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धर्म

ज्योतिष ओपिनियन: इन 3 राज्यों में सत्ता परिवर्तन के योग

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 07 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 3:13 PM IST
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राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है. आइए जानते हैं ज्योतिष के अनुसार इन चुनावों में किसका पलड़ा कितना भारी रहने वाला है.

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ज्योतिष की मानें तो 5 राज्यों के चुनाव में इस बार पक्ष-विपक्ष के समर्थकों में जबरदस्त मानसिक घमासान देखने को मिलेगा. प्रमुख दलों और उनके नेताओं की अपेक्षा आगामी विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी और कार्यकर्ता ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगे.

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इसके साथ ही एंटी-इनकंबेंसी जैसे मुद्दे मतदाता के रुझान कम प्रभावित करेंगे. तैयारी और प्रबंधन पर पार्टी अधिक ध्यान देंगी.

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यह भविष्यवाणी ज्योतिषाचार्य पंडित अरुणेश कुमार शर्मा ने की है, जिन्होंने चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के समय की प्रश्न कुंडली बनाई है.

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पंडित अरुणेश कुमार शर्मा ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने 6 अक्टूबर (शनिवार) को 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू कर 3 बजकर 19 मिनट से तारीखों का ऐलान करना आरंभ किया. छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना की चुनाव तारीखों का उन्होंने ही ऐलान किया.

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ऐलान के समय मकर लग्न 24 अंश 19 कला पर थी. मकर लग्न में बनी प्रश्नकुंडली के आधार पर ही ये भविष्यवाणियां की गई हैं, जो इस प्रकार हैं...

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चंद्रमा की स्थिति पापकर्तरी योग के साथ सबसे रहस्यमयी आठवें भाव में होने से इन चुनाव में विभिन्न दलों के समर्थकों और आम लोगों में अस्पष्टता की मनोस्थिति रहेगी. ऐसे में पक्ष विपक्ष के चहेतों में घोर तर्क-वितर्क और बौद्धिक घमासान देखने को मिल सकता है.

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प्रश्नकुंडली में पृथ्वी तत्व राशियां सबसे शुभ और प्रभावी हैं. ऐसे में जीत का दारोमदार दल के समग्र प्रभाव की तुलना में प्रत्याशी चयन और जमीनी कार्यकर्ताओं के सहयोग पर निर्भर करेगा. नेता और उनके भाषणों का प्रभाव जनता पर कम ही होगा.

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कुंडली में केंद्र की राशियां चर संज्ञक होने से दलों और उनके समर्थकों की सक्रियता इस बार कुछ ज्यादा ही देखने को मिलेगी. ऐसे में चुनाव आयोग को सफल संचालन के लिए अतिरिक्त प्रबंधन और बल लगाना होगा.

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राहु, केतु और मंगल की स्थिति भितरघात पर नियंत्रण रखेगी. अर्थात अपनों का ही खुलकर विरोध कम देखने को मिलेगा, जो होगा वो पीठ पीछे ही ज्यादा रहेगा.

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सत्ता का असर और एंटी-इनकंबेंसीदोनों ही जनता में बेअसर रहेंगे. ऐसे में संगठन और प्रबंधन जीत की राह को सुगम बनाएंगे.

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5 राज्यों में से तीन में सत्ता परिवर्तन और 2 में यथावत रहने के संकेत हैं. मिज़ोरम, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बदलाव के लिए मतदान की संभावना ज्यादा है, जबकि राजस्थान और तेलंगाना में सत्ता को एक बार फिर समर्थन मिल सकता है.

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हालांकि, इन चुनाव परिणामों का केंद्र की सत्ता पर बड़ा प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा. अर्थात इन चुनावों को सेमीफाइनल की तरह देखने की उम्मीद बेमानी होगी.

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