Vastu Tips: इन तिथियों पर कभी नहीं बनानी चाहिए रोटी, घर में आती है आर्थिक तंगी

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में भोजन से जुड़ी कई मान्यताएं हैं जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. कहते हैं कि कुछ विशेष तिथियों पर रोटी बनाना बहुत ही अशुभ होता है. आइए जानते हैं उन तिथियों के बारे में.

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इन मौकों पर नहीं बनानी चाहिए रोटी (Photo: Pexels) इन मौकों पर नहीं बनानी चाहिए रोटी (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

Vastu Tips: भोजन करने का संबंध सिर्फ पेट भरने तक ही सीमित नहीं बल्कि यह वास्तु शास्त्र से संबंधित माना जाता है. कहते हैं कि खाने से जुड़ी गलतियां करने से मां अन्नपूर्णा नाराज हो जाती हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, कुछ ऐसे खास दिन होते हैं, जब घर में रोटी बनाना अशुभ माना जाता है. कहा जाता है कि इन दिनों रोटी बनाने से अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा रुष्ट हो जाती हैं, जिससे घर में आर्थिक तंगी और भोजन की कमी जैसी स्थिति बन सकती है. इसलिए, इन दिनों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

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शरद पूर्णिमा 

शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है. इस दिन शाम को खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है और अगले दिन उसका सेवन किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन घर में रोटी बनाना वर्जित होता है और इसे अशुभ माना जाता है.

शीतलाष्टमी

शीतलाष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा की जाती है. इस दिन माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है. भोग के बाद वही भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन रोटी सहित कोई भी ताजा भोजन नहीं बनाना चाहिए.

घर में मृत्यु होने पर

पुराणों के अनुसार, जब किसी घर में मृत्यु हो जाती है, तो उस दिन और उसके बाद तेरहवीं संस्कार तक घर में रोटी या सामान्य भोजन नहीं बनाया जाता है. कहा जाता है कि इस अवधि में रोटी बनाने से अशुभ फल मिलते हैं.

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मां लक्ष्मी से जुड़े त्योहार

सनातन परंपरा में माना जाता है कि दीपावली और मां लक्ष्मी से जुड़े अन्य त्योहारों पर घर में रोटी नहीं, बल्कि पकवान बनाए जाते हैं. इस दिन पूड़ी, हलवा और सब्जी का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि रोटी बनाने से मां लक्ष्मी के स्वागत में कमी मानी जाती है.  

नाग पंचमी

नाग पंचमी के दिन चूल्हे पर तवा रखकर रोटी बनाना वर्जित माना जाता है. शास्त्रों में तवे को नाग के फन का प्रतीक माना गया है. इसलिए इस दिन तवे का उपयोग नहीं किया जाता. इसके बजाय पतीले में कोई अन्य व्यंजन बनाया जाता है.

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