास तौर से पाचन तंत्र से संबंधित परिर्वतन. छठ पर्व का उपवास पाचन तंत्र के लिए लाभदायक होता है. इससे शरीर की आरोग्य क्षमता में वृद्धि होती है.

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छठ में दिए जाने वाले अर्घ्य का भी विशेष महत्व है. सुबह, दोपहर और शाम तीन समय सूर्य देव विशेष रूप से प्रभावी होते हैं, सुबह के वक्त सूर्य की आराधना से सेहत बेहतर होती है.

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